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लूट-खसौट का अड्डा बने जन सेवा केंद्र

Wed, 25 May 2016 09:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Wed, 25 May 2016 09:52 PM IST
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Looting became a den of Public Service Center
jan suvidha - फोटो : अमर उजाला

शासन ने लोगों को सीधा लाभ देने और बिचौलियों की दखल से बचाने के लिए जन सेवा केंद्र खोले थे। इनका उद्देश्य लोगों को सरकारी फीस देकर ही योजनाओं का लाभ देना था। अब इन केंद्रों पर ही किसान, स्टूडेंटस और आम जन को लूटा जा रहा है।

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जन सेवा केंद्र संचालक लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर वसूली कर रहे हैं। निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा इन केंद्रों पर वसूला जा रहा है। अफसर भी निगरानी के नाम पर केवल खानापूर्ति ही करते हैं। हकीकत का पता लगाने के लिए जानने के लिए अमर उजाला की टीम बुधवार को जन सेवा केंद्रों पर पहुंची तो वसूली के खेल का खुलासा हुआ।
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समय दोपहर-2:30 बजे, स्थान बंचावली जनसेवा केंद्र
आय जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र की आड़ में 20 रुपये के स्थान पर 80 रुपये वसूले जा रहे थे। ज्यादा रुपये लेने के सवाल पर संचालक ने बताया कि 20 रुपये में से 18.50 रुपये प्रति सर्टिफिकेट सरकार काट लेती है। बाकी 1.50 रुपये बचता है। 1.50 रुपये में बिजली, इंटरनेट का बिल भी है।
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हम खुद भी लगे रहते हैं। ऐसे में अधिक रुपये लेना मजबूरी है। सरकारी शुल्क में बढ़ोतरी करनी चाहिए। केंद्र पर 50 से 80 रुपये प्रति सर्टिफिकेट वसूला जाता है। कभी कभी इमरजेंसी की आड़ में इससे ज्यादा की वसूली भी की जाती है।

दोपहर-2:30 बजे , स्थान: चोला चौकी
जनसेवा केंद्र पर सोनू चौधरी नाम का स्टूडेंट बैठा मिला। उसने बताया कि उसको अब तक प्रमाण पत्र नहीं मिला है। प्रमाण पत्र की एवज में वह 100 रुपये भी संचालक को अदा कर चुका है।

इसके बावजूद उससे रोजाना चक्कर लगवाए जा रहे हैं।  प्रमाण पत्र की उसको सख्त जरूरत है। जिस समय आवेदन कराया गया था उस समय संचालक ने दो चार दिन में प्रमाण पत्र देने का बात कही थी।        


समय-दोपहर: 1.30 बजे , स्थान बुगरासी लोकवाणी केंद्र
लोकवाणी केंद्र पर संचालक एक प्रमाण पत्र बनाने के 80 से 100 रुपये वसूलता है। ऐसा केंद्र पर प्रमाण पत्र बनवाने आए कई लोगों ने टीम को बताया। हालांकि यहां प्रमाण पत्रों की डिलीवरी एक सप्ताह के भीतर की जा रही थी। संचालक का कहना है कि सरकारी रेट बेहद कम है। इस रेट पर केंद्र का खर्च निकलना मुश्किल है।

जब अवैध वसूली की शिकायतें मिलती हैं तो कार्रवाई की जाती है। हाल फिलहाल में अवैध वसूली के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।
 पीयूश चौधरी
प्रबंधक ई गवर्नेस

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