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एनकाउंटर में ढेर गैंगस्टर के परिजनों को पांच लाख मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:49 AM IST
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जांच में सही पाए जाने के बावजूद प्रदेश सरकार से पुलिस एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर जतन सिरोही के परिवार को आठ साल बाद पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। ऐसा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती के चलते होगा। मुआवजे का चेक अभी जतिन के परिजनों को दिया जाना है।
मायावती सरकार के कार्यकाल में 29 मई 2008 को जतन सिरोही का पुलिस ने उस वक्त एनकाउंटर किया था, जब दिल्ली से पेशी के बाद लौटते वक्त उसके साथियों ने पुलिस पर हमलाकर उसे छुड़ा लिया था। जतन के एनकाउंटर के बाद उसके समर्थक और ग्रामीण भड़क उठे थे। पोस्टमार्टम हाउस में तोड़फोड़ कर ग्रामीण उसका शव उठा लाए और जाम लगा दिया था। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े थे।
जतन के परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया था। जतन की पत्नी रीना सिरोही ने इसे राजनीतिक षडयंत्र के तहत हत्या करार दिया था। जतन की पत्नी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शरण ली। आठ साल लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार राज्य सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद अखिलेश सरकार को जतन के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ रहा है। जतिन की पत्नी रीना और अन्य परिजन अब देहरादून में रहते हैं। एसएसपी के मुताबिक अभी उनके बारे में जानकारी नहीं मिली है। परिजनों का पता चलने पर उन्हें मुआवजा राशि दी जाएगी।
एनकाउंटर पर उठे सवाल
जतन के एनकाउंटर को पुलिस ने असली बताया था, लेकिन परिजन फर्जी करार दे रहे थे। मायावती सरकार में एनकाउंटर की तमाम जांचों में पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई है। तब जतन की पत्नी रीना सिरोही ने यह भी आरोप लगाया था कि यह एनकाउंटर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किया गया है।
इसलिए इन जांचों का कोई आधार नहीं है। जतन की पत्नी का आरोप था कि एनकाउंटर से पहले जतन की पीएसी सुरक्षा क्यों हटाई? जबकि जतन ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में जान का खतरा बताया था। अब राज्य सरकार द्वारा जतन की पत्नी को मुआवजा देने से एनकाउंटर पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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मायावती सरकार के कार्यकाल में 29 मई 2008 को जतन सिरोही का पुलिस ने उस वक्त एनकाउंटर किया था, जब दिल्ली से पेशी के बाद लौटते वक्त उसके साथियों ने पुलिस पर हमलाकर उसे छुड़ा लिया था। जतन के एनकाउंटर के बाद उसके समर्थक और ग्रामीण भड़क उठे थे। पोस्टमार्टम हाउस में तोड़फोड़ कर ग्रामीण उसका शव उठा लाए और जाम लगा दिया था। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े थे।
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जतन के परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया था। जतन की पत्नी रीना सिरोही ने इसे राजनीतिक षडयंत्र के तहत हत्या करार दिया था। जतन की पत्नी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शरण ली। आठ साल लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार राज्य सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद अखिलेश सरकार को जतन के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ रहा है। जतिन की पत्नी रीना और अन्य परिजन अब देहरादून में रहते हैं। एसएसपी के मुताबिक अभी उनके बारे में जानकारी नहीं मिली है। परिजनों का पता चलने पर उन्हें मुआवजा राशि दी जाएगी।
एनकाउंटर पर उठे सवाल
जतन के एनकाउंटर को पुलिस ने असली बताया था, लेकिन परिजन फर्जी करार दे रहे थे। मायावती सरकार में एनकाउंटर की तमाम जांचों में पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई है। तब जतन की पत्नी रीना सिरोही ने यह भी आरोप लगाया था कि यह एनकाउंटर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किया गया है।
इसलिए इन जांचों का कोई आधार नहीं है। जतन की पत्नी का आरोप था कि एनकाउंटर से पहले जतन की पीएसी सुरक्षा क्यों हटाई? जबकि जतन ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में जान का खतरा बताया था। अब राज्य सरकार द्वारा जतन की पत्नी को मुआवजा देने से एनकाउंटर पर सवाल खड़े हो गए हैं।