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हत्यारोपी बाप-बेटों को आजीवन कारावास
Updated Fri, 07 Jul 2017 01:35 AM IST
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हत्यारोपी बाप-बेटों को आजीवन कारावास
अनूपशहर अपर जिला सत्र न्यायाधीश अनूपशहर डीएन सिंह की कोर्ट ने जमीनी रंजिश में अपने बेटों के साथ मिलकर चाची की नृशंस हत्या करने के आरोप में दोषी माना है।
दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीजीसी जुगेंद्र सिंह सेजवार ने बताया कि डिबाई थाने के दानपुर गांव निवासी देवी सिंह ने अपने भतीजे लखमी व उसके दो बेटों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
देवी सिंह ने बताया कि उसके भाई छिद्दू सिंह ने अपनी जमीन की वसीयत लड़के हेतरात के नाम कर दी थी। जिसमें से आरोपी भतीजा लखमी हिस्सा मांगता था।
जमीन में हिस्सा न मिलने से क्षुब्ध लखमी ने 30 दिसंबर 2011 को नाती कृष्ण कुमार के साथ खेत से घर आ रही पत्नी चमेली देवी को रास्ते में बेटे लांगुरिया व योगेश के साथ घेर लिया और चमेली देवी पर ताबड़तोड फायर कर व छुरी और दांव से वारकर मौत के घाट उतार दिया।
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आरोपियों ने चमेली का सिर काटकर धड़ से अलग कर सिर को पेड़ से लटका दिया था। नाती के पैर में भी छर्रा लगने से वह चोटिल हो गया था।
बृहस्पतिवार को गवाह व सबूत तथा जिरह के बाद चमेलीदेवी की हत्या में तीनों को दोषी मानते हुए एडीजे डीएन सिंह की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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अनूपशहर अपर जिला सत्र न्यायाधीश अनूपशहर डीएन सिंह की कोर्ट ने जमीनी रंजिश में अपने बेटों के साथ मिलकर चाची की नृशंस हत्या करने के आरोप में दोषी माना है।
दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीजीसी जुगेंद्र सिंह सेजवार ने बताया कि डिबाई थाने के दानपुर गांव निवासी देवी सिंह ने अपने भतीजे लखमी व उसके दो बेटों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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देवी सिंह ने बताया कि उसके भाई छिद्दू सिंह ने अपनी जमीन की वसीयत लड़के हेतरात के नाम कर दी थी। जिसमें से आरोपी भतीजा लखमी हिस्सा मांगता था।
जमीन में हिस्सा न मिलने से क्षुब्ध लखमी ने 30 दिसंबर 2011 को नाती कृष्ण कुमार के साथ खेत से घर आ रही पत्नी चमेली देवी को रास्ते में बेटे लांगुरिया व योगेश के साथ घेर लिया और चमेली देवी पर ताबड़तोड फायर कर व छुरी और दांव से वारकर मौत के घाट उतार दिया।
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आरोपियों ने चमेली का सिर काटकर धड़ से अलग कर सिर को पेड़ से लटका दिया था। नाती के पैर में भी छर्रा लगने से वह चोटिल हो गया था।
बृहस्पतिवार को गवाह व सबूत तथा जिरह के बाद चमेलीदेवी की हत्या में तीनों को दोषी मानते हुए एडीजे डीएन सिंह की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।