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होम आइसोलेशन में जेनरिक दवाओं के दम पर जीत रहे कोरोना से जंग
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होम आइसोलेशन में जेनरिक दवाओं के दम पर जीत रहे कोरोना से जंग
बुलंदशहर। करीब 70 फीसदी संक्रमितों ने जेनरिक दवाओं के बूते ही होम आइसोलेशन में कोरोना से जंग जीत ली। जिले में 7080 लोग होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए। करीब दस हजार लोगों को स्वास्थ्य विभाग जेनरिक दवाओं की कोरोना किट बांट चुका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही यह मेडिकल किट संजीवनी बन रही है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कोरोना किट में शामिल जेनरिक दवाओं के साल्ट वाली ब्रांडेट दवाएं मेडिकल स्टोर से महंगे मेें खरीद रहे हैं।
जनपद में इस समय कुल 2981 लोगों का होम आइसोलेशन में उपचार चल रहा है। इसमें से बुधवार तक 2899 लोगों को कोरोना की दवाइयों की किट मिल चुकी है। इससे पूर्व 7080 लोग सरकारी अस्पताल मिली कोरोना किट की दवाइयों का सेवन कर ठीक हो चुके हैं। अब तक कुल 10060 लोगों को कोरोना की दवाइयों की किट बांटी जा चुकी है। किसी भी मरीज को कोविड संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला अस्पताल द्वारा मेडिकल किट बनाकर दी जाती है।
स्वस्थ्य विभाग की जेनरिक किट में हैं ये दवाएं:
1-पैरासिटामोल 500एमजी, दिन में तीन बार पांच दिन तक।
2-आइवरमेक्टिन 12एमजी, व्यस्क एक गोली रात में खाने के बाद, गर्भवती महिला, 12 साल से कम उम्र के बच्चे न लें, पांच दिन तक।
3-एजिथ्रोमाइसिन 500एमजी, दिन में एक बार, पांच दिन।
4-विटामिन सी 500 एमजी, व्यस्क गोली दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
5-जिंक, 50 एमजी, व्यस्क व्यक्ति, एक गोली दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
6-विटामिन बी कांप्लेक्स, एक टेबलेट या कैप्शूल दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
7-विटामिन डी थ्री, व्यस्क व्यक्ति दूध या पानी के साथ, तीन सप्ताह तक।
बाजार में 750 है कीमत
स्वास्थ्य विभाग की किट में जो सात दवाएं रखी गई हैं, इन सॉल्ट की तीन दिन की ब्रांडेड दवाओं की कीमत बाजार में करीब 750 रुपये है। ब्रांड बदलने के साथ इनकी कीमत इससे भी ज्यादा होती है।
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जेनरिक दवाओं ने ही बचाई जिंदगी
परिवार में एक साथ तीन सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद काफी परेशानी हुई थी, लेकिन समय पर दवाई लेने और कुछ परहेज से अभी सब ठीक हैं। सरकारी दवाई भी ब्रांडेड के बराबर ही असरदार हैं। - ओमप्रकाश गुप्ता
जेनरिक किट में पूरा भरोसा
29 अप्रैल को मैं कोरोना पॉजिटिव आई थी। सरकारी अस्पताल द्वारा द्वारा दी जा रहीं दवाइयों पर पूरा विश्वास रहा। उसे ही खाकर स्वस्थ हुई हूं। - वर्षा
किट की दवाओं से हुई स्वस्थ
घर में पिता जी और बहन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। पिता जी और बहन की अधिक चिंता हो रही थी। चिकित्सकों के बताए अनुसार दवाइयां ली गई। जिसके चलते सभी लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। - पंकज
जेनरिक और ब्रांडेट की गुणवत्ता समान
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाई में केवल इतना अंतर होता है कि जेनेरिक दवाई उसके सॉल्ट के नाम से जबकि ब्रांडेड दवाई कंपनी द्वारा कराए गए पेटेंट के नाम से बेची जाती है। इनके परिणाम में कोई अंतर नहीं आता है। जेनेरिक या सरकारी अस्पताल की दवाई काम नहीं करती है, लोगों की यह धारणा पूरी तरह से गलत है। होम आइसोेलेशन में प्रत्येक मरीज को मेडिकल किट दी जा रही है। - डा. भवतोष शंखधर, सीएमओ
दोनों के रिजल्ट में नहीं अंतर
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों को एक साथ ही और एक ही कंपनी द्वारा बनाया जाता है। अंतर तो केवल यही है कि जेनेरिक दवाइयों को उनके सॉल्ट के नाम के अनुसार सरकार द्वारा खरीदा जाता है, जबकि सीधे बाजार में जाने वाली दवाइयों को कंपनी पेटेंट कराए गए नाम से बेचती है। - डा. संजीव अग्रवाल, सचिव आईएमए
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बुलंदशहर। करीब 70 फीसदी संक्रमितों ने जेनरिक दवाओं के बूते ही होम आइसोलेशन में कोरोना से जंग जीत ली। जिले में 7080 लोग होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए। करीब दस हजार लोगों को स्वास्थ्य विभाग जेनरिक दवाओं की कोरोना किट बांट चुका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही यह मेडिकल किट संजीवनी बन रही है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कोरोना किट में शामिल जेनरिक दवाओं के साल्ट वाली ब्रांडेट दवाएं मेडिकल स्टोर से महंगे मेें खरीद रहे हैं।
जनपद में इस समय कुल 2981 लोगों का होम आइसोलेशन में उपचार चल रहा है। इसमें से बुधवार तक 2899 लोगों को कोरोना की दवाइयों की किट मिल चुकी है। इससे पूर्व 7080 लोग सरकारी अस्पताल मिली कोरोना किट की दवाइयों का सेवन कर ठीक हो चुके हैं। अब तक कुल 10060 लोगों को कोरोना की दवाइयों की किट बांटी जा चुकी है। किसी भी मरीज को कोविड संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला अस्पताल द्वारा मेडिकल किट बनाकर दी जाती है।
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स्वस्थ्य विभाग की जेनरिक किट में हैं ये दवाएं:
1-पैरासिटामोल 500एमजी, दिन में तीन बार पांच दिन तक।
2-आइवरमेक्टिन 12एमजी, व्यस्क एक गोली रात में खाने के बाद, गर्भवती महिला, 12 साल से कम उम्र के बच्चे न लें, पांच दिन तक।
3-एजिथ्रोमाइसिन 500एमजी, दिन में एक बार, पांच दिन।
4-विटामिन सी 500 एमजी, व्यस्क गोली दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
5-जिंक, 50 एमजी, व्यस्क व्यक्ति, एक गोली दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
6-विटामिन बी कांप्लेक्स, एक टेबलेट या कैप्शूल दिन में एक बार, एक सप्ताह तक।
7-विटामिन डी थ्री, व्यस्क व्यक्ति दूध या पानी के साथ, तीन सप्ताह तक।
बाजार में 750 है कीमत
स्वास्थ्य विभाग की किट में जो सात दवाएं रखी गई हैं, इन सॉल्ट की तीन दिन की ब्रांडेड दवाओं की कीमत बाजार में करीब 750 रुपये है। ब्रांड बदलने के साथ इनकी कीमत इससे भी ज्यादा होती है।
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जेनरिक दवाओं ने ही बचाई जिंदगी
परिवार में एक साथ तीन सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद काफी परेशानी हुई थी, लेकिन समय पर दवाई लेने और कुछ परहेज से अभी सब ठीक हैं। सरकारी दवाई भी ब्रांडेड के बराबर ही असरदार हैं। - ओमप्रकाश गुप्ता
जेनरिक किट में पूरा भरोसा
29 अप्रैल को मैं कोरोना पॉजिटिव आई थी। सरकारी अस्पताल द्वारा द्वारा दी जा रहीं दवाइयों पर पूरा विश्वास रहा। उसे ही खाकर स्वस्थ हुई हूं। - वर्षा
किट की दवाओं से हुई स्वस्थ
घर में पिता जी और बहन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। पिता जी और बहन की अधिक चिंता हो रही थी। चिकित्सकों के बताए अनुसार दवाइयां ली गई। जिसके चलते सभी लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। - पंकज
जेनरिक और ब्रांडेट की गुणवत्ता समान
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाई में केवल इतना अंतर होता है कि जेनेरिक दवाई उसके सॉल्ट के नाम से जबकि ब्रांडेड दवाई कंपनी द्वारा कराए गए पेटेंट के नाम से बेची जाती है। इनके परिणाम में कोई अंतर नहीं आता है। जेनेरिक या सरकारी अस्पताल की दवाई काम नहीं करती है, लोगों की यह धारणा पूरी तरह से गलत है। होम आइसोेलेशन में प्रत्येक मरीज को मेडिकल किट दी जा रही है। - डा. भवतोष शंखधर, सीएमओ
दोनों के रिजल्ट में नहीं अंतर
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों को एक साथ ही और एक ही कंपनी द्वारा बनाया जाता है। अंतर तो केवल यही है कि जेनेरिक दवाइयों को उनके सॉल्ट के नाम के अनुसार सरकार द्वारा खरीदा जाता है, जबकि सीधे बाजार में जाने वाली दवाइयों को कंपनी पेटेंट कराए गए नाम से बेचती है। - डा. संजीव अग्रवाल, सचिव आईएमए