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Bulandshahar News: 22 दिसंबर को बंद रहेंगे कोचिंग सेंटर व पुस्तकालय
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कोटद्वार। ऑल उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर ट्रक ऑपरेटर्स का सात सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन आंदोलन जारी रहा। ट्रक मालिक व परिचालक संघ ने शुक्रवार को आवश्यक सेवा के वाहनों को छोड़कर अन्य भारी वाहनों का संचालन सिद्धबली बैरियर व पुलिंडा मार्ग बैरियर पर रुकवाया। इस मौके पर प्रदेश सरकार से संगठन के मांगों का निराकरण करने की मांग की गई।
शुक्रवार को संघ के पदाधिकारी, चालक परिचालक व मालिक बदरीनाथ मार्ग पर सिद्धबली व पुलिंडा मार्ग स्थित बैरियर के पास एकत्र हुए। यहां उन्होंने ओवरलोडेड वाहनों की आवाजाही को रुकवा दिया। पूरे दिनभर पदाधिकारी ओवरलोड ट्रकों को रुकवाते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान होने तक वाहन मालिक संघ का प्रदर्शन जारी रहेगा।
समस्याओं का जल्द समाधान न होने पर संघ अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रदेश में भारी वाहनों के ओवरलोड को प्रतिबंधित करने, प्रदेश में अंडरलोड को नियमानुसार लागू करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी 25 प्रतिशत जीवीडब्ल्यू को लागू करने, भारी वाहनों की चेकिंग पुलिस से हटाकर परिवहन विभाग को सौंपने, खनिज पदार्थों की ढुलाई का रवन्ना व रॉयल्टी जीवीडब्ल्यू की क्षमता से निर्गत करने, वाहनों के भार को मापने के लिए सिद्धबली बैरियर पर धर्मकांटा की व्यवस्था करने, पर्वतीय क्षेत्राें के मालवाहक वाहनों के लिए संबंधित संभागीय परिवहन अधिकारी की अनुमति को अनिवार्य करने की मांग शामिल है। इस मौके पर यूनियन के सचिव राजकुमार जोशी, कोषाध्यक्ष सुशील रावत, उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह बिष्ट, दीपक सिंह, पूरन सिंह, राजेंद्र सिंह और देवेंद्र रावत आदि शामिल रहे।
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शुक्रवार को संघ के पदाधिकारी, चालक परिचालक व मालिक बदरीनाथ मार्ग पर सिद्धबली व पुलिंडा मार्ग स्थित बैरियर के पास एकत्र हुए। यहां उन्होंने ओवरलोडेड वाहनों की आवाजाही को रुकवा दिया। पूरे दिनभर पदाधिकारी ओवरलोड ट्रकों को रुकवाते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान होने तक वाहन मालिक संघ का प्रदर्शन जारी रहेगा।
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समस्याओं का जल्द समाधान न होने पर संघ अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रदेश में भारी वाहनों के ओवरलोड को प्रतिबंधित करने, प्रदेश में अंडरलोड को नियमानुसार लागू करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी 25 प्रतिशत जीवीडब्ल्यू को लागू करने, भारी वाहनों की चेकिंग पुलिस से हटाकर परिवहन विभाग को सौंपने, खनिज पदार्थों की ढुलाई का रवन्ना व रॉयल्टी जीवीडब्ल्यू की क्षमता से निर्गत करने, वाहनों के भार को मापने के लिए सिद्धबली बैरियर पर धर्मकांटा की व्यवस्था करने, पर्वतीय क्षेत्राें के मालवाहक वाहनों के लिए संबंधित संभागीय परिवहन अधिकारी की अनुमति को अनिवार्य करने की मांग शामिल है। इस मौके पर यूनियन के सचिव राजकुमार जोशी, कोषाध्यक्ष सुशील रावत, उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह बिष्ट, दीपक सिंह, पूरन सिंह, राजेंद्र सिंह और देवेंद्र रावत आदि शामिल रहे।
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