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2009 में बना बर्न वार्ड, 12 साल में भी नहीं मिला स्टॉफ
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2009 में बना बर्न वार्ड, 12 साल में भी नहीं मिला स्टॉफ
बुलंदशहर। जिला अस्पताल स्थित बर्न यूनिट को निर्माण के 12 साल बाद भी स्टॉफ और उपकरण नहीं मिल सके हैं। 40 से 50 फीसदी झुलसे मरीजों को दिल्ली या मेरठ हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। वर्ष 2009 में बर्न यूनिट का निर्माण हुआ। तब से स्टॉफ तैनाती और उपकरण के लिए शासन को करीब 10 पत्र लिखा जा चुका है। ऐसे में कोई बड़ी घटना होने पर लोगों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा।
जिला अस्पताल परिसर में मोर्चरी के पास 12 वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से आवास विकास योजना के तहत बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण से लोगों में आस जगी थी कि उन्हें अब बेहतर इलाज जिले में ही मिल सकेगा लेकिन अभी तक न तो प्रशिक्षित स्टाफ मिल सका और न ही सर्जन, ईएमओ की तैनाती हो सकी। यूनिट में ताला लगा हुआ है। ऐसे में भवन इस्तेमाल में न होने, रखरखाव के लिए कोई प्रबंध नहीं है। इससे लाखों रुपये की लागत से तैयार हुआ भवन धूल फांक रहा है।
मामूली झुलसे लोगों को ही मिल पाता है इलाज
जिला अस्पताल में 10 बेड का बर्न वार्ड बनाया गया है। यहां केवल 50 फीसदी से कम झुलसे मरीजों को ही समय-समय पर भर्ती किया जाता है। इससे अधिक झुलसे या चेस्ट पर झुलसे मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सही तरीके से इलाज न मिलने के कारण कम झुलसे मरीजों का भी जख्म बढ़ जाता है। न तो स्टाफ समय पर मलहम दे पाता है और न देखरेख कर पाता है।
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सीएचसी से ही रेफर कर दिए गए थे मरीज
पिछले तीन वर्ष में सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में बॉयरल फटने से आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर झुलसने पर हायर सेंटर रेफर किया गया तो डिबाई में हुए हादसे में जिला अस्पताल लाने की जगह अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। अब यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसे समय से उपचार मिलना मुश्किल होगा।
सर्जन और प्रशिक्षित स्टाफ न मिलने पर बर्न यूनिट का संचालन नहीं हो सका है। कई बार शासन को पत्र लिखा गया है, वहां से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल
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बुलंदशहर। जिला अस्पताल स्थित बर्न यूनिट को निर्माण के 12 साल बाद भी स्टॉफ और उपकरण नहीं मिल सके हैं। 40 से 50 फीसदी झुलसे मरीजों को दिल्ली या मेरठ हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। वर्ष 2009 में बर्न यूनिट का निर्माण हुआ। तब से स्टॉफ तैनाती और उपकरण के लिए शासन को करीब 10 पत्र लिखा जा चुका है। ऐसे में कोई बड़ी घटना होने पर लोगों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा।
जिला अस्पताल परिसर में मोर्चरी के पास 12 वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से आवास विकास योजना के तहत बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण से लोगों में आस जगी थी कि उन्हें अब बेहतर इलाज जिले में ही मिल सकेगा लेकिन अभी तक न तो प्रशिक्षित स्टाफ मिल सका और न ही सर्जन, ईएमओ की तैनाती हो सकी। यूनिट में ताला लगा हुआ है। ऐसे में भवन इस्तेमाल में न होने, रखरखाव के लिए कोई प्रबंध नहीं है। इससे लाखों रुपये की लागत से तैयार हुआ भवन धूल फांक रहा है।
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मामूली झुलसे लोगों को ही मिल पाता है इलाज
जिला अस्पताल में 10 बेड का बर्न वार्ड बनाया गया है। यहां केवल 50 फीसदी से कम झुलसे मरीजों को ही समय-समय पर भर्ती किया जाता है। इससे अधिक झुलसे या चेस्ट पर झुलसे मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सही तरीके से इलाज न मिलने के कारण कम झुलसे मरीजों का भी जख्म बढ़ जाता है। न तो स्टाफ समय पर मलहम दे पाता है और न देखरेख कर पाता है।
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सीएचसी से ही रेफर कर दिए गए थे मरीज
पिछले तीन वर्ष में सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में बॉयरल फटने से आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर झुलसने पर हायर सेंटर रेफर किया गया तो डिबाई में हुए हादसे में जिला अस्पताल लाने की जगह अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। अब यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसे समय से उपचार मिलना मुश्किल होगा।
सर्जन और प्रशिक्षित स्टाफ न मिलने पर बर्न यूनिट का संचालन नहीं हो सका है। कई बार शासन को पत्र लिखा गया है, वहां से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल