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बुलंदशहर में बुखार से चार की और मौत, मरीजों से फुल हुए अस्पताल
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बुलंदशहर में बुखार से चार की और मौत, मरीजों से फुल हुए अस्पताल
बुलंदशहर। बुखार का प्रकोप थमता हुआ नहीं दिख रहा है। जिले में चार और लोगों ने बुखार से दम तोड़ दिया। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। शुक्रवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी/मेडिकल वार्ड में अधिकांश बेड भरे नजर आए। वहीं, अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में 1180 मरीज पहुंचे।
जिला अस्पताल में 177 बेड की क्षमता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेत जटिया चिकित्सालय खुर्जा व संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद में चिकित्सक और सुविधा न मिलने पर मौसमी बीमारी समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज उपचार की आस में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों वायरल बुखार के साथ डेंगू संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ी है। मेडिकल वार्ड में 27, इमरजेंसी वार्ड में 17 व इमरजेंसी के सर्जिकल वार्ड में 36 बेड की क्षमता है। शुक्रवार को तीनों वार्ड में सभी बेड पर मरीज भर्ती मिले। इसके अलावा डेंगू संदिग्ध मरीजों के लिए आरक्षित किए गए आइसोलेशन वार्ड, डेंगू वार्ड और बच्चा वार्ड में 30 बेड पर 26 मरीज भर्ती हैं।
ओपीडी में मरीजों की भीड़
वायरल बुखार के साथ अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को भी जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार ने बताया कि गर्मी के बाद बारिश होने से संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। सीएमएस डॉ. राजीव प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार को ओपीडी में 1180 मरीजों का पंजीकरण करने के बाद उपचार किया गया। साथ ही गंभीर हालत में 16 मरीज वार्ड में भर्ती किए गए। अस्पताल में 177 बेड की क्षमता है। करीब 80 फीसदी बेड फुल हो चुके हैं।
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अहार, अहमदगढ़, अनूपशहर और पहासू में एक-एक ने दम तोड़ा
अहार क्षेत्र निवासी किशनलाल का 50 वर्षीय पुत्र महेंद्र सिंह पिछले चार दिन से बुखार से पीड़ित थे। पहले झोलाछाप से इलाज कराया, सुधार नहीं हुआ तो परिजनों ने बृहस्पतिवार को बुलंदशहर के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। जहां से चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताते हुए नोएडा के लिए रेफर कर दिया। जहां उपचार के दौरान महेंद्र ने दम तोड़ दिया। उधर, अहमदगढ़ क्षेत्र के गांव खुदादिया में 22 वर्षीय पिंटू मीणा पुत्र सरमन सिंह पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित था। बृहस्पतिवार को दिल्ली में उपचार के दौरान पिंटू ने दम तोड़ दिया। अनूपशहर क्षेत्र के गांव फतहपुर में भी शुक्रवार को भी पूरन वाल्मीकि (65) की बुखार से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार पूरन तीन दिन से बुखार से पीड़ित थे। उनका गांव में ही उपचार चल रहा था। प्रधान प्रमोद मीणा ने बताया कि गांव में बुखार की चपेट में कई ग्रामीण हैं। पहासू क्षेत्र के गांव नगला हरी सिंह में बुखार से 35 वर्षीय युवक सोनू की मृत्यु हो गई। सोनू पिछले तीन दिनों से बुखार से पीड़ित था। हालात खराब होने पर परिजन उसे गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। पहासू सीएचसी प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि गांव में टीम भेजकर स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा। इसके अलावा गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे है।
पीएचसी पर चिकित्सक नदारद, यूनानी पर लटका ताला
खानपुर। क्षेत्र में यूनानी अस्पताल जहां महीनों से बंद है वहीं, नगर क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार सुबह 11 बजे तक भी चिकित्सक नहीं पहुंचे। उपचार कराने आने वाले मरीज बैरंग लौटते रहे। ऊंचागांव सीएचसी प्रभारी डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि पीएचसी पर तैनात चिकित्सक की पोस्टमार्टम में ड्यूटी होने के कारण मरीजों को परेशानियां हुई होगी। संवाद
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बुलंदशहर। बुखार का प्रकोप थमता हुआ नहीं दिख रहा है। जिले में चार और लोगों ने बुखार से दम तोड़ दिया। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। शुक्रवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी/मेडिकल वार्ड में अधिकांश बेड भरे नजर आए। वहीं, अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में 1180 मरीज पहुंचे।
जिला अस्पताल में 177 बेड की क्षमता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेत जटिया चिकित्सालय खुर्जा व संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद में चिकित्सक और सुविधा न मिलने पर मौसमी बीमारी समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज उपचार की आस में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों वायरल बुखार के साथ डेंगू संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ी है। मेडिकल वार्ड में 27, इमरजेंसी वार्ड में 17 व इमरजेंसी के सर्जिकल वार्ड में 36 बेड की क्षमता है। शुक्रवार को तीनों वार्ड में सभी बेड पर मरीज भर्ती मिले। इसके अलावा डेंगू संदिग्ध मरीजों के लिए आरक्षित किए गए आइसोलेशन वार्ड, डेंगू वार्ड और बच्चा वार्ड में 30 बेड पर 26 मरीज भर्ती हैं।
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ओपीडी में मरीजों की भीड़
वायरल बुखार के साथ अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को भी जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार ने बताया कि गर्मी के बाद बारिश होने से संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। सीएमएस डॉ. राजीव प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार को ओपीडी में 1180 मरीजों का पंजीकरण करने के बाद उपचार किया गया। साथ ही गंभीर हालत में 16 मरीज वार्ड में भर्ती किए गए। अस्पताल में 177 बेड की क्षमता है। करीब 80 फीसदी बेड फुल हो चुके हैं।
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अहार, अहमदगढ़, अनूपशहर और पहासू में एक-एक ने दम तोड़ा
अहार क्षेत्र निवासी किशनलाल का 50 वर्षीय पुत्र महेंद्र सिंह पिछले चार दिन से बुखार से पीड़ित थे। पहले झोलाछाप से इलाज कराया, सुधार नहीं हुआ तो परिजनों ने बृहस्पतिवार को बुलंदशहर के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। जहां से चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताते हुए नोएडा के लिए रेफर कर दिया। जहां उपचार के दौरान महेंद्र ने दम तोड़ दिया। उधर, अहमदगढ़ क्षेत्र के गांव खुदादिया में 22 वर्षीय पिंटू मीणा पुत्र सरमन सिंह पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित था। बृहस्पतिवार को दिल्ली में उपचार के दौरान पिंटू ने दम तोड़ दिया। अनूपशहर क्षेत्र के गांव फतहपुर में भी शुक्रवार को भी पूरन वाल्मीकि (65) की बुखार से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार पूरन तीन दिन से बुखार से पीड़ित थे। उनका गांव में ही उपचार चल रहा था। प्रधान प्रमोद मीणा ने बताया कि गांव में बुखार की चपेट में कई ग्रामीण हैं। पहासू क्षेत्र के गांव नगला हरी सिंह में बुखार से 35 वर्षीय युवक सोनू की मृत्यु हो गई। सोनू पिछले तीन दिनों से बुखार से पीड़ित था। हालात खराब होने पर परिजन उसे गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। पहासू सीएचसी प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि गांव में टीम भेजकर स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा। इसके अलावा गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे है।
पीएचसी पर चिकित्सक नदारद, यूनानी पर लटका ताला
खानपुर। क्षेत्र में यूनानी अस्पताल जहां महीनों से बंद है वहीं, नगर क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार सुबह 11 बजे तक भी चिकित्सक नहीं पहुंचे। उपचार कराने आने वाले मरीज बैरंग लौटते रहे। ऊंचागांव सीएचसी प्रभारी डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि पीएचसी पर तैनात चिकित्सक की पोस्टमार्टम में ड्यूटी होने के कारण मरीजों को परेशानियां हुई होगी। संवाद