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UP: 'मैं चीखती रही, गिड़गिड़ाती रही लेकिन उनकी हैवानियत के आगे...'; बुलंदशहर दरिंदगी और हत्याकांड में नया मोड़

Mon, 05 Jan 2026 03:08 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 05 Jan 2026 03:08 PM IST
सार

बुलंदशहर के सिकंदराबाद में मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड में पीड़ित पिता के आंसू सूख गए हैं। सिसकियां नहीं थम रहीं हैं। गांव के लोग परिवार के साथ खड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बेटी को न्याय दिलाने के लिए अंत तक लड़ेंगे।

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Bulandshahr Crime Minor Girl Harassment and murder accused threw my daughter from third floor front of my eyes
बुलंदशहर दरिंदगी और हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बुलंदशहर के सिकंदराबाद में नारखी के एक गांव की छह साल की मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना को परिजन और ग्रामीण भूला नहीं पा रहे हैं। शनिवार रात भर पीड़ित परिवार सोया नहीं। पिछले 24 घंटे से बच्ची की मां और पिता ने एक निवाला तक नहीं खाया है।
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रविवार सुबह तक पीड़ित पिता के आंसू सूख चुके थे, पर सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं। उन्होंने भारी मन से कहा, अब कभी बुलंदशहर नहीं जाऊंगा। अब गांव में ही मजदूरी करूंगा, यहां कम से कम अपनों का साया तो है। 
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गांव के एक छोटे से घर के आंगन में बैठी मां की हालत भी खराब थी। वह रात भर सोई नहीं थी। पड़ोसियों ने बताया कि मां ने शुक्रवार से अन्न का दाना तक नहीं चखा है। वह बस एक ही बात रट रही है, मेरी बच्ची तो खेलने गई थी, उसे क्या पता था कि ऊपर मौत खड़ी है।
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साहब! मेरी आंखों के सामने हो फांसी, तभी कलेजे को मिलेगी ठंडक
मूल रूप से फिरोजाबाद जिले के रहने वाले पीड़ित परिवार के आंसू थम नहीं रहे हैं। बेटी की मौत के बाद मां बेहाल है। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रही हैं। साहब, उन्होंने मेरी बच्ची पर रहम नहीं किया, उन्हें भी रहम न मिले। जैसे उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरी फूल-सी बच्ची को नीचे फेंका, वैसे ही उन्हें मेरी आंखों के सामने फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। तभी मेरे कलेजे को ठंडक मिलेगी। पिता की हालत भी दयनीय है। वह कहते हैं कि जिस शहर ने उनकी बेटी को निगल लिया, वहां अब कभी नहीं जाएंगे।

20 मिनट तक पीटती रहीं दरवाजा
तीसरी मंजिल पर सन्नाटा पसरा था। वहां मां की नजर एक बंद कमरे पर पड़ी। पड़ोस की एक महिला ने बताया कि कुछ देर पहले बच्ची उसी कमरे के बाहर खेल रही थी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन जवाब नहीं मिला। वह लगातार 20 मिनट तक दरवाजे को पीटती रहीं। 

 

भीतर सन्नाटा था, लेकिन दिल कह रहा था कि बेटी इसी खामोशी के पीछे कहीं कैद है। जब पड़ोस के एक युवक की मदद से दरवाजा खुलवाया तो अंदर का नजारा देख सन्न रह गईं। दो युवक बिस्तर पर ऐसे लेटे थे, मानो गहरी नींद में हों। जैसे ही उन्होंने कमरे में घुसकर तलाशी लेनी शुरू की तो आरोपी हड़बड़ी में उठकर खड़े हो गए। उनको रसोई की तरफ जाने से रोकने लगे। तभी आरोपियों के बिस्तर में बेटी की एक चप्पल नजर आई। 

 

इससे यकीन हो गया कि बेटी उन्हीं के पास है। वह उसे कमरे में ढूंढने लगीं। आरोपी उनको रोक रहे थे। धक्का दे रहे थे। जैसे ही वह किचन की तरफ बढ़ीं, एक दरिंदे ने वहां बेसुध पड़ी मासूम को अपनी गोद में उठा लिया। उसे पकड़ने की कोशिश की तो दूसरे ने जोर से धक्का देकर गिरा दिया। 

 

वह संभलती, इससे पहले ही हैवान ने मासूम को तीसरी मंजिल से नीचे खेत में फेंक दिया। मैं चीखती रही, गिड़गिड़ाती रही लेकिन उनकी हैवानियत के आगे बेबस रह गई। दरिंदों ने मेरी आंखों के सामने मेरी मासूम बच्ची को तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया। आसपास के लोग जब तक खेत में पहुंचे, तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी।

 

पिता बोले- जब तक दरिंदों को फांसी नहीं होगी, चैन से नहीं बैठूंगा
पीड़ित पिता ने कहा कि वह दरिंदों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए आखिरी सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। बताया कि हर रोज सुबह 8 बजे काम के लिए फैक्टरी निकल जाते थे। 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 8 बजे घर लौटते थे। घर लौटने के बाद का समय केवल अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बिताते थे। पिता ने रुंधे गले से बताया, मैं तो सिर्फ अपने काम से काम रखता था। उन दरिंदों का चेहरा तक मैंने कभी गौर से नहीं देखा था।
 

हम नशे में थे...
पकड़े जाने के बाद भी आरोपियों के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। दोनों बार-बार कहते रहे कि वे नशे में थे और सो रहे थे, इसलिए गेट नहीं खोला। हालांकि, जब पुलिस शनिवार शाम उन्हें न्यायिक हिरासत में ले जाने लगी तो दोनों की पोल खुल गई। वे एक-दूसरे पर बच्ची के साथ गलत काम करने और उसे नीचे फेंकने का आरोप लगाने लगे।

ग्रामीणों में गुस्सा, बोले-इज्जत पर हाथ डाला है
बच्ची के गांव में शनिवार को चूल्हे नहीं जले। हर घर में मातम है और हर चेहरे पर आक्रोश। रविवार को भी यही आलम रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की इज्जत का सवाल है। गांव वालों की मांग है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। गांव का हर व्यक्ति पीड़ित पिता के साथ खड़ा है ताकि उसे कानूनी लड़ाई में अकेलापन महसूस न हो। लोगों का कहना है कि दरिंदों ने मासूमियत का गला घोंटा है, उन्हें चौराहे पर फांसी होनी चाहिए।

कोर्ट में पैरवी की तैयारी
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही आरोपियों बलरामपुर जिले के भगवानपुर स्थित रेहरा बाजार निवासी राजू और लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ निवासी वीरू कश्यप के खिलाफ जांच पूरी कर सख्त से सख्त चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों को ऐसी सजा दिलाई जाएगी, जो नजीर बनेगी।
 

ऐसी सजा दिलाई जाएगी, जो नजीर बनेगी : एसएसपी
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही आरोपियों बलरामपुर जिले के भगवानपुर स्थित रेहरा बाजार निवासी राजू और लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ निवासी वीरू कश्यप के खिलाफ जांच पूरी कर सख्त से सख्त चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों को ऐसी सजा दिलाई जाएगी, जो नजीर बनेगी।-एसएसपी दिनेश सिंह।
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