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‘राष्ट्रपति पुरस्कार मामले की जांच नहीं करवा सकते’
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:41 PM IST
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शिक्षक हुकम सिंह को मिले राष्ट्रपति पुरस्कार के मामले की जांच करवाने में कार्यवाहक बीएसए ने खुद को असमर्थ बताया है। जेडी मेरठ मंडल द्वारा पुरस्कार संबंधी जांच के आदेश को कार्यवाहक बीएसए ने वापस भेज दिया है।
उन्होंने किसी उच्च अधिकारी से मामले की जांच करवाने की अपील की है। बता दें कि शिक्षक हुकम सिंह का राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन हुआ था।
उन्हें इस पुरस्कार के लिए अपात्र बताते हुए राज्यपाल से मामले की शिकायत की गई थी। राज्यपाल ने मामले में जांच के आदेश दिए थे। इसी बीच शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षक हुकम सिंह ने पुरस्कार प्राप्त कर लिया।
मामले में बेसिक विभाग के अफसरों और अधीनस्थों की भूमिका संदिग्ध थी। शिक्षक हुकम सिंह द्वारा फर्जी तरीके से पुरस्कार प्राप्त करने पर इसकी शिकायत राष्ट्रपति भवन भेजी गई थी।
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इस शिकायत पर शासन ने जांच के आदेश जारी किए थे और इसका जिम्मा माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को सौंपा गया था। इसी के तहत जेडी मेरठ ने पुरस्कार संबंधी जांच के आदेश बीएसए कार्यालय में भेजे।
लेकिन कार्यवाहक बीएसए ने जांच के आदेश यह कहकर वापस कर दिए कि वह इसके लिए समक्ष नहीं हैं। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति पुरस्कार समिति में जो अधिकारी शामिल हैं, वह उनके ओहदे से बड़े हैं।
ऐसे में वह जांच नहीं करवा सकते। इसकी जांच किसी बड़े अधिकारी से करवाई जाए।
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उन्होंने किसी उच्च अधिकारी से मामले की जांच करवाने की अपील की है। बता दें कि शिक्षक हुकम सिंह का राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन हुआ था।
उन्हें इस पुरस्कार के लिए अपात्र बताते हुए राज्यपाल से मामले की शिकायत की गई थी। राज्यपाल ने मामले में जांच के आदेश दिए थे। इसी बीच शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षक हुकम सिंह ने पुरस्कार प्राप्त कर लिया।
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मामले में बेसिक विभाग के अफसरों और अधीनस्थों की भूमिका संदिग्ध थी। शिक्षक हुकम सिंह द्वारा फर्जी तरीके से पुरस्कार प्राप्त करने पर इसकी शिकायत राष्ट्रपति भवन भेजी गई थी।
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इस शिकायत पर शासन ने जांच के आदेश जारी किए थे और इसका जिम्मा माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को सौंपा गया था। इसी के तहत जेडी मेरठ ने पुरस्कार संबंधी जांच के आदेश बीएसए कार्यालय में भेजे।
लेकिन कार्यवाहक बीएसए ने जांच के आदेश यह कहकर वापस कर दिए कि वह इसके लिए समक्ष नहीं हैं। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति पुरस्कार समिति में जो अधिकारी शामिल हैं, वह उनके ओहदे से बड़े हैं।
ऐसे में वह जांच नहीं करवा सकते। इसकी जांच किसी बड़े अधिकारी से करवाई जाए।