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Bulandshahar News: अवंतिका देवी घाट का दो करोड़ रुपये से होगा विकास
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बुलंदशहर। अहार क्षेत्र में गंगा किनारे अवंतिका देवी घाट का दो करोड़ रुपये से विकास होगा। यहां पर पर्यटन विकास कराने के लिए शासन ने राशि जारी की है। पहली किस्त के तौर पर काम शुरू कराने के लिए एक करोड़ की राशि जारी कर दी गई है।
अहार में गंगा किनारे अवंतिका देवी का मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास महाभारतकाल से जुड़ा है। यह मंदिर आज भी अवंतिका देवी मंदिर आज भी श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का साक्षी है। यहां आज भी सैकड़ों वर्ष पुराने खिन्नी, कदम, इंद्र जौ के वृक्ष हैं, जिनकी मेवा और फूलों से ही श्रीकृष्ण की बरात का स्वागत किया गया था। इतना ही नहीं क्षेत्र के कई गांवों के नाम भी श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह की रस्मों पर है। जनश्रुति के अनुसार अहार क्षेत्र कभी महाराज भीष्मक की राजधानी कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। राजा भीष्म के सात पुत्र और एक पुत्री रुक्मिणी थीं। रुक्मिणी और राजा भीष्मक चाहते थे कि उनका विवाह श्रीकृष्ण के साथ हो, लेकिन रुक्मिणी के भाई और राजा भीष्मक के उत्तराधिकारी रुकम नहीं चाहते थे कि श्रीकृष्ण के साथ विवाह हो।
इसका पता जब श्रीकृष्ण को चला तो उन्होंने रुक्मिणी का क्षेत्र के प्राचीन मां अवंतिका देवी मंदिर से हरण कर लिया था तो रुकम ने उनका रास्ता रोक लिया। इस दौरान श्रीकृष्ण के भाई बलराम और रुकम के बीच भीषण युद्ध हुआ। बताया जाता है कि बलराम जी ने महाराजा भीष्मक की राजधानी कुंदनपुर को पलट दिया था। आज भी अहार क्षेत्र में मिट्टी खुदने पर मकानों की दीवार निकलती हैं। पिछले काफी समय से गंगा किनारे खासकर अवंतिका देवी मंदिर व घाट को पर्यटन स्थल या फिर कॉरिडोर बनाने की मांग चली आ रही है। इसी कड़ी में अब शासन ने अवंतिका देवी घाट का विकास कराने के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। सीडीओ कुलदीप मीना ने बताया कि अवंतिका देवी घाट का विकास शासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देश पर ही होगा। इस संबंध में जल्द ही शासन से आगामी निर्देश मिलने की संभावना है।
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अहार में गंगा किनारे अवंतिका देवी का मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास महाभारतकाल से जुड़ा है। यह मंदिर आज भी अवंतिका देवी मंदिर आज भी श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का साक्षी है। यहां आज भी सैकड़ों वर्ष पुराने खिन्नी, कदम, इंद्र जौ के वृक्ष हैं, जिनकी मेवा और फूलों से ही श्रीकृष्ण की बरात का स्वागत किया गया था। इतना ही नहीं क्षेत्र के कई गांवों के नाम भी श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह की रस्मों पर है। जनश्रुति के अनुसार अहार क्षेत्र कभी महाराज भीष्मक की राजधानी कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। राजा भीष्म के सात पुत्र और एक पुत्री रुक्मिणी थीं। रुक्मिणी और राजा भीष्मक चाहते थे कि उनका विवाह श्रीकृष्ण के साथ हो, लेकिन रुक्मिणी के भाई और राजा भीष्मक के उत्तराधिकारी रुकम नहीं चाहते थे कि श्रीकृष्ण के साथ विवाह हो।
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इसका पता जब श्रीकृष्ण को चला तो उन्होंने रुक्मिणी का क्षेत्र के प्राचीन मां अवंतिका देवी मंदिर से हरण कर लिया था तो रुकम ने उनका रास्ता रोक लिया। इस दौरान श्रीकृष्ण के भाई बलराम और रुकम के बीच भीषण युद्ध हुआ। बताया जाता है कि बलराम जी ने महाराजा भीष्मक की राजधानी कुंदनपुर को पलट दिया था। आज भी अहार क्षेत्र में मिट्टी खुदने पर मकानों की दीवार निकलती हैं। पिछले काफी समय से गंगा किनारे खासकर अवंतिका देवी मंदिर व घाट को पर्यटन स्थल या फिर कॉरिडोर बनाने की मांग चली आ रही है। इसी कड़ी में अब शासन ने अवंतिका देवी घाट का विकास कराने के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। सीडीओ कुलदीप मीना ने बताया कि अवंतिका देवी घाट का विकास शासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देश पर ही होगा। इस संबंध में जल्द ही शासन से आगामी निर्देश मिलने की संभावना है।
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