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Bulandshahar News: वीआईपी मार्ग पर रेंग रहे वाहन, जाम में 30 मिनट फंसी रही एम्बुलेंस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 10:54 PM IST
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ambulance stuck in traffic jam for 30 minutes
कलक्ट्रेट से शनिदेव मंदिर पर लगे जाम में फंसी एंबुलेंस। संवाद
बुलंदशहर। नगर का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मार्ग, जहां से पूरे जिले की गतिविधियां संचालित होती हैं, वह भी बदहाल है। शनिवार को कचहरी मार्ग और कालाआम चौराहे के बीच लगे भीषण जाम ने लोगों को बेहाल कर दिया। जाम में फंसी एक एम्बुलेंस करीब 30 मिनट तक सायरन बजाती रही लेकिन रास्ता नहीं मिल सका।
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इसी मार्ग पर जिला न्यायालय, एसएसपी कार्यालय और डीएम कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण दफ्तर स्थित हैं। बावजूद इसके, यहां की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है। शनिवार सुबह से ही वाहनों का दबाव इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते काला आम चौराहा और कचहरी मार्ग वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दोपहिया वाहन हो या चार पहिया, हर कोई इंच-दर-इंच आगे बढ़ने को मजबूर था।
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जाम का आलम यह था कि केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि जिले के आला अधिकारियों के काफिले भी इस भीड़ का हिस्सा बने नजर आए। अक्सर सख्त निर्देश देने वाले अधिकारियों की गाड़ियां भी उसी जाम में घंटों खड़ी रहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात तो रहते हैं, लेकिन बेतरतीब पार्किंग और ई-रिक्शा की मनमानी के आगे वे मूकदर्शक बने रहते हैं।
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कचहरी जाने वाले अधिवक्ता और वादकारी इस समस्या से हर दिन दो-चार होते हैं। लोगों का कहना है कि जब तक इस मार्ग को नो-पार्किंग जोन घोषित कर सख्ती नहीं बरती जाएगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। जनता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कम से कम एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए यहां व्यवस्था जरूर की जाए, जिससे किसी की जान न जाए।
अन्य प्रमुख बाजारों का भी बुरा हाल

वीआईपी मार्ग के साथ-साथ शहर के अन्य व्यापारिक केंद्र भी जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। अंसारी रोड, चौक बाजार और ऊपरकोट जैसे घने व्यापारिक क्षेत्रों में हालात बद से बदतर हैं। इन बाजारों में सुबह 11 बजे से लेकर शाम चार बजे तक वाहनों का दबाव इतना अधिक रहता है कि पैदल राहगीरों को भी रास्ता नहीं मिलता। दुकानदारों द्वारा सड़क तक फैलाया गया अतिक्रमण और ग्राहकों द्वारा सड़क पर ही खड़े किए गए वाहन इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। भूतेश्वर रोड और धमेड़ा अड्डा मार्ग पर भी स्थिति कुछ अलग नहीं है, यहां ई-रिक्शा और ठेलों की मनमानी के कारण घंटों ट्रैफिक रेंगता रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल त्योहारों के समय ही सक्रियता दिखाता है, जबकि आम दिनों में ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर लोग बेतरतीब ढंग से वाहन पार्क करते हैं।



ई-रिक्शा और डग्गामार वाहन बने परेशानी का सबब

शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी से उतारने में सबसे बड़ी भूमिका अनियंत्रित ई-रिक्शा और डग्गामार वाहनों की है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब चार हजार ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या बिना पंजीकरण के है। इन ई-रिक्शा चालकों का कोई निश्चित रूट तय न होने के कारण ये बीच सड़क पर ही सवारी उतारते और बैठाते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों की रफ्तार थम जाती है। इसके अलावा, काला आम से दिल्ली रोड और गुलावठी रोड की ओर जाने वाले अवैध डग्गामार वाहन चौराहों पर ही खड़े होकर सवारियां भरते हैं, जिससे ट्रैफिक का प्रवाह बाधित होता है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा समय-समय पर चालान काटने की कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। जब तक ई-रिक्शा के लिए स्पष्ट रूट निर्धारित नहीं किए जाते और डग्गामार वाहनों के स्टैंड शहर से बाहर शिफ्ट नहीं होते, तब तक जाम की समस्या से निजात मिलना मुश्किल है।

लोगों की परेशानी

यह रोज की समस्या है। प्रतिदिन घर से चैंबर पहुंचने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। आज तो हद हो गई जब एम्बुलेंस भी नहीं निकल पायी। प्रशासन को इस पर ठोस कदम उठाना चाहिए। -चेतन भाटी, अधिवक्ता





जाम ना लगे, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ई- रिक्शा चालकों को भी लगातार हिदायत दी जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। - राजपाल सिंह तोमर, ट्रैफिक इंस्पेक्टर
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