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छह हजार क्विंटल तक पहुंचा आलू बीज
Bulandshahr
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:33 AM IST
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बुलंदशहर। महंगाई के सभी रिकार्ड तोड़कर आलू के बीज का मूल्य 5 से 6 हजार रुपये प्रति कुंतल पहुुंच गया है। एफ-1 बीज छह हजार रुपये कुंतल से कम नहीं है। बीज के दाम बढ़ने से किसान बेचैन हैं।
बता दें कि जनपद में सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल बोये जाने की उम्मीद है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 20 क्विंटल आलू के बीज की जरूरत होती है। इस हिसाब से 1.40 लाख कुंतल आलू के बीज की जरूरत होगी। जनपद में बीज की कमी है। सरकारी स्तर पर तो आलू के बीज का टोटा है। उद्यान विभाग ने महज 22 किसानों को लाटरी के जरिए बीज आवंटित किया। सरकारी बीज की कीमत 2 हजार रुपये प्रति कुंतल से कम है। बीज नहीं मिलने के कारण किसान मंडियों में बीज खरीदने को मजबूर है। अव्वल तो एफ-वन किस्म का बीज किसानों को मिल नहीं पा रहा है अगर किसान को बीज मिल भी गया तो रेट 6000 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं है। ऐसे में किसान आलू की बुवाई के बदले दूसरी अन्य फसल को विकल्प के रूप में देख रहे हैं। वहीं, उद्यान विभाग के अधिकारियों को यह तक पता नहीं है कि कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू में बीज की मात्रा कितनी है। ऐसे में धंधेबाज किसानों से मनमानी रकम वसूल रहे हैं।
कोट्स
शासन से बीज का आवंटन कम हुआ था। बीज महंगा भी है। किसानों के हितों को देखते हुए योजना बनाई जा रही है।
- डा. डीके वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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बता दें कि जनपद में सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल बोये जाने की उम्मीद है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 20 क्विंटल आलू के बीज की जरूरत होती है। इस हिसाब से 1.40 लाख कुंतल आलू के बीज की जरूरत होगी। जनपद में बीज की कमी है। सरकारी स्तर पर तो आलू के बीज का टोटा है। उद्यान विभाग ने महज 22 किसानों को लाटरी के जरिए बीज आवंटित किया। सरकारी बीज की कीमत 2 हजार रुपये प्रति कुंतल से कम है। बीज नहीं मिलने के कारण किसान मंडियों में बीज खरीदने को मजबूर है। अव्वल तो एफ-वन किस्म का बीज किसानों को मिल नहीं पा रहा है अगर किसान को बीज मिल भी गया तो रेट 6000 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं है। ऐसे में किसान आलू की बुवाई के बदले दूसरी अन्य फसल को विकल्प के रूप में देख रहे हैं। वहीं, उद्यान विभाग के अधिकारियों को यह तक पता नहीं है कि कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू में बीज की मात्रा कितनी है। ऐसे में धंधेबाज किसानों से मनमानी रकम वसूल रहे हैं।
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कोट्स
शासन से बीज का आवंटन कम हुआ था। बीज महंगा भी है। किसानों के हितों को देखते हुए योजना बनाई जा रही है।
- डा. डीके वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी