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बेटी को जो करे तंग लगा दो उसे फांसी
Bulandshahr
Updated Sat, 16 Nov 2013 05:43 AM IST
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सिकंदराबाद। तुम हो वतन परस्त कि हम, फैसला करो, हमने वतन के राज का सौदा नहीं किया। आर्य समाज मंदिर में आयोजित काव्य संध्या में शायर जुबेर शाद ने देश भक्ति की भावना से श्रोताओं को ओतप्रोत कर दिया। युवा कवि मनोज मानव ने आज के नौनिहालों की व्यथा कुछ यू व्यक्त की, जो हैं कल के कर्णधार, आज हाथों में बर्तन मांज रहे, कुछ कूड़ा कचरा बीन रहे, कुछ सड़कों पर भीख मांग रहे।
राजकुमार जख्मी ने मोहब्ब्त की दुनिया की बानगी पेश करते हुए कहा कि .चांद सितारों के आगे भी एक दुनिया है, यकीन न हो तो मोहब्बत कर के देख लो। दहेज प्रथा पर तीखा प्रहार करते हुए देवेन्द्र नागर ने कहा कि बेटी को जो करे तंग, करके जी अंग भंग, आज ही लगा दो फांसी जेल में न पालिए। आलोक बेजान ने सुनाया फर्ज हमको निभाना पड़ रहा है, उसे फिर गले लगाना पड़ रहा है, गले मिलकर गला जो काटता है, गले उसको लगाना पड़ रहा है। देवेन्द्र देव मिर्जापुरी ने प्रेम की महिमा का गुणगान कुछ यूं किया, मीत से बड़ी न रीति, रीति से बड़ी है प्रीत, मीत संग प्रीत वाले गीत गुनगुनाइए। समाज सेवा मंच एवं हिंदी उर्दू एकता के तत्वावधान में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ शिव कुमार सजल ने मां भारती की स्तुति से की। इसके अतिरिक्त किशोर अग्रवाल, रामअवतार पाल, रविन्द्र कुमार आदि ने अपनी कविताओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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राजकुमार जख्मी ने मोहब्ब्त की दुनिया की बानगी पेश करते हुए कहा कि .चांद सितारों के आगे भी एक दुनिया है, यकीन न हो तो मोहब्बत कर के देख लो। दहेज प्रथा पर तीखा प्रहार करते हुए देवेन्द्र नागर ने कहा कि बेटी को जो करे तंग, करके जी अंग भंग, आज ही लगा दो फांसी जेल में न पालिए। आलोक बेजान ने सुनाया फर्ज हमको निभाना पड़ रहा है, उसे फिर गले लगाना पड़ रहा है, गले मिलकर गला जो काटता है, गले उसको लगाना पड़ रहा है। देवेन्द्र देव मिर्जापुरी ने प्रेम की महिमा का गुणगान कुछ यूं किया, मीत से बड़ी न रीति, रीति से बड़ी है प्रीत, मीत संग प्रीत वाले गीत गुनगुनाइए। समाज सेवा मंच एवं हिंदी उर्दू एकता के तत्वावधान में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ शिव कुमार सजल ने मां भारती की स्तुति से की। इसके अतिरिक्त किशोर अग्रवाल, रामअवतार पाल, रविन्द्र कुमार आदि ने अपनी कविताओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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