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मंडलायुक्त से पुन: विचार के लिए चेयरमैन ने लिखा पत्र
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मंडलायुक्त को पुन: विचार के लिए चेयरमैन ने लिखा पत्र
बुलंदशहर। नगर पालिका चेयरमैन और ठेकेदार के बीच विवाद होने पर नगर में काफी समय से सफाई व्यवस्था चौपट पड़ी हुई है। इसका कारण टेंडर का अनुबंध न करने पर ठेकेदार ने जमा की गई एफडीआर की मांग है। एफडीआर वापस देने के विचार पर पालिका चेयरमैन ने मंडलायुक्त को पुन: विचार करने के लिए पत्र भेजा है।
मंडलायुक्त को भेजे गए पत्र के अनुसार कुछ माह पूर्व पालिका में ई-टेंडर द्वारा 200 सफाईकर्मी, आठ बिजली मिस्त्री, 16 बेलदार और 30 चालकों की भर्ती निकाली थी। जो मैसर्स यूपी कारपोरेशन लिमिटेड के नाम पर हो गया था। इसके बाद फर्म के ठेकेदार ने ठेके के अनुबंध की शर्तों को एक बार पढ़वाने की मांग रखी। जिसे पालिका अफसरों द्वारा नजर अंदाज कर दिया गया। अफसरों द्वारा अनुबंध की शर्तों के टेंडर की एक कापी देने की बात कही गई। इसी मामले को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। ठेकेदार द्वारा अनुबंध न करने पर पालिका अफसरों ने ठेकेदार की 65 हजार, 75 हजार और छह लाख रुपये की एफडीआर जब्त कर ली। एफडीआर जब्त होने पर ठेकेदार ने मेरठ मंडलायुक्त को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया। मामले को संज्ञान में लेकर मंडलायुक्त ने एडीएम फाइनेंस को मामले की जांच सौप दी। जांच में अनियमितता और अपारदर्शिता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने संबंधित फर्म की एफडीआर वापस करने का निर्देश दिया। जिस पर पुन विचार करने के लिए पालिका चेयरमैन ने मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। फर्म के ठेकेदार मुनेश कुमार ने बताया कि पालिका चेयरमैन ने मनमानी करते हुए एफडीआर जब्त कर ली है। इसे वापस लेने की मांग की गई है। उधर, पालिका चेयरमैन मनोज कुमार गर्ग ने बताया कि जांच दोबारा करने के लिए मंडलायुक्त को पुन: विचार करने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही बताया कि नगर में नियमित साफ-सफाई कराई जा रही है।
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बुलंदशहर। नगर पालिका चेयरमैन और ठेकेदार के बीच विवाद होने पर नगर में काफी समय से सफाई व्यवस्था चौपट पड़ी हुई है। इसका कारण टेंडर का अनुबंध न करने पर ठेकेदार ने जमा की गई एफडीआर की मांग है। एफडीआर वापस देने के विचार पर पालिका चेयरमैन ने मंडलायुक्त को पुन: विचार करने के लिए पत्र भेजा है।
मंडलायुक्त को भेजे गए पत्र के अनुसार कुछ माह पूर्व पालिका में ई-टेंडर द्वारा 200 सफाईकर्मी, आठ बिजली मिस्त्री, 16 बेलदार और 30 चालकों की भर्ती निकाली थी। जो मैसर्स यूपी कारपोरेशन लिमिटेड के नाम पर हो गया था। इसके बाद फर्म के ठेकेदार ने ठेके के अनुबंध की शर्तों को एक बार पढ़वाने की मांग रखी। जिसे पालिका अफसरों द्वारा नजर अंदाज कर दिया गया। अफसरों द्वारा अनुबंध की शर्तों के टेंडर की एक कापी देने की बात कही गई। इसी मामले को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। ठेकेदार द्वारा अनुबंध न करने पर पालिका अफसरों ने ठेकेदार की 65 हजार, 75 हजार और छह लाख रुपये की एफडीआर जब्त कर ली। एफडीआर जब्त होने पर ठेकेदार ने मेरठ मंडलायुक्त को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया। मामले को संज्ञान में लेकर मंडलायुक्त ने एडीएम फाइनेंस को मामले की जांच सौप दी। जांच में अनियमितता और अपारदर्शिता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने संबंधित फर्म की एफडीआर वापस करने का निर्देश दिया। जिस पर पुन विचार करने के लिए पालिका चेयरमैन ने मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। फर्म के ठेकेदार मुनेश कुमार ने बताया कि पालिका चेयरमैन ने मनमानी करते हुए एफडीआर जब्त कर ली है। इसे वापस लेने की मांग की गई है। उधर, पालिका चेयरमैन मनोज कुमार गर्ग ने बताया कि जांच दोबारा करने के लिए मंडलायुक्त को पुन: विचार करने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही बताया कि नगर में नियमित साफ-सफाई कराई जा रही है।
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