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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Mother and sisters inconsolable over the death of their young son and brother; father completely shattered.

Bulandshahar News: जवान बेटे की मौत पर बेसुध हुईं मां और बहनें, पूरी तरह टूटे पिता

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:25 PM IST
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Mother and sisters inconsolable over the death of their young son and brother; father completely shattered.
अनूपशहर के गांव नेतानगर में मृतक युवक के शोकसंतप्त परिजन। संवाद
अनूपशहर। खाकी वर्दी पहनने और परिवार को तंगहाली के भंवर से निकालने का सपना लिए दिल्ली पहुंचे अनूपशहर के 24 वर्षीय सौरभ कुमार की उम्मीदें भर्ती परीक्षा के ट्रैक पर ही हमेशा के लिए थम गईं। जब होनहार बेटे का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि पूरा इलाका दहल उठा।
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घर के सबसे बड़े बेटे की मौत पर मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, सीमित आमदनी में बेटे को अफसर बनाने का सपना देखने वाले शिक्षामित्र पिता पूरी तरह टूट चुके हैं और छोटे भाई अपने बड़े भाई के अचानक चले जाने से गहरे सदमे में हैं।
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अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र के गांव नेतानगर निवासी सौरभ कुमार (24) बीते कई वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उनका सबसे बड़ा और एकमात्र सपना था कि वे बदन पर खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा करें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दें। इस सपने को सच करने के लिए सौरभ रोज सुबह-शाम गांव की पगडंडियों और मैदानों में घंटों पसीना बहाया करते थे।
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सोमवार को दिल्ली के वजीराबाद स्थित ट्रेनिंग सेंटर में उनकी शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथि निर्धारित थी। सौरभ बेहद उत्साह और उम्मीदों के साथ भर्ती स्थल पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दौड़ की सीटी बजते ही सौरभ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी लेकिन महज कुछ ही मीटर की दूरी तय करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वे गश्त खाकर ट्रैक पर गिर पड़े। वहां तैनात मेडिकल टीम तुरंत उन्हें अस्पताल ले गई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
दिल्ली पुलिस द्वारा कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद जब सौरभ का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से उनके गांव नेतानगर लाया गया तो हर किसी का कलेजा कांप गया। घर का सबसे बड़ा बेटा, जो कुछ ही घंटों पहले हंसता-मुस्कुराता खाकी पहनने गया था, जब कफन में लिपटा लौटा तो मां बदहवास होकर गिर पड़ीं। बेटे के बेजान चेहरे को निहारते ही मां बार-बार होश खो बैठतीं और फिर सौरभ का नाम पुकारकर बिलख उठतीं। बहनें अपने बड़े भाई के शव से लिपटकर बार-बार बेसुध हो रही थीं।

पूरी तरह टूट गए शिक्षामित्र पिता, सदमे में छोटे भाई
सौरभ के पिता लच्छी सिंह अनूपशहर के गांव सलामतपुर स्थित संविलियन विद्यालय में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। बेहद सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपने पांचों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। सौरभ पांचों भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।
पिता लच्छी सिंह फफक-फफक कर रोते हुए कहते हैं कि सौरभ कहता था, पिता जी, अब आप चिंता मत करो, मैं जल्द खाकी पहनकर घर के सारे कष्ट दूर कर दूंगा। पिता बेटे के इस सपने को याद कर बार-बार पूरी तरह टूट रहे हैं। वहीं, अपने बड़े भाई को अपना संबल मानने वाले छोटे भाई भी इस दुखद वज्रपात से गहरे सदमे में हैं और एक कोने में गुमसुम बैठे हैं।


नेतानगर में नहीं जले चूल्हे, हर आंख हुई नम
होनहार और मिलनसार युवा सौरभ की असमय मौत से पूरे गांव नेतानगर में मातम पसर गया है। घटना के बाद से गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। सौरभ केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे गांव का चहेता था। हर कोई उसकी मेहनत, लगन और सौम्य स्वभाव की तारीफ करता था। सौरभ के घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने हर ग्रामीण की आंख को नम कर दिया है।
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