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सरकारी चिकित्सालयों में खुलेंगे प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
Updated Mon, 09 Apr 2018 11:28 PM IST
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सरकारी अस्पतालों में खुलेंगे जन औषधि केंद्र
- 60 प्रतिशत सस्ती मिलेंगी दवाएं, रुकेगा कमीशन का खेल
- शासन के आदेश पर स्वास्थ्य अफसरों ने शुरू की तैयारियां
अमर उजाला ब्यूूरो
बुलंदशहर।
शासन ने प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोलने का निर्णय लिया है। जेनेरिक मेडिकल स्टोर खुलने के बाद जहां दवाओं के कमीशन का खेल रुकेगा, वहीं आम नागरिकों को 60 से 70 फीसदी तक कम कीमतों में दवाएं मिल सकेंगी। पहले चरण में जिला स्तरीय अस्पतालों के साथ जिले में 20 अन्य सरकारी चिकित्सालयों में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है।
शासन द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में नि:शुल्क दी जाने वाली दवाओं पर मोटा बजट खर्च होता है। कुछ दवाओं की खरीद पर बजट का 30 प्रतिशत से अधिक स्थानीय दवाओं की खरीद पर खर्च किया जाता है। इन दवाओं को खरीदने के नाम पर सरकारी अस्पतालों में कमीशन का खेल होता है। ब्रांडेड कंपनियों से दवाओं को खरीदने में मोटा पैसा खर्च किया जाता है। अब शासन ने सर्वप्रथम सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोलने के बाद स्थानीय खरीद इन्हीं मेडिकल स्टोर से करने का निर्णय लिया है।
सिर्फ ब्रांड का होता है अंतर
ब्रांडेड कंपनियों और जेनेरिक दवाओं के बीच सिर्फ कंपनी के नाम का अंतर होता है। एक दवा को किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से बाजार में बेचा जाता है, उसी बीमारी की जेनेरिक दवा को बिना किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से बाजार में बेचा जाता है। एक ही बीमारी की ब्रांडेड कंपनी और जेनेरिक दवा की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक अंतर होता है।
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कोट
जिला स्तरीय अस्पताल और सीएचसी पर जेनेरिक दवाओं के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। इसके लिए शासन को प्रस्ताव के साथ अस्पतालों की सूची भेज दी गई है। शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
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- 60 प्रतिशत सस्ती मिलेंगी दवाएं, रुकेगा कमीशन का खेल
- शासन के आदेश पर स्वास्थ्य अफसरों ने शुरू की तैयारियां
अमर उजाला ब्यूूरो
बुलंदशहर।
शासन ने प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोलने का निर्णय लिया है। जेनेरिक मेडिकल स्टोर खुलने के बाद जहां दवाओं के कमीशन का खेल रुकेगा, वहीं आम नागरिकों को 60 से 70 फीसदी तक कम कीमतों में दवाएं मिल सकेंगी। पहले चरण में जिला स्तरीय अस्पतालों के साथ जिले में 20 अन्य सरकारी चिकित्सालयों में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है।
शासन द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में नि:शुल्क दी जाने वाली दवाओं पर मोटा बजट खर्च होता है। कुछ दवाओं की खरीद पर बजट का 30 प्रतिशत से अधिक स्थानीय दवाओं की खरीद पर खर्च किया जाता है। इन दवाओं को खरीदने के नाम पर सरकारी अस्पतालों में कमीशन का खेल होता है। ब्रांडेड कंपनियों से दवाओं को खरीदने में मोटा पैसा खर्च किया जाता है। अब शासन ने सर्वप्रथम सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोलने के बाद स्थानीय खरीद इन्हीं मेडिकल स्टोर से करने का निर्णय लिया है।
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सिर्फ ब्रांड का होता है अंतर
ब्रांडेड कंपनियों और जेनेरिक दवाओं के बीच सिर्फ कंपनी के नाम का अंतर होता है। एक दवा को किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से बाजार में बेचा जाता है, उसी बीमारी की जेनेरिक दवा को बिना किसी ब्रांडेड कंपनी के नाम से बाजार में बेचा जाता है। एक ही बीमारी की ब्रांडेड कंपनी और जेनेरिक दवा की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक अंतर होता है।
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कोट
जिला स्तरीय अस्पताल और सीएचसी पर जेनेरिक दवाओं के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। इसके लिए शासन को प्रस्ताव के साथ अस्पतालों की सूची भेज दी गई है। शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ