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अंग्रेजों के बनाए एक ही पुल से गुजरती थीं बस और ट्रेनें 

Thu, 31 Aug 2017 07:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं Updated Thu, 31 Aug 2017 07:06 PM IST
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When Train and bus moves on the same bridge
Kachla bridge

 कछला यूं तो जीवनदायनी का तट हैं, लेकिन आवागमन की असल सुविधा अंग्रेजों के जमाने में ही मिली। करीब 130 साल पहले अंग्रेजी शासन में रेलवे का पुल बना तो कुमाऊं की हसीन वादियों से लेकर ताज के दीदार तक को सफर आसान हो गया। बरेली-कासगंज रेलखंड ब्राडगेज लाइन में तब्दीली के दौरान पुल भी नया बन गया पर उस दौर में अंग्रेजों ने अपनी हुकूमत की लाइन पर सफर भी किया। सफर में हिंदुस्तानी उनके हम सफर बने। अब, अंग्रेजों के जमाने की सौगात के अवशेष के रूप में महज पिलर ही बचे हैं। मीटरगेज लाइन पर कछला पुल को 18वीं शताब्दी के नवें दशक में किस शासक ने बनवाया, यह तो रेलवे के अफसरों को भी नहीं मालूम, लेकिन लोगों की मानें तो पुल का लोकार्पण ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने किया था। अंग्रेजी हुकूमत में बने रेल पुल की मजबूती का अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि पुल की मियादा 80 साल की रही लेकिन मीटरगेज लाइन के पुल पर होकर मरुधर और आगरा फोर्ट एक्सप्रेस से लेकर कई सवारी गाड़ियां दौड़ा करती थीं। यही एक ऐसी रेलवे लाइन थी जिस पर अपनी हुकूमत के दौरान ट्रेनों में सफर करके अंग्रेजों ने कुमाऊं ही हसीं वादियों का लुत्फ उठाया और हुश्न की मल्लिका मुमताज की याद में आगरा के ताजमहल का दीदार किया।           इसी रेलवे पुल पर होकर ही बस और ट्रक गुजरा करते थे। कई बार ऐसा भी हुआ कि किसी ट्रक या फिर बस में पुल पर कोई खराबी आई तो उस तरफ आगरा और मथुरा और इस ओर बदायूं और बरेली का आवागमन प्रभावित हो जाता था। उस वक्त चश्मदीद रहे कछला में एक आश्रम के मुखिया हरीओम दास शर्मा कहते हैं कि ट्रक का गुल्ला टूट जाने पर ट्रेनों के पहिए भी थम जाते थे। उनकी मानें तो अंग्रेजो के जमाने में बने पुल की मियाद 80 साल थी। चूंकि रेलवे आवागमन दुरस्त करने के लिए पुल की मरम्मत कराता रहा, सो पुल ने बिना किसी हादसे के 40 साल अतिरिक्त बोझ उठाया। हरीओम बाबा ने पुल पर होकर अंग्रेजों के साथ भी सफर किया।   

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