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Budaun News: सदर एसडीएम, तहसीलदार समेत तीन लोगों को अदालत ने जारी किया नोटिस
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बदायूं। एसडीएम, तहसीलदार व लेखपाल सदर को स्थायी लोक अदालत ने नोटिस जारी किया है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के बाबा कॉलोनी की रहने वाली ज्योति ने एक जनवरी को वाद दायर किया था। इस मामले में अदालत ने चार फरवरी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद वाद का निस्तारण किया जाएगा।
ज्योति ने बताया कि उसके पति विश्वास बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव दिधौनी में अपने रिश्तेदार महेंद्र की जमीन बटाई पर लेकर खेती करते थे। 24 नवंबर को खेती का कार्य कर बाइक से घर लौटते समय सड़क हादसे में मौत हो गई। खेती से होने वाली आय से ही उसके परिवार का पालन पोषण होता था। पति की मौत के बाद उसके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
पति की मौत के बाद उसने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए आवेदन किया था। लेखपाल ने आवेदन पास कराने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। कहा कि रुपये न देने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा। इसकी शिकायत तहसीलदार सदर से की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो एसडीएम सदर से मामले की शिकायत की गई। अधिकारियों ने कहा कि योजना का लाभ मिल जाएगा। एक महीने के बाद आवेदन के बारे में जानकारी ली गई तो पता लगा कि आवेदन निरस्त कर दिया गया है।
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हादसे से पहले पति खेती करके ही परिवार का भरण-पोषण करते थे। जबकि भू-स्वामी ने स्वयं खेती पर बटाई करने का प्रमाण पत्र दिया था जिसे आवेदन के साथ लगाया गया था। इसके बाद भी उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। उन्होंने बीमा राशि के पांच लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से व 11 हजार रुपये अधिवक्ता खर्चा भी दिलाने की मांग की है। वाद दायर हाेने के बाद अदालत ने नोटिस जारी कर चार फरवरी को अपना पक्ष रखने की तिथि निर्धारित की है।
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ज्योति ने बताया कि उसके पति विश्वास बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव दिधौनी में अपने रिश्तेदार महेंद्र की जमीन बटाई पर लेकर खेती करते थे। 24 नवंबर को खेती का कार्य कर बाइक से घर लौटते समय सड़क हादसे में मौत हो गई। खेती से होने वाली आय से ही उसके परिवार का पालन पोषण होता था। पति की मौत के बाद उसके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
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पति की मौत के बाद उसने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए आवेदन किया था। लेखपाल ने आवेदन पास कराने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। कहा कि रुपये न देने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा। इसकी शिकायत तहसीलदार सदर से की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो एसडीएम सदर से मामले की शिकायत की गई। अधिकारियों ने कहा कि योजना का लाभ मिल जाएगा। एक महीने के बाद आवेदन के बारे में जानकारी ली गई तो पता लगा कि आवेदन निरस्त कर दिया गया है।
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हादसे से पहले पति खेती करके ही परिवार का भरण-पोषण करते थे। जबकि भू-स्वामी ने स्वयं खेती पर बटाई करने का प्रमाण पत्र दिया था जिसे आवेदन के साथ लगाया गया था। इसके बाद भी उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। उन्होंने बीमा राशि के पांच लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से व 11 हजार रुपये अधिवक्ता खर्चा भी दिलाने की मांग की है। वाद दायर हाेने के बाद अदालत ने नोटिस जारी कर चार फरवरी को अपना पक्ष रखने की तिथि निर्धारित की है।