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बदलते मौसम में बच्चों का ख्याल जरूरी, बढ़ रहा बीमारियों का प्रकोप

Thu, 04 Aug 2022 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2022 12:21 AM IST
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Taking care of children is necessary in the changing season, outbreak of diseases is increasing
जिला महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में लगी भीड़। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। मौसम में बदलाव के साथ इन दिनों जलजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। डायरिया, टाइफाइड के साथ जिले में पीलिया और पेट संबंधी बीमारियों का लोग तेजी से शिकार हो रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 80 फीसदी से ज्यादा मरीज इसी तरह की बीमारियों का शिकार निकल रहे हैं। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में भी इन दिनों माताओं के साथ बच्चे ज्यादा पहुंच रहे हैं।
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बारिश के दौरान मौसमी बीमारियों खासकर जल जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है ऐसे में बीमारियां बच्चों को जल्द चपेट में ले लेती हैं। ऐसे में बदलते मौसम के दौरान जल जनित बीमारियों को लेकर बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। इन दिनों बड़ी संख्या में पांच वर्ष तक के बच्चे पीलिया, वायरल बुखार, टाइफाइड, पेट की खराबी, डायरिया जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बच्चों के साथ बड़ों को भी बीमारियां घेर रही हैं।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों औसतन एक हजार मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी नौ सौ से ज्यादा नए पर्चे बने। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में पांच वर्ष आयु तक के बच्चों की संख्या ज्यादा है। इनमें अधिकतर जल जनित बीमारियों का ही शिकार निकल रहे हैं।
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बार-बार उल्टी व दस्त होने पर ओआरएस का घोल दें
- जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. शिवमोहन कमल का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को बार-बार उल्टी व दस्त हो रहे हों, तो हो सकता है कि इसकी वजह प्रदूषित पानी हो। ऐसे मरीज के शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसे देखते हुए जरूरी है कि आप उन्हें लगातार नींबू, नमक और चीनी वाला पानी पिलाएं। ओआरएस का घोल देना उपयोगी रहता है। यदि उल्टी-दस्त रुकने का नाम न लें तो डॉक्टर के पास जाने में देर बिल्कुल न करें।
इस मौसम में इन चीजों से बचाएं बच्चों को
वैसे तो हरी पत्तेदार सब्जियों को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है लेकिन बारिश के मौसम में बच्चों को इससे दूर ही रखें। इनकी जगह ओट्स, चावल आदि खिला सकती हैं। दरअसल मानसून में वातावरण में बहुत उमस होती है और पत्तेदार सब्जियां गीली रहती हैं जिससे इनके पत्तों पर मिट्टी चिपक जाती है। इस वजह से हरी सब्जियों से संक्रमण का खतरा रहता है।
- इस मौसम में दही खांसी, जुकाम और गले में खराश जैसे संक्रमणों को बुलावा दे सकता है। इनकी जगह बच्चों को हल्दी डालकर दूध दें तो बेहतर रहेगा।
- कच्चे स्प्राउट्स भी बच्चों को नहीं देना चाहिए। अगर बच्चों को स्प्राउट्स पसंद हैं तो उन्हें थोड़ा उबालकर दें।
खांसी-खराश होने पर यह करें उपाय
गले में खराश, खांसी और जुकाम इस समय की बड़ी समस्या है। इसमें एक इंच अदरक का टुकड़ा लेकर उसको पीसकर एक कप पानी में डालें। 10-12 तुलसी की पत्ती डालकर उबालें। जब पानी एक तिहाई रह जाए तो उसमें दो चम्मच शहद मिला दें। अगर बच्चे को गुड़ पसंद हो तो गुड़ डालकर छानकर बच्चों को पिला दें। ध्यान रहे कि यह ज्यादा छोटे बच्चे के साथ बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
एक दिन में कम-से-कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार वासु का बहना है कि बच्चों को लेकर इस सीजन में ज्यादा सतर्कता की जरूरत होती है। बच्चों को स्वच्छ पानी ही पिलाएं। शरीर में 80 फीसदी बीमारियां को पानी की अशुद्धता के कारण ही होती हैं। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी के कारण भी बीमारियां घेर लेती हैं। सही मात्रा में शुद्ध पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी सही तरीके से काम करता है। बदलते मौसम में बच्चों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है।

इन दिनों मौसमी बीमारियों के साथ जल जनित बीमारियों का ज्यादा प्रकोप है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों जल जनित बीमारियों का शिकार ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। जिले में संक्रामक रोगों के मद्देनजर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों को बीमारियां ज्यादा घेर रही हैं।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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