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11 महीने बाद खुले प्राइमरी स्कूल, रौनक लौटी, पहले दिन कम बच्चे पहुंचे
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बदायूं। कोरोना काल में बंद चल रहे प्राइमरी स्कूल 11 महीने बाद सोमवार को खुल गए। पहले दिन स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल पहुंचने पर छात्र-छात्राओं का शिक्षकों ने स्वागत किया। स्कूल खुलने से जहां चहल-पहल बढ़ गई, वहीं परिसर भी बच्चों से गुलजार हो गए। कक्षाओं में छात्र-छात्राओं को बैठाने में शारीरिक दूरी का पालन किया गया।
कोरोना के खतरे को देखते हुए बच्चों को अलग-अलग दिन आने और कक्षाओं को चलाने का निर्देश जारी किया गया है। कोरोना की वजह से 17 मार्च 2020 से स्कूलों को बंद कर दिया गया था। अक्तूबर में नौवीं से 12वीं तक स्कूल खोले गए थे। कोरोना पर काबू होने और वैक्सीन आने के बाद 10 फरवरी से पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को खोल दिया गया था।
इसके बाद अब सोमवार को कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों को खोल दिया गया। शहर से लेकर गांव-देहात तक सोमवार को 11 महीने के बाद कक्षा एक से पांच तक के छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस में नजर आए। 11 महीने बाद स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राओं में उत्साह दिखा। कई स्थानों अभिभावक भी बच्चों को छोड़ने स्कूल पहुंचे। कुछ स्कूलों को झालरों और गुब्बारों से सजाया गया था।
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कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में 11 महीने बाद पठन-पाठन शुरू होने को लेकर छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह देखने को मिला। हालांकि, स्कूलों में कक्षाओं को लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत कक्षा एक और पांच के छात्र-छात्राएं सोमवार और बृहस्पतिवार को दो दिन स्कूल पहुंचेंगे। कक्षा दो और चार के छात्र-छात्राओं की मंगलवार और शुक्रवार को जबकि कक्षा तीन के छात्र-छात्राओं की बुधवार और शनिवार को क्लास लगेंगी।
कई छात्र-छात्राओं को मायूस होकर लौटना पड़ा
कक्षा एक से पांच तक के स्कूल सोमवार से खुल जरूर गए, लेकिन नियमानुसार ही अलग-अलग दिन अलग-अलग कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाया गया है। सोमवार को कक्षा एक और पांच के छात्र-छात्राओं को स्कूल जाना था। काफी संख्या में छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को इस बारे में मालूम नहीं था। ऐसे में कक्षा दो तीन और चार के छात्र-छात्राओं को स्कूल से मायूस होकर लौटना पड़ा। सिर्फ कक्षा एक और पांच के ही छात्र-छात्राओं को कक्षा में बैठने की अनुमति थी। ऐसे में स्कूलों में संख्या भी काफी कम रही।
ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं हुआ कोई लाभ
कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण काफ स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाई थीं। ऑनलाइन परीक्षाएं तक करा दी गईं, लेकिन अभिभावकों की मानें तो ऑनलाइन कक्षाओं से छात्र-छात्राओं को फायदा नहीं हुआ। परिषदीय स्कूलों ने भी ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया था। अभिभावकों के अनुसार छोटे बच्चों की अच्छी पढ़ाई ऑफलाइन ही हो सकती है। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं भी हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लास में शामिल होने की व्यवस्था ही नहीं है।
डीएम ने किया विद्यालय का निरीक्षण
बदायूं। सोमवार को जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने मुख्य चिकित्साधिकारी यशपाल सिंह के साथ आरिफपुर नवादा स्थित संविलियन विद्यालय में निरीक्षण किया। डीएम ने बच्चों से पूछा कि साल भर क्या-क्या किया। उन्होंने बच्चों से कोरोना से बचाव के नियम भी पूछे, तो बच्चों ने बताया कि मास्क लगाना है, सैनिटाइजर का प्रयोग करना है एवं शारीरिक दूरी बनाकर रखना है। डीएम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शाबासी दी। डीएम ने विद्यालय में चल रहे टाइल के कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि टाइल लगाने का कार्य गुणवत्ता एवं मानकों के अनुसार होना चाहिए। इसमें कतई लापरवाही न बरती जाए।
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कोरोना के खतरे को देखते हुए बच्चों को अलग-अलग दिन आने और कक्षाओं को चलाने का निर्देश जारी किया गया है। कोरोना की वजह से 17 मार्च 2020 से स्कूलों को बंद कर दिया गया था। अक्तूबर में नौवीं से 12वीं तक स्कूल खोले गए थे। कोरोना पर काबू होने और वैक्सीन आने के बाद 10 फरवरी से पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को खोल दिया गया था।
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इसके बाद अब सोमवार को कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों को खोल दिया गया। शहर से लेकर गांव-देहात तक सोमवार को 11 महीने के बाद कक्षा एक से पांच तक के छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस में नजर आए। 11 महीने बाद स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राओं में उत्साह दिखा। कई स्थानों अभिभावक भी बच्चों को छोड़ने स्कूल पहुंचे। कुछ स्कूलों को झालरों और गुब्बारों से सजाया गया था।
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कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में 11 महीने बाद पठन-पाठन शुरू होने को लेकर छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह देखने को मिला। हालांकि, स्कूलों में कक्षाओं को लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत कक्षा एक और पांच के छात्र-छात्राएं सोमवार और बृहस्पतिवार को दो दिन स्कूल पहुंचेंगे। कक्षा दो और चार के छात्र-छात्राओं की मंगलवार और शुक्रवार को जबकि कक्षा तीन के छात्र-छात्राओं की बुधवार और शनिवार को क्लास लगेंगी।
कई छात्र-छात्राओं को मायूस होकर लौटना पड़ा
कक्षा एक से पांच तक के स्कूल सोमवार से खुल जरूर गए, लेकिन नियमानुसार ही अलग-अलग दिन अलग-अलग कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाया गया है। सोमवार को कक्षा एक और पांच के छात्र-छात्राओं को स्कूल जाना था। काफी संख्या में छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को इस बारे में मालूम नहीं था। ऐसे में कक्षा दो तीन और चार के छात्र-छात्राओं को स्कूल से मायूस होकर लौटना पड़ा। सिर्फ कक्षा एक और पांच के ही छात्र-छात्राओं को कक्षा में बैठने की अनुमति थी। ऐसे में स्कूलों में संख्या भी काफी कम रही।
ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं हुआ कोई लाभ
कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण काफ स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाई थीं। ऑनलाइन परीक्षाएं तक करा दी गईं, लेकिन अभिभावकों की मानें तो ऑनलाइन कक्षाओं से छात्र-छात्राओं को फायदा नहीं हुआ। परिषदीय स्कूलों ने भी ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया था। अभिभावकों के अनुसार छोटे बच्चों की अच्छी पढ़ाई ऑफलाइन ही हो सकती है। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं भी हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लास में शामिल होने की व्यवस्था ही नहीं है।
डीएम ने किया विद्यालय का निरीक्षण
बदायूं। सोमवार को जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने मुख्य चिकित्साधिकारी यशपाल सिंह के साथ आरिफपुर नवादा स्थित संविलियन विद्यालय में निरीक्षण किया। डीएम ने बच्चों से पूछा कि साल भर क्या-क्या किया। उन्होंने बच्चों से कोरोना से बचाव के नियम भी पूछे, तो बच्चों ने बताया कि मास्क लगाना है, सैनिटाइजर का प्रयोग करना है एवं शारीरिक दूरी बनाकर रखना है। डीएम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शाबासी दी। डीएम ने विद्यालय में चल रहे टाइल के कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि टाइल लगाने का कार्य गुणवत्ता एवं मानकों के अनुसार होना चाहिए। इसमें कतई लापरवाही न बरती जाए।