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डॉक्टर के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर के आदेश
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बदायूं। महिला स्टाफ नर्स की वीडियो क्लिप बनाकर वायरल करने की धमकी देने और दुष्कर्म करने के मामले में सीजेएम राजीव कुमार सिंह ने डॉ. हाकिम सिंह समेत दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही सिविल लाइंस पुलिस को विवेचना के आदेश दिए हैं।
बरेली निवासी महिला स्टाफ नर्स ने 156 (3) सीआरपीसी के तहत सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था कि वह बदायूं शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत थी। बताया कि वह अक्तूबर 2014 से 15 जनवरी 2015 तक प्राइवेट अस्पताल में कार्य करती रही। उस समय जिला महिला अस्पताल में तैनात डॉ. हाकिम सिंह प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑन कॉल आते थे। स्टाफ नर्स हाकिम सिंह का ऑपरेशन थिएटर में हाथ बंटाती थी। इससे डॉक्टर से जान पहचान हो गई। बताया कि दिसंबर 2014 में डॉक्टर ने उसे फोन करके अपने आवास पर बुलाया। बरसात में वह भीग चुकी थी। डॉक्टर ने उससे कहा कि वह कपड़े बदल लें। जब वह कपड़े बदल रही थी तभी हाकिम सिंह ने उसकी वीडियो क्लिप बना ली। एक सप्ताह बाद डॉक्टर उसे संभल के बहजोई स्थित अपने नवजीवन हॉस्पिटल ले गए। वहीं उसे वीडियो क्लिप दिखा कर कहा कि वह उनके हिसाब से काम करेगी। इंकार किया तो वह वीडियो वायरल कर देंगे। महिला ने बताया कि उसने डॉक्टर के काफी हाथ पैर जोड़े लेकिन वह नहीं माने। उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। वहीं वीडियो उन्होंने ऑपरेशन टेक्नीशियन मनोज को भी शेयर कर दी। उसके बाद उसने भी स्टाफ नर्स को ब्लैकमेल किया। उसके साथ दुष्कर्म किया। फिर शादी का झूठा आश्वासन देकर उससे कोरे कागज और स्टांप पर हस्ताक्षर करा लिए। मनोज उसे घुमाने के बहाने नैनीताल, बरेली, मुरादाबाद, नोएडा, अलीगढ़, हरिद्वार, ऋषिकेश भी ले गया। दोनों ने नशे का इंजेक्शन देकर एक अन्य व्यक्ति से भी दुष्कर्म कराया। वह चुपचाप बिल्सी के एक प्राइवेट अस्पताल में काम करने लगी तो डॉ. हाकिम सिंह और मनोज वहां से भी उसे ले आए। फिर कुरऊ के जंगल में उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म किया। उसने कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। थकहारकर उसने सीजेएम कोर्ट में 156 (3) के तहत परिवाद दायर किया। सीजेएम राजीव कुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों का अवलोकन किया और पीड़ित स्टाफ नर्स का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए डॉ. हाकिम सिंह और मनोज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। इस संबंध में जब महिला ने सीएमएस डॉ. रेखारानी से बात करने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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बरेली निवासी महिला स्टाफ नर्स ने 156 (3) सीआरपीसी के तहत सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था कि वह बदायूं शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत थी। बताया कि वह अक्तूबर 2014 से 15 जनवरी 2015 तक प्राइवेट अस्पताल में कार्य करती रही। उस समय जिला महिला अस्पताल में तैनात डॉ. हाकिम सिंह प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑन कॉल आते थे। स्टाफ नर्स हाकिम सिंह का ऑपरेशन थिएटर में हाथ बंटाती थी। इससे डॉक्टर से जान पहचान हो गई। बताया कि दिसंबर 2014 में डॉक्टर ने उसे फोन करके अपने आवास पर बुलाया। बरसात में वह भीग चुकी थी। डॉक्टर ने उससे कहा कि वह कपड़े बदल लें। जब वह कपड़े बदल रही थी तभी हाकिम सिंह ने उसकी वीडियो क्लिप बना ली। एक सप्ताह बाद डॉक्टर उसे संभल के बहजोई स्थित अपने नवजीवन हॉस्पिटल ले गए। वहीं उसे वीडियो क्लिप दिखा कर कहा कि वह उनके हिसाब से काम करेगी। इंकार किया तो वह वीडियो वायरल कर देंगे। महिला ने बताया कि उसने डॉक्टर के काफी हाथ पैर जोड़े लेकिन वह नहीं माने। उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। वहीं वीडियो उन्होंने ऑपरेशन टेक्नीशियन मनोज को भी शेयर कर दी। उसके बाद उसने भी स्टाफ नर्स को ब्लैकमेल किया। उसके साथ दुष्कर्म किया। फिर शादी का झूठा आश्वासन देकर उससे कोरे कागज और स्टांप पर हस्ताक्षर करा लिए। मनोज उसे घुमाने के बहाने नैनीताल, बरेली, मुरादाबाद, नोएडा, अलीगढ़, हरिद्वार, ऋषिकेश भी ले गया। दोनों ने नशे का इंजेक्शन देकर एक अन्य व्यक्ति से भी दुष्कर्म कराया। वह चुपचाप बिल्सी के एक प्राइवेट अस्पताल में काम करने लगी तो डॉ. हाकिम सिंह और मनोज वहां से भी उसे ले आए। फिर कुरऊ के जंगल में उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म किया। उसने कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। थकहारकर उसने सीजेएम कोर्ट में 156 (3) के तहत परिवाद दायर किया। सीजेएम राजीव कुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों का अवलोकन किया और पीड़ित स्टाफ नर्स का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए डॉ. हाकिम सिंह और मनोज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। इस संबंध में जब महिला ने सीएमएस डॉ. रेखारानी से बात करने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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