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धर्मेंद्र आजमगढ़ पहुंचे, कहा-बदायूं से रिश्ते नहीं टूटेंगे
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धर्मेंद्र यादव, पूर्व सांसद। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। आजमगढ़ से चुनाव लड़ने की बात पर पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का केवल इतना ही कहना है कि बदायूं से उनके रिश्ते नहीं टूटेंगे। धर्मेंद्र को अब सपा ने आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
23 जून को मतदान और 26 को मतगणना के बाद आजमगढ़ सीट के जो चुनाव परिणाम आएंगे उनका सीधा असर बदायूं की राजनीति पर भी पड़ेगा। दरअसल, आने वाले कुछ ही महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। इसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में धर्मेंद्र के आजमगढ़ से लोकसभा का उपचुनाव लड़ने को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि 2024 के चुनाव में सपा बदायूं से किसी और को चुनाव लड़ा सकती है।
यहां बता दें कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भतीजे पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव 2009 और 2014 में लगातार दो बार बदायूं से सांसद चुने गए। भले ही 2019 का लोकसभा चुनाव वह हार गए, लेकिन मोदी-योगी लहर के बावजूद उन्होंने करीब पांच लाख वोट हासिल किए थे।
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2009 और 2014 में बदायूं से चुने गए सांसद, 2019 में भाजपा से शिकस्त मिली
बदायूं सीट से सलीम शेरवानी 1996, 98, 99 और फिर 2004 में सांसद चुने गए। 2009 के चुनाव में सपा ने धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया। धर्मेंद्र ने चुनाव जीत भी लिया। इसके बाद 2014 में धर्मेंद्र भाजपा के वागीश पाठक को हराकर लोकसभा पहुंचे। 2019 में धर्मेंद्र यादव को भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने मामूली अंतर से हरा दिया। संघमित्रा को 511352 और मोदी-योगी लहर के बावजूद धर्मेंद्र यादव को 492898 वोट मिले। अब स्थानीय निकाय चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र यादव का आजमगढ़ जाना कई मायनों में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ाने वाला है।
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बदायूं से ही चुनाव लड़ेंगे धर्मेंद्र : प्रभात
धर्मेंद्र यादव से इस बाबत पूछने पर उन्होंने तो बस केवल इतना ही कहा कि बदायूं से रिश्ते नहीं टूटेंगे। इससे ज्यादा बोलने से उन्होंने इंकार कर दिया। अब राजनीति गलियारों में इसके दो मायने लगाए जा रहे हैं। पहला ये कि क्या धर्मेंद्र 2024 का चुनाव बदायूं से लड़ेंगे या फिर वे इसे छोड़ देंगे क्योंकि रिश्ते तो चुनाव न लड़कर भी कायम रखे जा सकते हैं। हालांकि उनके मीडिया प्रभारी प्रभात अग्रवाल ने साफ कहा कि धर्मेंद्र यादव 2024 में बदायूं से ही चुनाव लड़ेंगे। उसमें अभी वक्त है।
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23 जून को मतदान और 26 को मतगणना के बाद आजमगढ़ सीट के जो चुनाव परिणाम आएंगे उनका सीधा असर बदायूं की राजनीति पर भी पड़ेगा। दरअसल, आने वाले कुछ ही महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। इसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में धर्मेंद्र के आजमगढ़ से लोकसभा का उपचुनाव लड़ने को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि 2024 के चुनाव में सपा बदायूं से किसी और को चुनाव लड़ा सकती है।
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यहां बता दें कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भतीजे पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव 2009 और 2014 में लगातार दो बार बदायूं से सांसद चुने गए। भले ही 2019 का लोकसभा चुनाव वह हार गए, लेकिन मोदी-योगी लहर के बावजूद उन्होंने करीब पांच लाख वोट हासिल किए थे।
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2009 और 2014 में बदायूं से चुने गए सांसद, 2019 में भाजपा से शिकस्त मिली
बदायूं सीट से सलीम शेरवानी 1996, 98, 99 और फिर 2004 में सांसद चुने गए। 2009 के चुनाव में सपा ने धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया। धर्मेंद्र ने चुनाव जीत भी लिया। इसके बाद 2014 में धर्मेंद्र भाजपा के वागीश पाठक को हराकर लोकसभा पहुंचे। 2019 में धर्मेंद्र यादव को भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने मामूली अंतर से हरा दिया। संघमित्रा को 511352 और मोदी-योगी लहर के बावजूद धर्मेंद्र यादव को 492898 वोट मिले। अब स्थानीय निकाय चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र यादव का आजमगढ़ जाना कई मायनों में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ाने वाला है।
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बदायूं से ही चुनाव लड़ेंगे धर्मेंद्र : प्रभात
धर्मेंद्र यादव से इस बाबत पूछने पर उन्होंने तो बस केवल इतना ही कहा कि बदायूं से रिश्ते नहीं टूटेंगे। इससे ज्यादा बोलने से उन्होंने इंकार कर दिया। अब राजनीति गलियारों में इसके दो मायने लगाए जा रहे हैं। पहला ये कि क्या धर्मेंद्र 2024 का चुनाव बदायूं से लड़ेंगे या फिर वे इसे छोड़ देंगे क्योंकि रिश्ते तो चुनाव न लड़कर भी कायम रखे जा सकते हैं। हालांकि उनके मीडिया प्रभारी प्रभात अग्रवाल ने साफ कहा कि धर्मेंद्र यादव 2024 में बदायूं से ही चुनाव लड़ेंगे। उसमें अभी वक्त है।