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महंगाई, किसान, कृषि कानून, बेरोजगारी नहीं, जातिवाद और ध्रुवीकरण पर चुनाव

Tue, 15 Feb 2022 02:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 02:35 AM IST
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बदायूं। चुनाव प्रचार से लेकर सोमवार को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान तक महंगाई, बेरोजगारी, किसान और कृषि कानूनों जैसे मुद्दे कहीं नहीं दिखे। जिले भर में मतदान जातिवाद और ध्रुवीकरण पर ही हुआ। दातागंज, बिल्सी, बिसौली में जातिवाद और शेखूपुुर, सहसवान, बदायूं शहर सीट पर मतदान ध्रुवीकरण की ओर मुड़ गया। हालांकि, यहां जातिवाद का भी असर रहा। मतदान के समय पार्टियां और प्रत्याशी भी हावी रहे।
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इस बार चुनाव में कई अहम मुद्दे थे। भाजपा के बड़े नेताओं की सभाओं से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी जनसभाएं कीं, लेकिन बड़े नेताओं से लेकर प्रत्याशियों तक ने चुनाव माफियाराज, दंगों और कब्रिस्तान की बाउंड्री के मुद्दों को तवज्जो दी। कुछ इलाकों में मतदाताओं ने विकास को मुद्दा जरूरी बनाया। इनको प्रत्याशियों ने जब अहमियत नहीं दी तो मतदान के दिन इन इलाकों में परिणाम मतदान के बहिष्कार के रूप में सामने आए। पूरे चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी मुद्दा ही नहीं बन सकी। मतदान का दिन आते-आते जिले की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर यह मुद्दे गायब हो गए। बिल्सी और दातागंज में मौर्य-शाक्य बिरादरी भाजपा से खिसक गई। दातागंज में सपा और बिल्सी में यह बिरादरी बसपा की ओर चली गई।
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बिसौली सुरक्षित सीट है। यहां भी ध्रुवीकरण के साथ जाति-बिरादरी का असर दिखा। मुस्लिम मतदाताओं का सपा की ओर रुझान रहा। सहसवान और शहर सीट पर मुस्लिम मतदाताओं का ज्यादा असर है। यहां भी मतदान पर जातिवाद और ध्रुवीकरण का असर दिखा। चुनाव से अहम मुद्दे पूरी तरह से गायब रहे। शेखूपुर सीट पर ध्रुवीकरण रहा। यहां बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं। गांव-देहात में मतदाताओं से बात करने पर उन्होंने भी अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को वोट देने की बात स्वीकार की। हालांकि, काफी संख्या में मतदाताओं ने पार्टी को वोट देने का भी दावा किया। संवाद
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