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भाजपा से वागीश पाठक एमएलसी प्रत्याशी
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बदायूं। उद्योगपति वागीश पाठक को भाजपा ने स्थानीय प्राधिकरण एमएलसी पद का प्रत्याशी घोषित किया है। वह सोमवार को नामांकन कराएंगे। शनिवार को वागीश पाठक के नाम का एलान होने के बाद भाजपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। वागीश इससे पहले भाजपा के टिकट पर 2014 में बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। एमएलसी पद के लिए नौ अप्रैल को मतदान होना है। इसमें 2695 मतदाता मतदान करेंगे। सपा की ओर से अभी किसी के नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दौड़ में सबसे आगे पूर्व विधायक सिनोद शाक्य का नाम बताया जा रहा है।
पूर्व शहर विधायक प्रेमस्वरूप पाठक के पुत्र वागीश पाठक दिल्ली के बड़े उद्योगपति हैं। विधानसभा चुनाव में उनके छोटे भाई शारदेंदु पाठक ने बिल्सी विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने यहां हरीश शाक्य को प्रत्याशी बनाया। ब्राह्मण चेहरे के रूप में डीके भारद्वाज को सहसवान सीट से प्रत्याशी बनाया, लेकिन डीके चुनाव हार गए।
विधानसभा चुनाव 2017 की तरह ही भाजपा ने 2022 में भी सभी वर्गों को साधते हुए टिकट बांटे। विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय वर्ग के साथ शेखूपुर सीट पर धर्मेंद्र शाक्य के रूप में पिछड़ा वर्ग को साधा था। बिसौली सुरक्षित सीट से कुशाग्र सागर को चुनाव लड़ाया था। शहर से महेश गुप्ता, दातागंज से राजीव कुमार सिंह, शेखूपुर से धर्मेंद्र शाक्य, बिल्सी से आरके शर्मा, बिसौली से कुशाग्र सागर विधायक चुने गए। इस बार भी भाजपा ने इसी तरह से जातीय समीकरणों को साधा। शहर से महेश गुप्ता, दातागंज से राजीव कुमार सिंह, बिल्सी से हरीश शाक्य विधायक चुने गए। सहसवान सीट से डीके भारद्वाज, शेखूपुर से धर्मेंद्र शाक्य और बिसौली सुरक्षित सीट से कुशाग्र सागर इस बार चुनाव हार गए। जिले के 15 ब्लॉक में भाजपा के ब्लॉक प्रमुख हैं। किसी भी ब्लॉक में ब्राह्मण ब्लॉक प्रमुख नहीं है। इसके अलावा जिले की सात नगर पालिका और 13 नगर पंचायतों में केवल रुदायन में अरविंद शर्मा ही ब्राह्मण चेयरमैन हैं।
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ऐसे में भाजपा ने एमएलसी पद पर वागीश पाठक को प्रत्याशी बनाकर जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। एमएलसी पद के लिए निर्वाचन प्रकिया 16 अप्रैल तक पूरी होनी है। एलएलसी चुनने के लिए जिले के सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य, नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्ष, सभासद, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य मतदान करेंगे। इसके लिए 16 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। एमएलसी सीट पर लंबे समय सपा का कब्जा रहा है। इस बार अभी सपा की ओर से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है लेकिन पूर्व विधायक सिनोद शाक्य सपा से उम्मीदवार हो सकते हैं।
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पार्टी ने वागीश पाठक को एमएलसी पद का प्रत्याशी बनाया है। पूरी पार्टी एकजुटता के साथ उनको चुनाव जिताकर विधान परिषद भेजेगी। वागीश पाठक की बड़े अंतर से जीत होगी।
- राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
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रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे वागीश, कस्टम में रहे हैं अफसर
बदायूं। वागीश पाठक की गिनती आज देश के बड़े उद्योगपतियों में होती है। राजनीति उनको विरासत में मिली है। वागीश पाठक के बाबा वंशीधर पाठक का जिले की सहकारिता की राजनीति में बड़ा नाम था। उनके पिता प्रेम स्वरूप पाठक चार बार भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे। 1996 में वह शहर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। वागीश पाठक का परिवार संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है।
उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी करने के बाद रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से एमए किया था। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के वह टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। कस्टम इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू कर विभाग में अधिकारी के रूप में कई साल काम कर चुके हैं। वागीश ने 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद वह सक्रिय रूप से राजनीति में आ गए। विद्यार्थी जीवन में वह विद्यार्थी परिषद में कई पदों पर रह चुके हैं। 2014 में वागीश ने भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। भाजपा के बड़े नेताओं से वागीश के अच्छे संबंध हैं। वागीश के पिता प्रेम स्वरूप पाठक सहसवान के प्रमोद इंटर कॉलेज में हिंदी शिक्षक रहे हैं। पाठक परिवार का राजनीति में अच्छा दखल है। वागीश पाठक खेलों के प्रति समर्पित रहे हैं। वह नेट वॉल फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भारतीय ओलंपिक संघ के
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं।
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समर्थकों में खुशी की लहर
वागीश को भाजपा से एमएलसी पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर है। तमाम लोगों ने उनके आवास पर पहुंच कर बधाई दी। प्रेमस्वरूप पाठक और शारतेंदु पाठक को मिठाई खिलाई। इस मौके पर पारस गुप्ता, संजीव पाराशरी, अजय शर्मा, विकास शर्मा आदि रहे।
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आबिद बोले- पूर्व सांसद खुद लड़ें चुनाव और नेता विधान परिषद बनें
बदायूं। सपा से एमएलसी पद का प्रत्याशी अभी तय न हो पाने पर वक्फ विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष आबिद रजा ने प्रेस को बयान जारी करके पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव पर निशाना साधा है। कहा है कि इस बार सपा फिर से हारने के लिए बलि का बकरा खोज रही है। पूर्व सांसद जिले के कद्दावर नेता और विकास पुरुष हैं तो खुद ही एमएलसी का चुनाव लड़ें। अहमद हसन के निधन के बाद से विधान परिषद में नेता का पद भी खाली है। वह मुलायम परिवार के सदस्य हैं तो जीतकर इस पद पर काबिज हो सकते हैं। संवाद
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पूर्व शहर विधायक प्रेमस्वरूप पाठक के पुत्र वागीश पाठक दिल्ली के बड़े उद्योगपति हैं। विधानसभा चुनाव में उनके छोटे भाई शारदेंदु पाठक ने बिल्सी विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने यहां हरीश शाक्य को प्रत्याशी बनाया। ब्राह्मण चेहरे के रूप में डीके भारद्वाज को सहसवान सीट से प्रत्याशी बनाया, लेकिन डीके चुनाव हार गए।
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विधानसभा चुनाव 2017 की तरह ही भाजपा ने 2022 में भी सभी वर्गों को साधते हुए टिकट बांटे। विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय वर्ग के साथ शेखूपुर सीट पर धर्मेंद्र शाक्य के रूप में पिछड़ा वर्ग को साधा था। बिसौली सुरक्षित सीट से कुशाग्र सागर को चुनाव लड़ाया था। शहर से महेश गुप्ता, दातागंज से राजीव कुमार सिंह, शेखूपुर से धर्मेंद्र शाक्य, बिल्सी से आरके शर्मा, बिसौली से कुशाग्र सागर विधायक चुने गए। इस बार भी भाजपा ने इसी तरह से जातीय समीकरणों को साधा। शहर से महेश गुप्ता, दातागंज से राजीव कुमार सिंह, बिल्सी से हरीश शाक्य विधायक चुने गए। सहसवान सीट से डीके भारद्वाज, शेखूपुर से धर्मेंद्र शाक्य और बिसौली सुरक्षित सीट से कुशाग्र सागर इस बार चुनाव हार गए। जिले के 15 ब्लॉक में भाजपा के ब्लॉक प्रमुख हैं। किसी भी ब्लॉक में ब्राह्मण ब्लॉक प्रमुख नहीं है। इसके अलावा जिले की सात नगर पालिका और 13 नगर पंचायतों में केवल रुदायन में अरविंद शर्मा ही ब्राह्मण चेयरमैन हैं।
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ऐसे में भाजपा ने एमएलसी पद पर वागीश पाठक को प्रत्याशी बनाकर जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। एमएलसी पद के लिए निर्वाचन प्रकिया 16 अप्रैल तक पूरी होनी है। एलएलसी चुनने के लिए जिले के सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य, नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्ष, सभासद, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य मतदान करेंगे। इसके लिए 16 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। एमएलसी सीट पर लंबे समय सपा का कब्जा रहा है। इस बार अभी सपा की ओर से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है लेकिन पूर्व विधायक सिनोद शाक्य सपा से उम्मीदवार हो सकते हैं।
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पार्टी ने वागीश पाठक को एमएलसी पद का प्रत्याशी बनाया है। पूरी पार्टी एकजुटता के साथ उनको चुनाव जिताकर विधान परिषद भेजेगी। वागीश पाठक की बड़े अंतर से जीत होगी।
- राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
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रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे वागीश, कस्टम में रहे हैं अफसर
बदायूं। वागीश पाठक की गिनती आज देश के बड़े उद्योगपतियों में होती है। राजनीति उनको विरासत में मिली है। वागीश पाठक के बाबा वंशीधर पाठक का जिले की सहकारिता की राजनीति में बड़ा नाम था। उनके पिता प्रेम स्वरूप पाठक चार बार भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे। 1996 में वह शहर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। वागीश पाठक का परिवार संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है।
उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी करने के बाद रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से एमए किया था। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के वह टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। कस्टम इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू कर विभाग में अधिकारी के रूप में कई साल काम कर चुके हैं। वागीश ने 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद वह सक्रिय रूप से राजनीति में आ गए। विद्यार्थी जीवन में वह विद्यार्थी परिषद में कई पदों पर रह चुके हैं। 2014 में वागीश ने भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। भाजपा के बड़े नेताओं से वागीश के अच्छे संबंध हैं। वागीश के पिता प्रेम स्वरूप पाठक सहसवान के प्रमोद इंटर कॉलेज में हिंदी शिक्षक रहे हैं। पाठक परिवार का राजनीति में अच्छा दखल है। वागीश पाठक खेलों के प्रति समर्पित रहे हैं। वह नेट वॉल फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भारतीय ओलंपिक संघ के
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं।
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समर्थकों में खुशी की लहर
वागीश को भाजपा से एमएलसी पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर है। तमाम लोगों ने उनके आवास पर पहुंच कर बधाई दी। प्रेमस्वरूप पाठक और शारतेंदु पाठक को मिठाई खिलाई। इस मौके पर पारस गुप्ता, संजीव पाराशरी, अजय शर्मा, विकास शर्मा आदि रहे।
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आबिद बोले- पूर्व सांसद खुद लड़ें चुनाव और नेता विधान परिषद बनें
बदायूं। सपा से एमएलसी पद का प्रत्याशी अभी तय न हो पाने पर वक्फ विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष आबिद रजा ने प्रेस को बयान जारी करके पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव पर निशाना साधा है। कहा है कि इस बार सपा फिर से हारने के लिए बलि का बकरा खोज रही है। पूर्व सांसद जिले के कद्दावर नेता और विकास पुरुष हैं तो खुद ही एमएलसी का चुनाव लड़ें। अहमद हसन के निधन के बाद से विधान परिषद में नेता का पद भी खाली है। वह मुलायम परिवार के सदस्य हैं तो जीतकर इस पद पर काबिज हो सकते हैं। संवाद