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दो सांड़ों की लड़ाई में दुकान तहस-नहस

Mon, 18 Apr 2022 11:11 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 18 Apr 2022 11:11 PM IST
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रोड पर भिड़ते छुट्टा सांड। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। छुट्टा पशु लोगों की जानमाल के लिए खतरा बने हुए हैं। अक्सर सड़कों पर छुट्टा सांड़ों के बीच भिड़ंत में लोग घायल हो रहे हैं। कई बार छुट्टा सांड़ हमला कर लोगों की जान भी ले रहे हैं। जिले की 131 गोशालाओं पर करोड़ों का बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। शहर में शुक्रवार शाम को रजी चौक पर दो सांड़ों में भिड़ंत हो गई। इसमें हरीराम की मशहूर समोसे जलेबी की दुकान के काउंटर को सांड़ों ने तहस नहस कर दिया।
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जिले में कुल 131 राजकीय गोशालाओं में 15 हजार से ज्यादा गोवंशीय पशु हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़ों को माने तो जिले में कुल गोवंशीय पशुओं के संख्या 2.79 लाख से ज्यादा है। महिष वंशीय पशुओं की बात करें तो इनकी संख्या जिले में 11 लाख से ज्यादा है। बावजूद इसके सड़कों पर सिर्फ गोवंशीय पशु नजर आते हैं। शहर से देहात तक सड़कों पर घुमंतू पशुओं का राज है। आवारा पशु जिले भर में कई लोगों की जान ले चुके हैं तो अक्सर लोगों को घायल भी करते रहते हैं।
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शुक्रवार देर शाम शहर में रजी चौक पर दो छुट्टा सांड़ आपस में भिड़ गए। दोनों ने एक-दूसरे को पटक-पटक कर मारा। इस दौरान सांड़ों के निशाने पर समोसा-जलेबी की मशहूर दुकान को तहस-नहस कर दिया।
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सांड़ों की भिड़त के दौरान आसपास भगदड़ मची रही। यह पहला मौका नहीं, होली पर नेहरू चौक पर सांड़ ने सड़क किनारे लगी रंगों की एक दुकान को तहस-नहस कर दिया था। बिल्सी में एक आवारा सांड़ अक्सर कारों पर हमला कर क्षतिग्रस्त करने को लेकर सुर्खियों में रहता है। कई बार आवारा सांड़ जान ले रहे हैं, लेकिन इसके निपटारे के लिए पशुपालन विभाग कुछ नहीं करता। गोशालाओं के नाम पर बंदरबांट किया जा रहा है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

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बार-बार फाइलों में गुम हो रही डीएम की चेतावनी
जिला स्तरीय बैठकों में डीएम दीपा रंजन कई बार संबंधित अधिकारियों को चेता चुकी हैं कि गोवंशीय पशु सड़कों पर घूमते दिखे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन डीएम की यह चेतावनी फाइलों में कैद हो जा रही है। पिछले दिनों भी डीएम ने अधिकारियों को आवारा पशुओं को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। डीएम के आदेश के बावजूद पशु पालन विभाग समेत स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायतों ने पशुओं को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। ग्राम पंचायतों से लेकर स्थानीय निकायों तक की गोशालाओं का बुरा हाल है। पशुओं की भी यहां भूख के कारण जान जा रही है।
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