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कोई प्रत्याशी पसंद नहीं...नोटा है न!
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 08 Feb 2017 11:50 PM IST
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पहली बार विधानसभा चुनाव में मिलेगा नोटा का विकल्प
लोकसभा चुनाव में 12 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा था नोटा
यूपी के विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदाताओं को नोटा का भी विकल्प मिलेगा। यूं इसकी शुरुआत लोकसभा चुनाव में हो चुकी है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में नोटा का विकल्प 12 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा था। विधानसभा चुनाव में भी अगर आपको अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं है तो आप बेहिचक नोटा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नोटा का विकल्प मतदाताओं को ‘राइट टू रिजेक्ट’ के अंतर्गत दिया गया है। नियम है कि किसी भी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में यदि सर्वाधिक वोट नोटा को मिलते हैं तो वहां दोबारा चुनाव कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2014 में ईवीएम में पहली बार नोटा का विकल्प दिया गया था। मतदाताओं ने इसका जमकर इस्तेमाल भी किया। इस चुनाव में कुल मिलाकर लगभग 10.27 लाख वोट पड़े थे जिनमें से 6286 वोट नोटा को मिले। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव मैदान में कुल 15 प्रत्याशी थे जिनमें से 12 को नोटा से भी कम वोट मिले थे।
कांग्रेस समर्थित महान दल का प्रत्याशी भी नोटा से छोटा पड़ा
लोकसभा चुनाव 2014 में समाजवादी पार्टी के अलावा सिर्फ भाजपा और बसपा के उम्मीदवार ऐसे थे जिन्होंने नोटा से ज्यादा वोट हासिल किए थे। कांग्रेस ने यह सीट महान दल के लिए छोड़ते हुए उसके प्रत्याशी स्वामी पगलानंद को समर्थन दिया था, मगर कांग्रेस समर्थित महान दल का यह प्रत्याशी भी नोटा से छोटा पड़ गया था। ईवीएम पर नोटा के विकल्प का बटन 6286 मतदाताओं ने दबाया था जबकि स्वामी पगलानंद को सिर्फ 5748 वोट मिले थे।
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लोकसभा चुनाव 2014
कुल वोट- 1769145
डाले गए वोट- 1027504
नोटा - 6286 (.36 फीसदी)
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ये प्रत्याशी भी रह गए नोटा से पीछे
पीईसीपी के अजीत पाल सिंह को 3421, एलपीआई(वी) के अनिल कुमार शर्मा को 1993, एनपी के मदनलाल को 791, बीएससीपी के महेंद्र पाल को 860, आरएसएमडी की रीना को 2065, आरवीएनपी के वीरेंद्र पाल गुप्ता को 810, आरपीआई (ए) के संतोष कुमार गुप्ता को 1448, आम आदमी पार्टी की हेमा मिश्रा को 810, निर्दलीय अतुल कुमार को 4195, मुंशीलाल को 5651, हरभगवान को 4195 को वोट मिले थे।
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नन ऑफ दि एबव (नोटा) का ऑप्शन सभी प्रत्याशियों के नीचे दिया जाएगा, जिन वोटरों को उपरोक्त प्रत्याशी पसंद नहीं हों, तो वह नोटा की बटन दबाकर अपना वोट डाल सकता है। नोटा का ऑप्शन बढ़ाते हुए ईवीएम को तैयार किया जा रहा है।
-हवलदार यादव, उप जिला निर्वाचन अधिकारी
लोकसभा चुनाव में 12 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा था नोटा
यूपी के विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदाताओं को नोटा का भी विकल्प मिलेगा। यूं इसकी शुरुआत लोकसभा चुनाव में हो चुकी है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में नोटा का विकल्प 12 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा था। विधानसभा चुनाव में भी अगर आपको अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं है तो आप बेहिचक नोटा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नोटा का विकल्प मतदाताओं को ‘राइट टू रिजेक्ट’ के अंतर्गत दिया गया है। नियम है कि किसी भी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में यदि सर्वाधिक वोट नोटा को मिलते हैं तो वहां दोबारा चुनाव कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2014 में ईवीएम में पहली बार नोटा का विकल्प दिया गया था। मतदाताओं ने इसका जमकर इस्तेमाल भी किया। इस चुनाव में कुल मिलाकर लगभग 10.27 लाख वोट पड़े थे जिनमें से 6286 वोट नोटा को मिले। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव मैदान में कुल 15 प्रत्याशी थे जिनमें से 12 को नोटा से भी कम वोट मिले थे।
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कांग्रेस समर्थित महान दल का प्रत्याशी भी नोटा से छोटा पड़ा
लोकसभा चुनाव 2014 में समाजवादी पार्टी के अलावा सिर्फ भाजपा और बसपा के उम्मीदवार ऐसे थे जिन्होंने नोटा से ज्यादा वोट हासिल किए थे। कांग्रेस ने यह सीट महान दल के लिए छोड़ते हुए उसके प्रत्याशी स्वामी पगलानंद को समर्थन दिया था, मगर कांग्रेस समर्थित महान दल का यह प्रत्याशी भी नोटा से छोटा पड़ गया था। ईवीएम पर नोटा के विकल्प का बटन 6286 मतदाताओं ने दबाया था जबकि स्वामी पगलानंद को सिर्फ 5748 वोट मिले थे।
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लोकसभा चुनाव 2014
कुल वोट- 1769145
डाले गए वोट- 1027504
नोटा - 6286 (.36 फीसदी)
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ये प्रत्याशी भी रह गए नोटा से पीछे
पीईसीपी के अजीत पाल सिंह को 3421, एलपीआई(वी) के अनिल कुमार शर्मा को 1993, एनपी के मदनलाल को 791, बीएससीपी के महेंद्र पाल को 860, आरएसएमडी की रीना को 2065, आरवीएनपी के वीरेंद्र पाल गुप्ता को 810, आरपीआई (ए) के संतोष कुमार गुप्ता को 1448, आम आदमी पार्टी की हेमा मिश्रा को 810, निर्दलीय अतुल कुमार को 4195, मुंशीलाल को 5651, हरभगवान को 4195 को वोट मिले थे।
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नन ऑफ दि एबव (नोटा) का ऑप्शन सभी प्रत्याशियों के नीचे दिया जाएगा, जिन वोटरों को उपरोक्त प्रत्याशी पसंद नहीं हों, तो वह नोटा की बटन दबाकर अपना वोट डाल सकता है। नोटा का ऑप्शन बढ़ाते हुए ईवीएम को तैयार किया जा रहा है।
-हवलदार यादव, उप जिला निर्वाचन अधिकारी