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जल, जंगल और जमीन के बिना प्रकृति अधूरी है
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बिल्सी। दिधौनी स्थित पदमांचल संस्था कार्यालय पर विश्व प्रकृति दिवस मनाया गया। यहां तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने औषधि पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
तहसीलदार ने कहा कि वर्तमान में कई प्रजाति के जीव-जंतु एवं वनस्पति विलुप्त हो रहे हैं। ऐसे जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का विश्व प्रकृति दिवस पर संकल्प लेना ही उद्देश्य है। जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहां यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों। भारत देश जंगल, वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। समिति जिलाध्यक्ष विष्णु असावा ने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों से मानव प्राकृतिक संतुलन को उपेक्षा की दृष्टि से देख रहा है। संस्थापक प्रशांत जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। इस मौके पर संदीप शर्मा, अनुज शर्मा, मृगांग जैन, अमन गुप्ता, ग्रीश शर्मा, हरिओम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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तहसीलदार ने कहा कि वर्तमान में कई प्रजाति के जीव-जंतु एवं वनस्पति विलुप्त हो रहे हैं। ऐसे जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का विश्व प्रकृति दिवस पर संकल्प लेना ही उद्देश्य है। जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहां यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों। भारत देश जंगल, वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। समिति जिलाध्यक्ष विष्णु असावा ने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों से मानव प्राकृतिक संतुलन को उपेक्षा की दृष्टि से देख रहा है। संस्थापक प्रशांत जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। इस मौके पर संदीप शर्मा, अनुज शर्मा, मृगांग जैन, अमन गुप्ता, ग्रीश शर्मा, हरिओम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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