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खादी की बिक्री में दस फीसदी से ज्यादा इजाफा, सुधर रहे हालात
सार
खादी का क्रेज अब युवाओं में भी बढ़ने लगा है।इसके अलावा खादी अन्य ब्रांडों से अधिक मजबूत व टिकाऊ होती है।खादी की विशेषता है कि यह गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्मी देने का काम करते हैं।
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बदायूं का श्री गांधी आश्रम खादी भंडार। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं। खादी का क्रेज अब युवाओं में भी बढ़ने लगा है। खादी के वस्त्रों की बिक्री में एक साल के भीतर करीब दस फीसदी इजाफा हुआ है। खादी के कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो करीब एक दशक से खादी परिधानों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान खादी में प्रतिवर्ष आठ से 10 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
श्री गांधी आश्रम खादी भंडार व्यवस्थापक राजेंद्र सिंह का कहना है कि वित्तीय वर्ष पिछले साल के मुकाबले इस साल खादी वस्त्रों की बिक्री दस फीसदी तक बढ़ी है। गांधी जयंती पर सरकार ने दो से 31 दिसंबर तक खादी पर 20 फीसदी छूट का एलान किया है। ऐसे में बिक्री और अच्छी होने की उम्मीद है।
जिले में तहसील स्तर पर श्री गांधी आश्रम खादी भंडार हैं। मुख्यालय पर दो खादी भंडार हैं। अन्य संस्थाएं भी खादी भंडारों का संचालन करती हैं। खादी की ओर युवाओं का क्रेज बढ़ने का कारण यह भी है कि खादी की रेडीमेड शर्ट, कुर्ते-पायजामे, तौलिया व रुमाल युवाओं को खासा पसंद आ रहे हैं। ऐसे ही युवतियों को सलवार-सूट और दुपट्टे आकर्षित कर रहे हैं।
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अब ट्रेंडी कपड़ों पर भी जोर
खादी में अब ट्रेंडी यानी फैशनेबल कपड़ों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पहले जहां सिर्फ खादी के कुर्ते व पायजामे ही मिलते थे। अब ट्राउजर्स, शर्ट और हाइनेक जैसे ट्रेंडी कपड़े भी तैयार किए जा रहे हैं। एक ब्रांडेड शर्ट जहां हजार से ढाई हजार रुपये की रेंज में मिलती है। वहीं, खादी की बनी शर्ट की रेंज 350 रुपये से शुरू होती है। इसके अलावा खादी अन्य ब्रांडों से अधिक मजबूत व टिकाऊ होती है।
कुर्ता-पायजामा की बात करें तो सात से आठ सौ रुपये में यह तैयार हो जाता है। खादी की विशेषता है कि यह गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्मी देने का काम करते हैं। खादी के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एक दशक पहले तक युवाओं में खादी को लेकर इतना क्रेज नहीं था। खादी ने भी समय के साथ खुद को बदला है और फैशन के इस जमाने में बड़ी कंपनियों को खादी टक्कर दे रही है।
हर घर तिरंगा अभियान में
झंडों की नहीं हो सकी पूर्ति
इस वर्ष आजादी के अमृत महोत्सव पर सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान चलाया तो खादी के तिरंगा की मांग आसमान पर पहुंच गई। दरअसल, लोगों ने अपने घरों पर तो कपड़े का बना तिरंगा फहराया, लेकिन सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों आदि में खादी के तिरंगा का इस्तेमाल किया गया। श्री गांधी आश्रम खादी भंडार तिरंगा की पूर्ति नहीं कर सका। खादी भंडारा को तिरंगा की बिक्री से अच्छा मुनाफा हुआ है।
खादी प्राकृतिक है। खादी का वस्त्र गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक और सर्दियों में गरमाहट देता है। युवाओं में खादी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष खादी की बिक्री में दस फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ है। खादी का कारोबार बढ़ता है तो बुनकरों को भी रोजगार मिलता है। खादी अब ब्रांडेड कपड़ों पर भारी पड़ रही है। -राजेंद्र सिंह, व्यवस्थापक, श्री गांधी आश्रम खादी भंडार उझानी।
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श्री गांधी आश्रम खादी भंडार व्यवस्थापक राजेंद्र सिंह का कहना है कि वित्तीय वर्ष पिछले साल के मुकाबले इस साल खादी वस्त्रों की बिक्री दस फीसदी तक बढ़ी है। गांधी जयंती पर सरकार ने दो से 31 दिसंबर तक खादी पर 20 फीसदी छूट का एलान किया है। ऐसे में बिक्री और अच्छी होने की उम्मीद है।
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जिले में तहसील स्तर पर श्री गांधी आश्रम खादी भंडार हैं। मुख्यालय पर दो खादी भंडार हैं। अन्य संस्थाएं भी खादी भंडारों का संचालन करती हैं। खादी की ओर युवाओं का क्रेज बढ़ने का कारण यह भी है कि खादी की रेडीमेड शर्ट, कुर्ते-पायजामे, तौलिया व रुमाल युवाओं को खासा पसंद आ रहे हैं। ऐसे ही युवतियों को सलवार-सूट और दुपट्टे आकर्षित कर रहे हैं।
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अब ट्रेंडी कपड़ों पर भी जोर
खादी में अब ट्रेंडी यानी फैशनेबल कपड़ों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पहले जहां सिर्फ खादी के कुर्ते व पायजामे ही मिलते थे। अब ट्राउजर्स, शर्ट और हाइनेक जैसे ट्रेंडी कपड़े भी तैयार किए जा रहे हैं। एक ब्रांडेड शर्ट जहां हजार से ढाई हजार रुपये की रेंज में मिलती है। वहीं, खादी की बनी शर्ट की रेंज 350 रुपये से शुरू होती है। इसके अलावा खादी अन्य ब्रांडों से अधिक मजबूत व टिकाऊ होती है।
कुर्ता-पायजामा की बात करें तो सात से आठ सौ रुपये में यह तैयार हो जाता है। खादी की विशेषता है कि यह गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्मी देने का काम करते हैं। खादी के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एक दशक पहले तक युवाओं में खादी को लेकर इतना क्रेज नहीं था। खादी ने भी समय के साथ खुद को बदला है और फैशन के इस जमाने में बड़ी कंपनियों को खादी टक्कर दे रही है।
हर घर तिरंगा अभियान में
झंडों की नहीं हो सकी पूर्ति
इस वर्ष आजादी के अमृत महोत्सव पर सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान चलाया तो खादी के तिरंगा की मांग आसमान पर पहुंच गई। दरअसल, लोगों ने अपने घरों पर तो कपड़े का बना तिरंगा फहराया, लेकिन सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों आदि में खादी के तिरंगा का इस्तेमाल किया गया। श्री गांधी आश्रम खादी भंडार तिरंगा की पूर्ति नहीं कर सका। खादी भंडारा को तिरंगा की बिक्री से अच्छा मुनाफा हुआ है।
खादी प्राकृतिक है। खादी का वस्त्र गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक और सर्दियों में गरमाहट देता है। युवाओं में खादी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष खादी की बिक्री में दस फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ है। खादी का कारोबार बढ़ता है तो बुनकरों को भी रोजगार मिलता है। खादी अब ब्रांडेड कपड़ों पर भारी पड़ रही है। -राजेंद्र सिंह, व्यवस्थापक, श्री गांधी आश्रम खादी भंडार उझानी।