Budaun News: कथावाचक गोपालाचार्य बोले- मुगलों के डर से शुरू हुई थी रात में शादी की परंपरा; बताई यह वजह
उझानी में श्रीराम कथा के दौरान कथावाचक गोपालाचार्य ने कहा कि मुगल आक्रांताओं के भारत में आने से पहले शादियां दिन में ही हुआ करती थीं, लेकिन बाद में सनातनी लोग रात में शादियां महज इसलिए करने लगे कि मुगल उन्हें परेशान करते थे।
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बदायूं के उझानी के श्री रामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा एवं श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन कथावाचक त्रिदंडी गोपालाचार्य ने श्रीराम विवाह के प्रसंगों के साथ श्रोताओं को प्राचीन परंपराओं से सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पहले भी बरात में शामिल होती थीं, लेकिन तब मुगल आक्रांताओं के डर से शादियां रात में हुआ करती थीं।
गोपालाचार्य ने कहा कि मुगल आक्रांताओं के भारत में आने से पहले शादियां दिन में ही हुआ करती थीं, लेकिन बाद में सनातनी लोग रात में शादियां महज इसलिए करने लगे कि मुगल उन्हें परेशान करते थे। ऐसे में रात में दुल्हन को विदा कर दिया जाता था। इसी खौफ ने ही लोगों के अंदर बाल विवाह की सोच विकसित की थी।
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त्रिदंडी गोपालाचार्य ने श्रीराम विवाह के साथ ही उनके भाइयों के विवाह की परंपरा और संस्कार के बारे में कहा कि वर पक्ष याची होता है। कन्यादान करने वाला महादानी कहलाता है। उन्होंने राजा जनक और दशरथ के संवाद को भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। कथा में प्रवीण महाराज ने महायज्ञ और कथा में गुप्त योगदान के बारे में बताया।
शनिवार को होंगे उपनयन संस्कार
धार्मिक आयोजन के बीच प्रवीण महाराज ने बताया कि सनातन संस्कृति के अनुरूप उपनयन संस्कार का आयोजन शनिवार सुबह नौ बजे कार्यक्रम स्थल पर ही होगा। स्वामी गोपालाचार्य का भी सानिध्य प्राप्त होगा। करीब 15 नाम उपनयन संस्कार की सूची में शामिल हो चुके हैं। उपनयन के लिए सुबह तक भक्त आयोजकों से बात कर सकते हैं।