फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Hunger taught me acting and I got into the roles of Ramlila.

Budaun News: भूख ने सिखा दिया अभिनय तो रामलीला के किरदारों में ढल गए

Mon, 16 Oct 2023 12:05 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Mon, 16 Oct 2023 12:05 PM IST
विज्ञापन
Hunger taught me acting and I got into the roles of Ramlila.
बदायूं। ये जिंदगी भी रंगमंच से कम नहीं, जो सबको अपने मुताबिक नचाती है। यहां किरदार बदल जाते हैं पर हालात वही रहते हैं। कुछ ऐसा ही हाल है रामलीला महोत्सव में रामलीला मंचन करने आए कलाकारों का, जिनमें कुछ को अभिनय का शौक यहां तक खींच लाया तो कुछ को दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद ने अभिनय सिखा दिया।
विज्ञापन




ये कलाकर दस महीने पूरे देश में खानाबदोश की तरह घूमते हैं। 75 साल के परमानंद मिश्रा गरीबी के चलते 15 साल की आयु में अभिनय के पेशे से जुड़े तो इसके ही होकर रह गए। पिछले 50 सालों से वे रामलीला में रावण का किरदार अदा करते आ रहे हैं।
विज्ञापन




करीब 17 साल से रामलीला महोत्सव में दरभंगा (बिहार) की श्री मिथिला विजय रामलीला नाट्य कला परिषद के लल्लन झा अपने 22 साथियों के साथ यहां आकर रामलीला का मंचन कर रहे हैं। मंंच पर लोगों की वाहवाही लूटने वाले इन कलाकारों में सबकी अपनी अलग कहानी है। कुछ शौक की खातिर इससे जुड़े, तो कुछ की मजबूरी उन्हें यहां खींच लाई।
विज्ञापन
विज्ञापन




परमानंद मिश्रा बताते हैं कि दरभंगा में कई सालों पहले जब बाढ़ आती थी तो सब कुछ बहाकर ले जाती थी। उनकी भी काफी खेती बाढ़ की भेंट चढ़ी तो घर में खाने के भी लाले पड़ने लगे। ऐसे में 15 साल की उम्र में ही बिहार में होने वाली रामलीला में अभिनय शुरू कर दिया।



शुरू में कुछ पैसे मिले तो घर का खर्च चलने लगा। इसके बाद इसमें रमते चले गए। करीब 10 साल तक राम का किरदार निभाया, उसके बाद 25 साल की उम्र से रावण का किरदार निभाते आ रहे हैं। इस उम्र में भी जब वह मंच पर आकर अट्टहास करते हैं तो देखने वाले उनके मुरीद हो जाते हैं।



12 साल की उम्र में गरीबी खींच लाई मंच पर : मंच पर कौशल्या, कैकेयी समेत कई महिला किरदार निभाने वाले 30 वर्षीय इंद्रकांत झा की कहानी भी कुछ ऐसी है। वह कहते हैं कि परिवार में चार भाई और दो बहनें हैं। खेतीबाड़ी है लेकिन इतनी नहीं कि परिवार की रोटी चल पाए। ऐसे में 12 साल की उम्र में मंच पर पैर रखा तो आज तक अभिनय से ही अपने जीवन की गाड़ी चला रहे हैं। इतना कमा लेते हैं कि भरण-पोषण हो जाता है। महिलाओं के किरदार निभाने में मुश्किल के सवाल पर बोले- अब तो अभिनय खून में रच-बस गया है।



बीए साइकोलॉजी ऑनर्स किया पर शौक ने बना दिया कलाकार : करीब 24 साल के मुरारी झा ने दरभंगा के एमएमटीएम कॉलेज से बीए साइकोलॉजी ऑनर्स की डिग्री हासिल की है लेकिन रुझान अभिनय की ओर था। पिता अग्निदेव चौधरी एक कॉलेज में कर्मचारी हैं, उनकी तमन्ना थी कि बेटा पढ़कर बड़ा अधिकारी बने, लेकिन मुरारी तो अभिनय की दुनिया में कदम बढ़ाना चाहते थे। करीब 10 साल पहले लल्लन झा के साथ जुड़े तो रंगमंच को ही अपना भविष्य बना लिया। पिता ने शुरू में समझाया लेकिन बेटे का रुझान देखकर उन्होंने भी हरी झंडी दे दी। अब सीता का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीतते हैं। अभिनय का यही शौक 16 साल के विपिन को भी मंच तक खींच लाया। वह यहां भारत माता का किरदार निभाते हैं।




साल में दो महीने के लिए देखते हैं घर का मुंह : कला परिषद के मालिक लल्लन झा समेत पूरी टीम साल के दस महीने अपने घरों से दूर रहती है। लल्लन बताते हैं कि देश के अलग अलग स्थानों पर जन्माष्टमी से लेकर रामनवमी तक लीलाओं समेत नाटकों का मंचन होता रहता है। ऐसे में अगस्त से अप्रैल-मई तक विभिन्न स्थानों पर घूमना ही होता रहता है। बताते हैं कि पहले असोम, नागालैंड, मेघालय आदि जगहों पर रामलीला करते थे। उसके बाद यूपी समेत बिहार, झारखंड में घूमते हैं। ऐसे में साल में केवल दो महीने अपने परिवार के साथ रहने वाले अब रामलीला के किरदार इनकी जिंदगी का हिस्सा हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed