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गोमिदनगला में बुखार से तीन लोगों की मौत
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 16 Aug 2016 11:53 PM IST
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गांव में करीब 20 लोग और भी हैं बुखार की चपेट में
सीएमओ ने परीक्षण को मौके पर भेजी डॉक्टरों की टीम
थाना क्षेत्र के गांव गोमिदनगला में एक अधेड़ समेत तीन लोगों की बुखार की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। दोनों लोग करीब एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। इसी गांव में करीब 20 लोग बुखार की चपेट में हैं। इससे ग्रामीणों में बुखार का डर नजर आने लगा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया है। साथ ही बुखार से पीड़ित लोगों के रक्त के नमूने लेकर जांच कराने की मांग की है।
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अधेड़ राजाराम की अस्पताल में मौत
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गोमिंद नगला के 50 वर्षीय राजाराम पुत्र दरबारी करीब एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे। सोमवार को वह अपनी पत्नी श्यामबेटी के साथ बुखार की दवा लेने के लिए बरेली गए थे। अस्पताल में पहुंचकर उन्होंने पर्चा बनवाया। इसके बाद अपने नंबर का इंतजार करने लगे। इसी दौरान इनकी हालत बिगड़ गई। इस दौरान डॉक्टर इमरजेंसी में ले गए, लेकिन तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया।
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वृद्धा चंपा देवी ने दम तोड़ा
गोमिदनगला की ही 60 वर्षीय चंपा देवी पत्नी नन्हे सिंह को एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित चल रही थीं। इनका इलाज झोलाछाप से चल रहा था। इलाज में कोई फायदा नहीं होने के बावजूद झोलाछाप दवाइयां चलाता रहा। इससे इनकी मौत रविवार रात को हो गई।
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बुखार की चपेट में आए किशोर की सांसे थमीं
गोमिदनगला के नन्हे के आठ वर्षीय पुत्र प्रशांत को तीन दिन से बुखार आ रहा था। घरवालों ने झोलाछाप से इलाज कराया गया। बाद में बदायूं के निजी चिकित्सक यहां पर इलाज के लिए भर्ती कराया। वहां पर प्रशांत ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घरवाले उसका शव गांव में ले गए।
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गांव के और भी 20 लोग बुखार की चपेट में
इसी गांव के शिवकुमार, नेमचंद्र, शिव देवी, अभिषेक, सुरेश, अरविंद, महेंद्र, रावेंद्र, सुधा, सूरजमुखी, खुशबू, रामबहादुर, रामबेटी, संतोष, ममता, टीकाराम, छंगेलाल, ज्ञानवती, दुर्वेश आदि तमाम लोग बीमार चल रहे हैं। इन बीमारों के परिवार वालों ने गांव में टीम बुलाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराए जाने की मांग की है।
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गोमिदनगला में बुखार की चपेट में कई लोगों के आने की सूचना मिलने पर डॉक्टरों की टीम को भेजा गया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में लगातर नजर रखी जाएगी, जिससे कि बुखार की चपेट में आने से अन्य लोगों को बचाया जा सके।
-डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ
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गोमिदनगला गांव में लगे गंदगी के अंबार
मूसाझाग। थाना क्षेत्र के गांव गोमिदनगला में एक साथ करीब 25 लोगों के बुखार में चपेट में आने की वजह को तलाश किया जाए, तो गांव में फैली गंदगी सारी हकीकत बयां कर देती है। गांव की गलियों में नाले और नालियां बह रही हैं। ऐसे में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल है। गांव में सफाई कर्मी के नहीं आने से कूड़े के भी अंबार लगे हुए हैं। गंदगी की वजह से फैले बुखार की चपेट में आने से गांव के तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग अब भी बुखार की चपेट में हैं। इसके पीछे मुख्य वजह गांव में भीषण गंदगी व्याप्त होना बताया जा रहा है।
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नौ दिन पहले लिए नमूनों की नहीं दी रिपोर्ट
मूसाझाग। थाना क्षेत्र के गांव बेला में बुखार एवं संक्रामक रोग फैलने पर वहां पर जिले से स्वास्थ्य विभाग की टीम गई थी। वहां पर सात अगस्त को स्वास्थ्य टीम ने मरीजों के 10 मरीजों के खून के नमूने लिए थे, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी वहां पर जांच रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। ऐसे में बुखार से पीड़ित लोग अंदाज से अपना इलाज डॉक्टरों से करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इस बारे में डॉ. कमरुद्दीन ने बताया कि रविवार और स्वतंत्रता दिवस का अ वकाश होने की वजह से स्लाइड रिपोर्ट नहीं मिल सकी, जिससे जांच रिपोर्ट मरीजों को वितरित नहीं की जा सकी।
सीएमओ ने परीक्षण को मौके पर भेजी डॉक्टरों की टीम
थाना क्षेत्र के गांव गोमिदनगला में एक अधेड़ समेत तीन लोगों की बुखार की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। दोनों लोग करीब एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। इसी गांव में करीब 20 लोग बुखार की चपेट में हैं। इससे ग्रामीणों में बुखार का डर नजर आने लगा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया है। साथ ही बुखार से पीड़ित लोगों के रक्त के नमूने लेकर जांच कराने की मांग की है।
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अधेड़ राजाराम की अस्पताल में मौत
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गोमिंद नगला के 50 वर्षीय राजाराम पुत्र दरबारी करीब एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे। सोमवार को वह अपनी पत्नी श्यामबेटी के साथ बुखार की दवा लेने के लिए बरेली गए थे। अस्पताल में पहुंचकर उन्होंने पर्चा बनवाया। इसके बाद अपने नंबर का इंतजार करने लगे। इसी दौरान इनकी हालत बिगड़ गई। इस दौरान डॉक्टर इमरजेंसी में ले गए, लेकिन तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया।
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वृद्धा चंपा देवी ने दम तोड़ा
गोमिदनगला की ही 60 वर्षीय चंपा देवी पत्नी नन्हे सिंह को एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित चल रही थीं। इनका इलाज झोलाछाप से चल रहा था। इलाज में कोई फायदा नहीं होने के बावजूद झोलाछाप दवाइयां चलाता रहा। इससे इनकी मौत रविवार रात को हो गई।
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बुखार की चपेट में आए किशोर की सांसे थमीं
गोमिदनगला के नन्हे के आठ वर्षीय पुत्र प्रशांत को तीन दिन से बुखार आ रहा था। घरवालों ने झोलाछाप से इलाज कराया गया। बाद में बदायूं के निजी चिकित्सक यहां पर इलाज के लिए भर्ती कराया। वहां पर प्रशांत ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घरवाले उसका शव गांव में ले गए।
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गांव के और भी 20 लोग बुखार की चपेट में
इसी गांव के शिवकुमार, नेमचंद्र, शिव देवी, अभिषेक, सुरेश, अरविंद, महेंद्र, रावेंद्र, सुधा, सूरजमुखी, खुशबू, रामबहादुर, रामबेटी, संतोष, ममता, टीकाराम, छंगेलाल, ज्ञानवती, दुर्वेश आदि तमाम लोग बीमार चल रहे हैं। इन बीमारों के परिवार वालों ने गांव में टीम बुलाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराए जाने की मांग की है।
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गोमिदनगला में बुखार की चपेट में कई लोगों के आने की सूचना मिलने पर डॉक्टरों की टीम को भेजा गया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में लगातर नजर रखी जाएगी, जिससे कि बुखार की चपेट में आने से अन्य लोगों को बचाया जा सके।
-डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ
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गोमिदनगला गांव में लगे गंदगी के अंबार
मूसाझाग। थाना क्षेत्र के गांव गोमिदनगला में एक साथ करीब 25 लोगों के बुखार में चपेट में आने की वजह को तलाश किया जाए, तो गांव में फैली गंदगी सारी हकीकत बयां कर देती है। गांव की गलियों में नाले और नालियां बह रही हैं। ऐसे में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल है। गांव में सफाई कर्मी के नहीं आने से कूड़े के भी अंबार लगे हुए हैं। गंदगी की वजह से फैले बुखार की चपेट में आने से गांव के तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग अब भी बुखार की चपेट में हैं। इसके पीछे मुख्य वजह गांव में भीषण गंदगी व्याप्त होना बताया जा रहा है।
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नौ दिन पहले लिए नमूनों की नहीं दी रिपोर्ट
मूसाझाग। थाना क्षेत्र के गांव बेला में बुखार एवं संक्रामक रोग फैलने पर वहां पर जिले से स्वास्थ्य विभाग की टीम गई थी। वहां पर सात अगस्त को स्वास्थ्य टीम ने मरीजों के 10 मरीजों के खून के नमूने लिए थे, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी वहां पर जांच रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। ऐसे में बुखार से पीड़ित लोग अंदाज से अपना इलाज डॉक्टरों से करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इस बारे में डॉ. कमरुद्दीन ने बताया कि रविवार और स्वतंत्रता दिवस का अ वकाश होने की वजह से स्लाइड रिपोर्ट नहीं मिल सकी, जिससे जांच रिपोर्ट मरीजों को वितरित नहीं की जा सकी।