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सभी बाधाओं को दूर करती है ईश्वर के प्रति आस्था
बिल्सी।
Updated Mon, 28 Sep 2015 12:18 AM IST
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नगर की माहेश्वरी धर्मशाला में श्रीराम-कृष्ण समिति के तत्वावधान में चल रही भगवान श्रीराम की कथा के पांचवें दिन परम संत शिरोमणि अयोध्यादास रामायणी ने ज्ञान और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में परमात्मा की प्राप्ति ज्ञान और वैराग्य के द्वारा ही संभव है। कहा कि ज्ञान और वैराग्य जन्म-जन्मान्तर तक मनुष्य का संस्कार बन कर पीछा करता है। यहीं कारण है कि भक्त ध्रुव को बचपन में ही ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति हो गई थी।
कथा वाचक ने कथा को अनंत रखते हुए कहा कि भक्त धु्रव की भक्ति बाल भक्ति थी, जिसे नारद की प्रेरणा से परमात्मा तक उपलब्धि करा दी थी। स्वामी ने हिरण्याकश्यप की कथा का वर्णन करते हुए भक्त प्रहलाद की आस्था का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदि आस्था और विश्वास दृढ़ हो तो संसार की कोई बाधा भगवान से साक्षात्कार होने में रुकावट नहीं बन सकती है। भक्त प्रहलाद में भगवान के प्रति सच्ची आस्था और विश्वास था जिसके बल पर उसके पिता द्वारा किए प्रहार हर बार खाली गए। उन्होंने कथा को सुंदर कांड की ओर मोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा से हर व्यक्ति का सामना होता है। यदि व्यक्ति राम नाम का आश्रय लेकर अपने उद्देश्य की ओर बढ़ता है को बाधाएं भी सहायता का रुप धारण कर लेती है। इसके बाद स्वामी ने अन्य प्रसंगों का भी विस्तार वर्णन किया।
इस अवसर पर नरेंद्र गरल, डॉ. राजाबाबू वार्ष्णेय, वाचस्पति दीक्षित, दयाचंद्र, नवरतन वार्ष्णेय, सत्यदेव शर्मा, गोरेलाल व्यास, सतीश चंद्र असावा, लोकेश बाबू, आशीष वशिष्ठ, नीरज माहेश्वरी, मनोज वार्ष्णेय, सुवीन माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश चंद्र वार्ष्णेय आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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कथा वाचक ने कथा को अनंत रखते हुए कहा कि भक्त धु्रव की भक्ति बाल भक्ति थी, जिसे नारद की प्रेरणा से परमात्मा तक उपलब्धि करा दी थी। स्वामी ने हिरण्याकश्यप की कथा का वर्णन करते हुए भक्त प्रहलाद की आस्था का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदि आस्था और विश्वास दृढ़ हो तो संसार की कोई बाधा भगवान से साक्षात्कार होने में रुकावट नहीं बन सकती है। भक्त प्रहलाद में भगवान के प्रति सच्ची आस्था और विश्वास था जिसके बल पर उसके पिता द्वारा किए प्रहार हर बार खाली गए। उन्होंने कथा को सुंदर कांड की ओर मोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा से हर व्यक्ति का सामना होता है। यदि व्यक्ति राम नाम का आश्रय लेकर अपने उद्देश्य की ओर बढ़ता है को बाधाएं भी सहायता का रुप धारण कर लेती है। इसके बाद स्वामी ने अन्य प्रसंगों का भी विस्तार वर्णन किया।
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इस अवसर पर नरेंद्र गरल, डॉ. राजाबाबू वार्ष्णेय, वाचस्पति दीक्षित, दयाचंद्र, नवरतन वार्ष्णेय, सत्यदेव शर्मा, गोरेलाल व्यास, सतीश चंद्र असावा, लोकेश बाबू, आशीष वशिष्ठ, नीरज माहेश्वरी, मनोज वार्ष्णेय, सुवीन माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश चंद्र वार्ष्णेय आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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