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Budaun News: विकास विभाग के चार पद रिक्त, एक अधिकारी के भरोसे पूरा तंत्र
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बदायूं। जिले के विकास विभाग में लंबे समय से तीन प्रमुख पदों पर नियमित अधिकारियों की तैनाती न होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। जिला विकास अधिकारी (डीडीओ), डीसीएनआरएलएम (उपायुक्त स्वत: रोजगार) व परियोजना निदेशक (पीडी), जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) जैसे महत्वपूर्ण पद पिछले करीब छह माह से रिक्त चल रहे हैं। इन चारों पदों का कार्यभार एक ही अधिकारी, डीसी मनरेगा अखिलेश चौबे, के पास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से योजनाओं की मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण, वित्तीय अनुश्रवण और जनसुनवाई जैसे कार्य प्रभावित होने की चर्चा है।
हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जनपद में आयोजित समीक्षा बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। बैठक में शीघ्र तैनाती का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। (संवाद)
प्रभावित हो रही विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग
जिला विकास अधिकारी का पद जनपद में समस्त विकास योजनाओं के समन्वय और निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं मनरेगा जैसी विशाल वित्तीय योजना के संचालन, भुगतान, कार्य स्वीकृति और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा पर होती है। परियोजना निदेशक डीआरडीए ग्रामीण विकास से संबंधित परियोजनाओं का क्रियान्वयन देखते हैं, जबकि एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के कार्यक्रम संचालित होते हैं। चारों पदों का कार्यभार एक ही अधिकारी के पास होने से योजनाओं की नियमित समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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जनता को भी हो रही परेशानी
विभाग में चर्चा है कि चार-चार चार्ज होने के कारण संबंधित अधिकारी आमजन और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। विकास भवन में फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों को अक्सर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के निस्तारण में विलंब की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विकास विभाग में जिन पदों पर अधिकारियों की तैनाती नहीं है उनके रिक्त पद भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अफसरों की तैनाती हो जाएगी। - अवनीश राय, डीएम
पूर्व जिला विकास अधिकारी के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद भी होगी जांच
बदायूं। जिले में तैनाती के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों में घिरे तत्कालीन जिला विकास अधिकारी अजय प्रताप सिंह के विरुद्ध शासन ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अनुशासनिक कार्यवाही जारी रखने के आदेश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन के ग्राम्य विकास अनुभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इनके खिलाफ मनरेगा योजनांतर्गत 12 विकास खंडों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को यूएएन नंबर जारी करने में अनियमितता बरतने का आरोप है। इससे शासकीय धनराशि की क्षति, शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही, कूटरचना का प्रयास, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निरीक्षण करने तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने के आरोप हैं।
इन आरोपों के संबंध में शासन के पूर्व आदेश दिनांक 25 सितंबर 2025 को अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ की गई थी। प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया था। इस बीच अजय प्रताप सिंह 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि उनके सेवानिवृत्त होने के बावजूद प्रचलित अनुशासनिक कार्यवाही को जारी रखा जाएगा। उप सचिव चंद्रिका प्रसाद द्वारा 6 फरवरी 2026 को इसका आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जनपद में आयोजित समीक्षा बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। बैठक में शीघ्र तैनाती का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। (संवाद)
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प्रभावित हो रही विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग
जिला विकास अधिकारी का पद जनपद में समस्त विकास योजनाओं के समन्वय और निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं मनरेगा जैसी विशाल वित्तीय योजना के संचालन, भुगतान, कार्य स्वीकृति और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा पर होती है। परियोजना निदेशक डीआरडीए ग्रामीण विकास से संबंधित परियोजनाओं का क्रियान्वयन देखते हैं, जबकि एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के कार्यक्रम संचालित होते हैं। चारों पदों का कार्यभार एक ही अधिकारी के पास होने से योजनाओं की नियमित समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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जनता को भी हो रही परेशानी
विभाग में चर्चा है कि चार-चार चार्ज होने के कारण संबंधित अधिकारी आमजन और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। विकास भवन में फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों को अक्सर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के निस्तारण में विलंब की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विकास विभाग में जिन पदों पर अधिकारियों की तैनाती नहीं है उनके रिक्त पद भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अफसरों की तैनाती हो जाएगी। - अवनीश राय, डीएम
पूर्व जिला विकास अधिकारी के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद भी होगी जांच
बदायूं। जिले में तैनाती के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों में घिरे तत्कालीन जिला विकास अधिकारी अजय प्रताप सिंह के विरुद्ध शासन ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अनुशासनिक कार्यवाही जारी रखने के आदेश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन के ग्राम्य विकास अनुभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इनके खिलाफ मनरेगा योजनांतर्गत 12 विकास खंडों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को यूएएन नंबर जारी करने में अनियमितता बरतने का आरोप है। इससे शासकीय धनराशि की क्षति, शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही, कूटरचना का प्रयास, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निरीक्षण करने तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने के आरोप हैं।
इन आरोपों के संबंध में शासन के पूर्व आदेश दिनांक 25 सितंबर 2025 को अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ की गई थी। प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया था। इस बीच अजय प्रताप सिंह 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि उनके सेवानिवृत्त होने के बावजूद प्रचलित अनुशासनिक कार्यवाही को जारी रखा जाएगा। उप सचिव चंद्रिका प्रसाद द्वारा 6 फरवरी 2026 को इसका आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संवाद