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Budaun News: मुकदमेबाजी की रंजिश में हुई हत्या में पिता व दो पुत्रों सहित चार को उम्रकैद
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बदायूं। कोर्ट ने मुकदमेबाजी की रंजिश में कनपटी से तमंचा सटाकर गोली मारकर विष्णुकांत शर्मा की हत्या करने के मामले में चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश विकास सिंह की कोर्ट ने दोषियों में पिता दिनेश कुमार व दो पुत्रों विशेष कुमार व देवेश कुमार निवासी ग्राम सोरहा, थाना उघैती व रामचरन शर्मा निवासी ग्राम कुंदनपुर, थाना इस्लामनगर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
ग्राम सोरहा निवासी सुनील कुमार शर्मा ने उघैती थाने में तहरीर देकर बताया था कि 24 मई 2017 की रात करीब आठ बजे उसके पिता विष्णुकांत शर्मा (75) घेर के दरवाजे पर चारपाई पर बैठे हुए थे। पुरानी मुकदमेबाजी की रंजिश में गांव के ही विशेष कुमार, देवेश कुमार, दिनेश चंद्र शर्मा और रामचरन शर्मा निवासी कुंदनपुर वहां पहुंचे। उनके हाथों में नाजायज असलहे थे।
सभी ने एकराय होकर कहा कि आज मौका है, मार दो साले को। इस पर विशेष कुमार ने कनपटी से सटाकर तमंचे से विष्णुकांत शर्मा को गोली मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मेरी पत्नी कुसुम देवी व गांव के बाबूराम, कैलाश आदि कई लोग मौजूद थे। सभी ने बल्ब की रोशनी में घटना देखी।
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पुलिस ने चारों अभियुक्तों के विरुद्ध हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना करने के बाद चारों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू की। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने कोर्ट में बताया था कि गोली से मृतक की बोन टूट गई थी। मस्तिष्क फट गया था। गोली मारने पर सदमा और रक्तस्राव से मौत होने की बात सामने आई थी।
कोर्ट ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह स्पष्ट होता है कि अभियुक्तगणों की ओर से किया अपराध अत्यंत ही गंभीर है। कोर्ट ने विशेष कुमार, देवेश कुमार, दिनेश चंद्र शर्मा व रामचरन शर्मा को दोषी करार देते हुए हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दोषसिद्ध अभियुक्तों से वसूल की जाने वाली संपूर्ण अर्थदंड की धनराशि मुकदमा वादी सुनील कुमार शर्मा को प्रतिकर के रूप में अपील की अवधि के बाद दे दी जाए। कोर्ट ने केस के आदेश की कॉपी जिला मजिस्ट्रेट को भी भेजने का आदेश दिया।
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मृतक के बेटे ने कोर्ट में दी थी यह गवाही
सुनील कुमार ने कोर्ट में गवाही दी थी कि अभियुक्त रामचरन मेरी बुआ संतोष का जेठ है। रामचरन तीनों अभियुक्तों के यहां आता-जाता रहता था। कोर्ट में सुनील ने बताया कि इस घटना से पहले वह गुड़गांव में नौकरी करने गया था। वहां सिक्योरिटी गार्ड (सुरक्षाकर्मी) की नौकरी करता था। जिस गांव का अभियुक्त रामचरन है, उसी गांव में उसकी ससुराल है। रामचरन मेरी ससुराल के पास में ही रहता है।
30 मई 2014 की बात है, जमीन का बैनामा संतोष से आरोपी विशेष की पत्नी मंजू ने कराया था। मेरी जानकारी में यह नहीं था कि इसी जमीन को लेकर एसडीएम बिसौली के यहां फौजदारी का केस चल रहा है। उस दौरान उसके पिता की शिकायत पर हुकुमचंद की जमीन की कुर्की की गई थी। तभी हुकुमचंद ने हत्या की कोशिश में उसके पिता विष्णु कांत शर्मा, सुनील व अन्य पर दर्ज कराई थी। इसी मुकदमे के चलते हुकुमचंद की लड़की लक्ष्मी नरायन का कत्ल हुआ था। उस कत्ल में मेरे पिता, चाचा और अन्य आरोपी थे। इस मुकदमे में चाचा चंद्रकांत की जेल में मौत हुई थी और पिता, मेरे व अन्य को कोर्ट से सजा हुई थी। कई अन्य मामले भी एक दूसरे पर दर्ज कराए गए थे।
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ग्राम सोरहा निवासी सुनील कुमार शर्मा ने उघैती थाने में तहरीर देकर बताया था कि 24 मई 2017 की रात करीब आठ बजे उसके पिता विष्णुकांत शर्मा (75) घेर के दरवाजे पर चारपाई पर बैठे हुए थे। पुरानी मुकदमेबाजी की रंजिश में गांव के ही विशेष कुमार, देवेश कुमार, दिनेश चंद्र शर्मा और रामचरन शर्मा निवासी कुंदनपुर वहां पहुंचे। उनके हाथों में नाजायज असलहे थे।
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सभी ने एकराय होकर कहा कि आज मौका है, मार दो साले को। इस पर विशेष कुमार ने कनपटी से सटाकर तमंचे से विष्णुकांत शर्मा को गोली मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मेरी पत्नी कुसुम देवी व गांव के बाबूराम, कैलाश आदि कई लोग मौजूद थे। सभी ने बल्ब की रोशनी में घटना देखी।
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पुलिस ने चारों अभियुक्तों के विरुद्ध हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना करने के बाद चारों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू की। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने कोर्ट में बताया था कि गोली से मृतक की बोन टूट गई थी। मस्तिष्क फट गया था। गोली मारने पर सदमा और रक्तस्राव से मौत होने की बात सामने आई थी।
कोर्ट ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह स्पष्ट होता है कि अभियुक्तगणों की ओर से किया अपराध अत्यंत ही गंभीर है। कोर्ट ने विशेष कुमार, देवेश कुमार, दिनेश चंद्र शर्मा व रामचरन शर्मा को दोषी करार देते हुए हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दोषसिद्ध अभियुक्तों से वसूल की जाने वाली संपूर्ण अर्थदंड की धनराशि मुकदमा वादी सुनील कुमार शर्मा को प्रतिकर के रूप में अपील की अवधि के बाद दे दी जाए। कोर्ट ने केस के आदेश की कॉपी जिला मजिस्ट्रेट को भी भेजने का आदेश दिया।
मृतक के बेटे ने कोर्ट में दी थी यह गवाही
सुनील कुमार ने कोर्ट में गवाही दी थी कि अभियुक्त रामचरन मेरी बुआ संतोष का जेठ है। रामचरन तीनों अभियुक्तों के यहां आता-जाता रहता था। कोर्ट में सुनील ने बताया कि इस घटना से पहले वह गुड़गांव में नौकरी करने गया था। वहां सिक्योरिटी गार्ड (सुरक्षाकर्मी) की नौकरी करता था। जिस गांव का अभियुक्त रामचरन है, उसी गांव में उसकी ससुराल है। रामचरन मेरी ससुराल के पास में ही रहता है।
30 मई 2014 की बात है, जमीन का बैनामा संतोष से आरोपी विशेष की पत्नी मंजू ने कराया था। मेरी जानकारी में यह नहीं था कि इसी जमीन को लेकर एसडीएम बिसौली के यहां फौजदारी का केस चल रहा है। उस दौरान उसके पिता की शिकायत पर हुकुमचंद की जमीन की कुर्की की गई थी। तभी हुकुमचंद ने हत्या की कोशिश में उसके पिता विष्णु कांत शर्मा, सुनील व अन्य पर दर्ज कराई थी। इसी मुकदमे के चलते हुकुमचंद की लड़की लक्ष्मी नरायन का कत्ल हुआ था। उस कत्ल में मेरे पिता, चाचा और अन्य आरोपी थे। इस मुकदमे में चाचा चंद्रकांत की जेल में मौत हुई थी और पिता, मेरे व अन्य को कोर्ट से सजा हुई थी। कई अन्य मामले भी एक दूसरे पर दर्ज कराए गए थे।