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जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कटान तेज
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कटान रोकने के लिए गंगा के तटबंध पर लगाई गईं बालू भरी बोरियां। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होने के कारण कई स्थानों पर कटान होने लगा है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से सभी प्रबंध किए जा रहे हैं। अभी ज्यादा खतरे जैसी स्थिति नहीं है। इस बीच बृहस्पतिवार को गंगा में हरिद्वार से 47803, बिजनौर से 24749 और नरौरा से 14345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हरिद्वार से छोड़ा गया पानी चौबीस घंटे में कछला तक पहुंच जाएगा।
बृहस्पतिवार को कछला में मीटरगेज पर गंगा का जल स्तर 160.70 मीटर रिकॉर्ड किया गया। बुधवार को जलस्तर खतरे के निशान पर 160.11 मीटर था। मीटरगेज पर खतरे का निशान 165.20 मीटर है। गंगा के जलस्तर में इन दिनों लगभग रोज उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में तटवर्ती निचले इलाकों में कटान हो रहा है। भुंडी, गंगा-महावा, चंदनपुर-हुसैनपुर, उसहैत और जोरी नगला तटबंधों पर फिलहाल हालात सामान्य हैं। तटबंधों पर कटान रोकने के लिए बालू भरी बोरियां लगाने का काम किया जा रहा है।
अनुमान है कि 15 जुलाई के बाद गंगा में उफान आना शुरू हो जाएगा। दरअसल, मानसून सक्रिय हो गया है। इन दिनों मैदानी इलाकों में ज्यादा बारिश नहीं हो रही है।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 15 जून के बाद मैदानी इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। भारी बारिश के बाद गंगा और रामगंगा के साथ सहायक नदियों में भी उफान आ जाता है। सबसे ज्यादा संख्या दातागंज और सहसवान तहसील के तटवर्ती गांवों में होती है। सदर तहसील के कछला, कादरचौक इलाकों में भी बाढ़ के कारण खतरा पैदा हो जाता है।
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गंगा के जल स्तर में मामूली वृद्धि हुई है। हरिद्वार से 47803, बिजनौर से 24749 और नरौरा से गंगा में बृहस्पतिवार को 14345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बृहस्पतिवार को कछला में मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 160.70 रिकार्ड किया गया। अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन 15 जुलाई के बाद गंगा में उफान आने की आशंका है।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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बृहस्पतिवार को कछला में मीटरगेज पर गंगा का जल स्तर 160.70 मीटर रिकॉर्ड किया गया। बुधवार को जलस्तर खतरे के निशान पर 160.11 मीटर था। मीटरगेज पर खतरे का निशान 165.20 मीटर है। गंगा के जलस्तर में इन दिनों लगभग रोज उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में तटवर्ती निचले इलाकों में कटान हो रहा है। भुंडी, गंगा-महावा, चंदनपुर-हुसैनपुर, उसहैत और जोरी नगला तटबंधों पर फिलहाल हालात सामान्य हैं। तटबंधों पर कटान रोकने के लिए बालू भरी बोरियां लगाने का काम किया जा रहा है।
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अनुमान है कि 15 जुलाई के बाद गंगा में उफान आना शुरू हो जाएगा। दरअसल, मानसून सक्रिय हो गया है। इन दिनों मैदानी इलाकों में ज्यादा बारिश नहीं हो रही है।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 15 जून के बाद मैदानी इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। भारी बारिश के बाद गंगा और रामगंगा के साथ सहायक नदियों में भी उफान आ जाता है। सबसे ज्यादा संख्या दातागंज और सहसवान तहसील के तटवर्ती गांवों में होती है। सदर तहसील के कछला, कादरचौक इलाकों में भी बाढ़ के कारण खतरा पैदा हो जाता है।
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गंगा के जल स्तर में मामूली वृद्धि हुई है। हरिद्वार से 47803, बिजनौर से 24749 और नरौरा से गंगा में बृहस्पतिवार को 14345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बृहस्पतिवार को कछला में मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 160.70 रिकार्ड किया गया। अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन 15 जुलाई के बाद गंगा में उफान आने की आशंका है।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड