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सिमट रहे जंगल, सूख रही नदियों की अविरल धारा
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सहसवान में सूखी अरिल नदी। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। बड़े शहरों में ही नहीं छोटे शहरों में भी पर्यावरण प्रदूषण सिर्फ इंसानों पर ही नहीं पृथ्वी पर रह रहे सभी जीवों के लिए ख़तरा बन गया है। यही वजह है कि कई जीव-जंतु विलुप्त हो रहे हैं। जीवन को खतरा पैदा हो रहा है, सांस के साथ कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियां लोगों को चपेट में ले रही हैं। जंगल सिमट रहे हैं और नदियों की अविरल धारा सूख रही है। पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, इसके बाद भी लोग पर्यावरण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे।
पर्यावरण के लिहाज से नदियां और जंगल काफी अहम होते हैं। जिले में गंगा 115 और रामगंगा करीब 60 किमी की दूरी तय करती हैं। इसके अलावा सहायक नदियों में महावा, भैंसोर, अरिल और सोत नदियां भी शामिल हैं। इन सहायक नदियों की अविरल धारा करीब एक दशक पहले ही सूख चुकी है। अब यह नदियां अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं। कई स्थानों पर तो नदियों के फाट तक गायब हो गए हैं। जंगल की बात करें तो हर वर्ष वन महोत्सव मनाया जाता है। साल 2021 में जिले में 44 लाख से ज्यादा पौधे रोपे गए थे। इस वर्ष भी जिले को करीब 55 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। वन विभाग समेत 20 अन्य विभाग भी पौधरोपण करेंगे।
गौर करने वाली बात यह है कि हर वर्ष रोपे जाने वाले पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूख जाते हैं। वन विभाग तो रोपे गए पौधों की देखभाल भी करता है, जबकि अन्य विभागों के रोपे गए पौधों में महज तीन-चार फीसदी ही पेड़ बन पाते हैं। हां, कुछ जगह जरूर हरियाली नजर आती है।
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पौधों की जियो टैगिंग से निगरानी
वन महोत्सव के दौरान जिले में करीब 55 लाख पौधे रोपे जाने हैं। इनमें वन विभाग 15.76 लाख पौधे रोपेगा। बाकी का पौधरोपण विकास, शिक्षा, जिला पंचायत, समाज कल्याण विभाग आदि करेंगे। विभागों के लिए पौधे रोपने का लक्ष्य तय कर दिया गया है। पौधे रोपने के साथ उसकी जियो टैगिंग की जाएगी। इसके जरिये पौधे की निगरानी की जाएगी। जैसे ही इस एप के माध्यम से पौधरोपण स्थल का फोटो लिया जाएगा अक्षांतर और देशांतर के साथ उसकी लोकेशन आ जाएगी। पौधा किसी तरह से सूखने के कगार पर पहुंच रहा है तो इसकी देखभाल के लिए व्यवस्था की जा सकेगी।
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झीलें सूखीं, विलुप्त हो गए वेटलैंड
प्रवासी पक्षियों की पसंद वेटलैंड होते हैं। जिले में अब ज्यादातर वेटलैंड विलुप्त हो गए हैं। कादरचौक की नूरपुर और सहसवान की सरसोता झीलें भी सूख गईं हैं। वेटलैंड सूखने के कारण सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का बदायूं में आना कम हो गया है। गंगा और रामगंगा के कुछ इलाकों में ही गिने-चुने वेटलैंड बचे हैं। इसका असर जैव विविधता पर दिख रहा है। भूजल स्तर में गिरावट हो रही है। शहर से सटकर बहने वाली सोत नदी और बिसौली, दातागंज में अरिल नदी के वेटलैंड कभी प्रवासी पक्षियों का ठिकाना होते थे, लेकिन दोनों नदियां अब सूख चुकी हैं।
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बदायूं यूथ करेगा लकड़ी माफिया की निगरानी
बदायूं। बदायूं यूथ इस बार विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण के साथ-साथ जिले के लकड़ी माफिया के विरोध में भी अभियान चलाएगा। जिलाध्यक्ष जिया अंसारी ने बताया कि इस दौरान संगठन के कार्यकर्ता जिले भर में सक्रिय रहेंगे और जहां जहां वृक्ष काटे जाएंगे वहां विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद डीएफओ व जिला प्रशासन के सहयोग से वृक्ष सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी।
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जिले को इस वर्ष 55 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य मिला हे। वन विभाग 15 लाख से ज्यादा पौधे रोपेगा। इसके अलावा अन्य विभागों को लक्ष्य दिया गया है। वन विभाग की ओर से जो पौधे रोपे जाते हैं उनका पूरा ख्याल भी रखा जाता है। यह बात सही है कि अन्य विभाग पौधों की देखभाल नहीं करते।
- अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
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पर्यावरण के लिहाज से नदियां और जंगल काफी अहम होते हैं। जिले में गंगा 115 और रामगंगा करीब 60 किमी की दूरी तय करती हैं। इसके अलावा सहायक नदियों में महावा, भैंसोर, अरिल और सोत नदियां भी शामिल हैं। इन सहायक नदियों की अविरल धारा करीब एक दशक पहले ही सूख चुकी है। अब यह नदियां अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं। कई स्थानों पर तो नदियों के फाट तक गायब हो गए हैं। जंगल की बात करें तो हर वर्ष वन महोत्सव मनाया जाता है। साल 2021 में जिले में 44 लाख से ज्यादा पौधे रोपे गए थे। इस वर्ष भी जिले को करीब 55 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। वन विभाग समेत 20 अन्य विभाग भी पौधरोपण करेंगे।
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गौर करने वाली बात यह है कि हर वर्ष रोपे जाने वाले पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूख जाते हैं। वन विभाग तो रोपे गए पौधों की देखभाल भी करता है, जबकि अन्य विभागों के रोपे गए पौधों में महज तीन-चार फीसदी ही पेड़ बन पाते हैं। हां, कुछ जगह जरूर हरियाली नजर आती है।
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पौधों की जियो टैगिंग से निगरानी
वन महोत्सव के दौरान जिले में करीब 55 लाख पौधे रोपे जाने हैं। इनमें वन विभाग 15.76 लाख पौधे रोपेगा। बाकी का पौधरोपण विकास, शिक्षा, जिला पंचायत, समाज कल्याण विभाग आदि करेंगे। विभागों के लिए पौधे रोपने का लक्ष्य तय कर दिया गया है। पौधे रोपने के साथ उसकी जियो टैगिंग की जाएगी। इसके जरिये पौधे की निगरानी की जाएगी। जैसे ही इस एप के माध्यम से पौधरोपण स्थल का फोटो लिया जाएगा अक्षांतर और देशांतर के साथ उसकी लोकेशन आ जाएगी। पौधा किसी तरह से सूखने के कगार पर पहुंच रहा है तो इसकी देखभाल के लिए व्यवस्था की जा सकेगी।
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झीलें सूखीं, विलुप्त हो गए वेटलैंड
प्रवासी पक्षियों की पसंद वेटलैंड होते हैं। जिले में अब ज्यादातर वेटलैंड विलुप्त हो गए हैं। कादरचौक की नूरपुर और सहसवान की सरसोता झीलें भी सूख गईं हैं। वेटलैंड सूखने के कारण सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का बदायूं में आना कम हो गया है। गंगा और रामगंगा के कुछ इलाकों में ही गिने-चुने वेटलैंड बचे हैं। इसका असर जैव विविधता पर दिख रहा है। भूजल स्तर में गिरावट हो रही है। शहर से सटकर बहने वाली सोत नदी और बिसौली, दातागंज में अरिल नदी के वेटलैंड कभी प्रवासी पक्षियों का ठिकाना होते थे, लेकिन दोनों नदियां अब सूख चुकी हैं।
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बदायूं यूथ करेगा लकड़ी माफिया की निगरानी
बदायूं। बदायूं यूथ इस बार विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण के साथ-साथ जिले के लकड़ी माफिया के विरोध में भी अभियान चलाएगा। जिलाध्यक्ष जिया अंसारी ने बताया कि इस दौरान संगठन के कार्यकर्ता जिले भर में सक्रिय रहेंगे और जहां जहां वृक्ष काटे जाएंगे वहां विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद डीएफओ व जिला प्रशासन के सहयोग से वृक्ष सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी।
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जिले को इस वर्ष 55 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य मिला हे। वन विभाग 15 लाख से ज्यादा पौधे रोपेगा। इसके अलावा अन्य विभागों को लक्ष्य दिया गया है। वन विभाग की ओर से जो पौधे रोपे जाते हैं उनका पूरा ख्याल भी रखा जाता है। यह बात सही है कि अन्य विभाग पौधों की देखभाल नहीं करते।
- अशोक कुमार सिंह, डीएफओ