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Budaun News: दातागंज रोड पर डग्गामारी हावी, बदायूं डिपो का राजस्व प्रभावित
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दातागंज रोडवेज बस स्टैंड से सवारियां ढोती प्राइवेट बस। संवाद
दातागंज। दातागंज रोड पर डग्गामारी हावी है, यही कारण है कि परिवहन निगम इस मार्ग पर पहले की भांति आमदनी नहीं ले पा रहा है। वहीं क्षेत्र की सवारियाें को डग्गामार वाहनों के भरोसे आवागमन करना पड़ रहा है।
तीन दशक पीछे जाएं तो दातागंज और बदायूं जिला मुख्यालय के बीच हर 15 मिनट पर रोडवेज बसें थीं। परिवहन निगम 12 रोडवेज बसें तो 42 अनुबंधित बसें, कुल 54 बसें संचालित करता था। उस समय परिवहन निगम को दातागंज रोड आमदनी का बड़ा स्रोत था। अब परिवहन निगम की ढिलाई होते ही इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों की भरमार है।
यही नहीं बदायूं-उसहैत-म्याऊं-डहरपुर मार्ग के परमिट की प्राइवेट बसें, डहरपुर होते हुए बदायूं और दातागंज के बीच दौड़ाई जा रहीं हैं। इनकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है। ऐसी करीब आधा दर्जन से अधिक बसें हैं जो इस रोड से अधिक सवारियां निकलने के लालच में इस रोड पर आ गईं हैं।
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रोडवेज बसों की मौजूदा सेवा में 20 प्रतिशत कम किराए वाली एक बस चल रही है, जिसका कोई समय निर्धारित नहीं है। इसके अलावा तीन बसें और आती हैं। वे बदायूं से दातागंज आकर दिल्ली को जाती हैं। बदायूं जिला मुख्यालय पर रोडवेज बस अड्डे पर न छोड़कर बदायूं में भामाशाह चौराहे और कचहरी लालपुल पर सवारियों को छोड़कर दिल्ली निकल जाती हैं। शहर में अंदर जाने के लिए यहां के सवारियां प्राइवेट बसें या डग्गामार बसों का सहारा लेती हैं। चलती तो और भी डिपो की बसें हैं लेकिन ये सभी बाइपास से सवारियां चढ़ाकर और उतारकर चली जाती हैं। तहसील मुख्यालय को इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
बदायूं रोड पर डग्गामार वाहनों से ज्यादा होते हैं हादसे
बदायूं और दातागंज के बीच जब से डग्गामार वाहनों की संख्या बढ़ी है तब से दुर्घटनाएं भी बढ़ गईं है। इसका बड़ा कारण इन वाहनों का तेज गति से चलना है। हाल ही में डहर पुल के पास एक प्राइवेट बस तालाब में गिर गई थी। हादसे में एक महिला की मौत हो गई थी। तब डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुंचे थे। उस वक्त यह जाहिर नहीं होने दिया गया था कि क्षतिग्रस्त वाहन का उस मार्ग का परमिट तक नहीं है। इसी तरह चार डबल डेकर बसें भी यहां से पंजाब और हरियाणा के लिए चलाई जा रहीं हैं। इन पर भी किसी की निगरानी नहीं है।
दातागंज रोड से बदायूं डिपो को थोड़ा लाभ हो रहा है। अगर आवश्यकता समझी जाएगी तो और बसें लगाई जाएंगी। दातागंज रोड पर अन्य डिपो की दर्जनभर बसें संचालित हैं। -राजेश पाठक, एआरएम, बदायूं डिपो
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तीन दशक पीछे जाएं तो दातागंज और बदायूं जिला मुख्यालय के बीच हर 15 मिनट पर रोडवेज बसें थीं। परिवहन निगम 12 रोडवेज बसें तो 42 अनुबंधित बसें, कुल 54 बसें संचालित करता था। उस समय परिवहन निगम को दातागंज रोड आमदनी का बड़ा स्रोत था। अब परिवहन निगम की ढिलाई होते ही इस मार्ग पर डग्गामार वाहनों की भरमार है।
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यही नहीं बदायूं-उसहैत-म्याऊं-डहरपुर मार्ग के परमिट की प्राइवेट बसें, डहरपुर होते हुए बदायूं और दातागंज के बीच दौड़ाई जा रहीं हैं। इनकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है। ऐसी करीब आधा दर्जन से अधिक बसें हैं जो इस रोड से अधिक सवारियां निकलने के लालच में इस रोड पर आ गईं हैं।
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रोडवेज बसों की मौजूदा सेवा में 20 प्रतिशत कम किराए वाली एक बस चल रही है, जिसका कोई समय निर्धारित नहीं है। इसके अलावा तीन बसें और आती हैं। वे बदायूं से दातागंज आकर दिल्ली को जाती हैं। बदायूं जिला मुख्यालय पर रोडवेज बस अड्डे पर न छोड़कर बदायूं में भामाशाह चौराहे और कचहरी लालपुल पर सवारियों को छोड़कर दिल्ली निकल जाती हैं। शहर में अंदर जाने के लिए यहां के सवारियां प्राइवेट बसें या डग्गामार बसों का सहारा लेती हैं। चलती तो और भी डिपो की बसें हैं लेकिन ये सभी बाइपास से सवारियां चढ़ाकर और उतारकर चली जाती हैं। तहसील मुख्यालय को इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
बदायूं रोड पर डग्गामार वाहनों से ज्यादा होते हैं हादसे
बदायूं और दातागंज के बीच जब से डग्गामार वाहनों की संख्या बढ़ी है तब से दुर्घटनाएं भी बढ़ गईं है। इसका बड़ा कारण इन वाहनों का तेज गति से चलना है। हाल ही में डहर पुल के पास एक प्राइवेट बस तालाब में गिर गई थी। हादसे में एक महिला की मौत हो गई थी। तब डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुंचे थे। उस वक्त यह जाहिर नहीं होने दिया गया था कि क्षतिग्रस्त वाहन का उस मार्ग का परमिट तक नहीं है। इसी तरह चार डबल डेकर बसें भी यहां से पंजाब और हरियाणा के लिए चलाई जा रहीं हैं। इन पर भी किसी की निगरानी नहीं है।
दातागंज रोड से बदायूं डिपो को थोड़ा लाभ हो रहा है। अगर आवश्यकता समझी जाएगी तो और बसें लगाई जाएंगी। दातागंज रोड पर अन्य डिपो की दर्जनभर बसें संचालित हैं। -राजेश पाठक, एआरएम, बदायूं डिपो