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तिकड़ी में फंसा राहत चेक घोटाला

Tue, 09 Aug 2016 11:53 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Tue, 09 Aug 2016 11:53 PM IST
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विवेचक भी कर चुके ईओडब्ल्यू को जांच ट्रांसफार्मर की सिफारिश
 जिले की बिल्सी तहसील में हुए करोड़ों के चेक घोटाले का खेल तहसील प्रशासन, बैंकों और शातिरों की तिकड़ी में फंसकर रह गया है। तहसीलदार बिल्सी द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद इसकी जांच जिस पुलिस अधिकारी को दी गई है। उसने भी हाथ खड़े कर दिए हैं और जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) को दिलाए जाने की सिफारिश कप्तान से की है। इधर, डीएम सीपी त्रिपाठी द्वारा जिला स्तर की जांच कमेटी बनाकर सात दिनों में जांच कराए जाने की समय सीमा निर्धारित की थी। इस टीम में शामिल अधिकारी समय सीमा निकल जाने के बाद भी जांच नहीं कर सके हैं।
बिल्सी के तहसील का करोड़ों का राहत चेक घोटाला उलझाऊ होता जा रहा है। डीएम त्रिपाठी ने एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव, एडीएम वित्त राजेंद्र प्रसाद यादव और वरिष्ठ कोषाधिकारी प्रवीण त्रिपाठी को इस प्रकरण में पखवाड़े पूर्व जांच सौंपी थी। इसमें एक सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन जांच टीम समय सीमा में रिपोर्ट नहीं दे पाई है। बिल्सी थाने के जांच अधिकारी एसआई स्वर्ण सिंह इसमें उलझे, तो उन्होंने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) को केस रेफर करने की कप्तान से सिफारिश कर डाली। जांच के साथ तहसील के अधिकारियों के निर्देशों पर उन्होंने घपले का धन जमा कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी। इसके लिए शपथपत्र भी लिए गए। इस प्रकरण में तहसील के अधिकारियों ने अपने को सुरक्षित करना वरीयता में रखा है। यही वजह है कि पुलिस जांच अधिकारी ने उन लोगों के शपथपत्र भी लिए हैं। जिन्होंने धन जमाकर अपने को बचाने का प्रयास किया है। राजनीतिक दबाव कहें या पुलिस की शिथिलता, तहसील का सबसे बड़ा राहत घोटाला उलझता जा रहा है। 
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तमाम सवाल हैं अनसुलझे
बदायूं। बिल्सी तहसील में पिछले दिनों हुए सूखा राहत का घोटाला अभी भी तमाम सवाल समेटे है। इस घोटाले में जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों को बचाने के प्रयास जांच के दौरान भी जारी रहे हैं। हालांकि जो जिम्मेदार राजस्व अधिकारी बिल्सी तहसील से स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें भी रिलीव नहीं किया जा रहा है। एक महीना पहले इस प्रकरण का खुलासा हुआ तो शासन तक सकते में आ गया था। तहसीलदार बिल्सी ने इस मामले में बिल्सी थाने में ही रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी का नहीं, सरकारी धन वापसी का प्रयास शुरू का दिया गया। 
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किसके कहने पर जमा कराया जा रहा धन
बदायूं। करीब 55 लोगों ने शपथपत्र के साथ करीब 30 लाख रुपये की सरकारी आपदा कोष में वापस कर दी है। इनसे शपथपत्र भी लिए जा रहे हैं। यह किसके कहने पर हो रहा है। इसका कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। लोगों को बचाने के नाम पर धन उगाही का भी खेल हो रहा है। अभी कोई अभियुक्त इस प्रकरण में गिरफ्तार नहीं किया गया है। इधर, एसडीएम विधान जायसवाल का कहना है कि जांच की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रकरण में संलिप्त पाए गए, तीन लेखपाल महावीर प्रसाद, सतीश और भगवान सिंह को पहले ही निलंबित कर दिया गया है। इन लेखपालों के नाम एसआई ने भी अपनी जांच में उजागर किए थे। 
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शातिरों तक कैसे पहुंचे हस्ताक्षर वाले कोरे चेक 
बदायूूं। तहसील से कोरे चेक हथियाकर तमाम लोगों के खाते में डलवाकर धन निकाल लिया गया। इसमें करोड़ों का घोटाला होने का अनुमान है। बहजोई, जिला संभल में इस प्रकार का घोटाला पकड़ में आया, तो बहजोई की पीएनबी शाखा के मैनेजर से लेकर तमाम लोग इस घोटाले में जुड़े नजर आए। पीएनबी के मैनेजर को साजिश में शामिल तो जांच अधिकारी मान रहे हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें कहीं आरोपी नहीं बनाया है। जांच अधिकारी पर भी तमाम आरोप लगने लगे हैं। हालांकि वह ईमानदारी से जांच किए जाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह कोई गलंत मंशा रखते तो आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराए जाने की सिफारिश क्यों करते। 
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बैंक अधिकारी बचे, लेखपाल और किशन पर फोकस
बदायूं। अब तक की जांच प्रक्रिया में बिल्सी के एसआई एवं जांच अधिकारी स्वर्ण सिंह ने बताया कि महावीर प्रसाद, सतीश, भगवान सिंह, तीन लेखपालों समेत बहजोई का ढाबा संचालक किशन यादव मुख्य आरोपी हैं। किशन यादव के परिवार वाले और रिश्तेदार भी शामिल हैं। बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, हाथरस समेत कई अन्य जिलों में भी आपदा राहत के चेक दूसरों के खातों में जमा किए गए हैं। चेक हथियाने में उघैती थाने के गांव गंगरौली निवासी किशन यादव का रिश्तेदार मास्टर उरमान और उसका पुत्र अजय भी शामिल बताया गया है, लेकिन दूसरे जिले के तहसीलदार द्वारा जारी चेक बैंकों ने कैसे भुनाए? इस पर जांच का कोई फोकस नहीं गया है। सबसे ज्यादा चेक बहजोई की पीएनबी शाखा से भुनाए गए हैं। हालांकि बदायूं जिले से बाहर आगरा, अलीगढ़, हाथरस आदि की बैंकों से चेक भुनाए गए हैं। इन हालातों में बैंकों से पूछताछ तक नहीं हो रही है।
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चेक पासिंग अफसर चंदौसी स्थानांतरित 
पीएनबी की बहजोई शाखा के प्रबंधक एसए खां ने बताया कि चेकों की जांच के बाद ही धनराशि भुनाई जाती है। यह काम उनके यहां चेक पासिंग आफसर एसएस अग्रवाल पर था, जिनका स्थानांतरण चंदौसी हो चुका है।     

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जांच की समय सीमा निकल जरूर गई है, लेकिन जांच तीनों सदस्य जल्दी ही निपटाएंगे। सरकारी कामकाज और अन्य कारणों से जांच में विलंब हुआ है। तीनों अधिकारी इस जांच को अपने-अपने स्तर से कर रहे हैं। परिणाम जल्दी ही सामने होंगे। 
- राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व/ जांच अधिकारी टीम के सदस्य  
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