{"_id":"628010b697f15a7ab739097a","slug":"cultural-badaun-news-bly4848773140","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्नेह और प्रेम के साथ संवेदनाओं की डोर में बंधे हैं संयुक्त परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्नेह और प्रेम के साथ संवेदनाओं की डोर में बंधे हैं संयुक्त परिवार
विज्ञापन
जितेंद्र नरूला का संयुक्त परिवार। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। हर हालत में जीने का सहारा परिवार ही होता है, हर उम्र के लोगों को दुनिया का सबसे महफूज ठिकाना भी परिवार ही होता है। किसी शायर ने परिवार को लेकर कहा है कि ‘कोई हल ढूंढ लेते हैं, मुसीबत जब भी आती है, मेरे परिवार का हर शख्स खुदा से कम नहीं है’।
आधुनिक और भागदौड़ के इस युग में संयुक्त परिवार अपवाद हैं। ऐसे संयुक्त परिवारों को तलाशना किसी मुश्किल से कम नहीं, जहां तीन से चार पीढ़ियां एक साथ हों और परिवार का हर सदस्य एक दूसरे से प्रेम और संवेदना रखता हो। हर वर्ष 15 मई को विश्व परिवार दिवस मनाया जाता है, इस दिन ऐसे परिवारों की खुशियां कई गुना बढ़ जाती हैं जहां बुजुर्ग रिश्तों का ताना-बाना स्नेह के धागों से गूंथने का काम कर रहे हों।
शहर के पटियाली सराय निवासी डॉ. शिवलाल गुप्ता, हुसैनी गली की रुक्मणि गुप्ता और पंजाबी मोहल्ले के सतनाम नरुला का परिवार लोगों के लिए मिसाल से कम नहीं है। संवाद
विज्ञापन
-
रिश्तों का गुलिस्ता है डॉ. शिवलाल गुप्ता का परिवार
मोहल्ला पटियाली सराय निवासी डॉ. शिवलाल गुप्ता का परिवार रिश्तों के गुलिस्तां से कम नहीं है। 84 वर्ष के शिवलाल गुप्ता व पत्नी मधु गुप्ता के परिवार में पुत्रों से लेकर प्रपौत्रों तक 30 से ज्यादा लोग हैं। संयुक्त और एकजुट परिवार समाज को संदेश देता है कि ज्यादा खुशी संयुक्त परिवार में होती है। डॉ. शिवलाल के परिवार में बेटे राजीव गुप्ता, संजीव गुप्ता, सुरजीव गुप्ता, पुत्रवधू ऊषा, मीना, ममता गुप्ता तीनों बेटों की संतानों के साथ बेटों के बेटों की संताने साथ रहती हैं। डॉ. शिवलाल और उनकी पत्नी का ज्यादातर समय प्रपौत्रों में नन्हे बच्चों वेदांत, आरुष, श्रेया, अथर्व, अर्न, सानवी, शिवांश, मयूरा और रुद्रांश के साथ बीतता है।
-
रुक्मणि का परिवार किसी मिसाल से कम नहीं
मोहल्ला हुसैनी गली में रहने वाली 82 वर्ष की रुक्मणि का परिवार किसी मिसाल से कम नहीं है। रुक्मणि ने रिश्तों को इस तरह से गूंथा है कि प्यार और स्नेह बढ़ता ही जाता है। रुक्मणि के तीन बेटे दिनेश गुप्ता, अंबरीश गुप्ता, मुनीष गुप्ता और बहुएं मीना, मंजू, शैफाली गुप्ता अपनी संतानों के साथ संयुक्त परिवार में रहते हैं। परिवार की मुखिया रुक्मणि का आदेश मानो सभी सदस्यों के लिए भगवान के आदेश के बराबर है। तीनों बेटों की दो-दो संताने हैं। एकल परिवार के जमाने में यह परिवार लोगों को संदेश देता है कि अगर स्नेह और प्यार की डोर मजबूत है तो परिवार को एकजुट रहने से कोई नहीं रोक सकता।
-
एक चूल्हे पर बनता है उपाध्याय परिवार का भोजन
शहर से सटे कस्बा कुंवरगांव के गांव अर्सिस बर्खिन का उपाध्याय परिवार स्नेह की ऐसी डोर में बंधा है कि चार भाइयों का भोजन आज भी एक ही चूल्हे पर बनता है। परिवार की मुखिया करीब 82 वर्ष की मोरश्री उपाध्याय अपने बेटों सर्वेश उपाध्याय, जवाहर लाल उपाध्याय, सुभाष उपाध्याय और कैलाश उपाध्याय के साथ रहती हैं। सुख-दुख में पूरा परिवार एक है। सर्वेश के दो बेटे, तीन बेटियां, जवाहर लाल के एक बेटा चार बेटियां, सुभाष के दो बेटे एक बेटी और कैलाश के दो बेटे तीन बेटियां हैं। सर्वेश के दो और जवाहर के एक बेटे की शादी हो चुकी है। परिवार में जवाहर, सुभाष और कैलाश की पत्नियां भी हैं। सर्वेश की पत्नी का निधन हो चुका है। उपाध्याय परिवार हर सुख-दुख में साथ रहते हुए साबित कर रहा है कि एकल परिवार से ज्यादा खुशी संयुक्त परिवार में है।
-
खुशमिजाजी का संदेश देता है शहर का नरूला परिवार
शहर के मोहल्ला सैय्दबाड़ा निवासी जितेंद्र नरूला के परिवार खुशमिजाजी का संदेश देता है। जितेंद्र और उनके भाई सतनाम सिंह बड़े व्यापारी हैं। परिवार में जसकरन सिंह, जसप्रीत सिंह, उश्नीत कौर, सुखवेंद नरूला, तरनजीत कौर, दिलप्रीत नरूला, रवनीत कौर के बीच रिश्तों और स्नेह का ऐसा बंधन है जो एकल परिवार के इस जमाने में संदेश देता है कि संयुक्त परिवार में खुशियों का कोई ठिकाना नहीं होता। जब कोई त्योहार होता है तो परिवार के खुशियां और भी बढ़ जाती हैं। जितेंद्र नरूला का कहना है कि उनका परिवार उनकी ताकत है। एकल परिवार से कहीं ज्यादा खुशियां संयुक्त परिवार देता है। संवाद
विज्ञापन
आधुनिक और भागदौड़ के इस युग में संयुक्त परिवार अपवाद हैं। ऐसे संयुक्त परिवारों को तलाशना किसी मुश्किल से कम नहीं, जहां तीन से चार पीढ़ियां एक साथ हों और परिवार का हर सदस्य एक दूसरे से प्रेम और संवेदना रखता हो। हर वर्ष 15 मई को विश्व परिवार दिवस मनाया जाता है, इस दिन ऐसे परिवारों की खुशियां कई गुना बढ़ जाती हैं जहां बुजुर्ग रिश्तों का ताना-बाना स्नेह के धागों से गूंथने का काम कर रहे हों।
विज्ञापन
शहर के पटियाली सराय निवासी डॉ. शिवलाल गुप्ता, हुसैनी गली की रुक्मणि गुप्ता और पंजाबी मोहल्ले के सतनाम नरुला का परिवार लोगों के लिए मिसाल से कम नहीं है। संवाद
विज्ञापन
-
रिश्तों का गुलिस्ता है डॉ. शिवलाल गुप्ता का परिवार
मोहल्ला पटियाली सराय निवासी डॉ. शिवलाल गुप्ता का परिवार रिश्तों के गुलिस्तां से कम नहीं है। 84 वर्ष के शिवलाल गुप्ता व पत्नी मधु गुप्ता के परिवार में पुत्रों से लेकर प्रपौत्रों तक 30 से ज्यादा लोग हैं। संयुक्त और एकजुट परिवार समाज को संदेश देता है कि ज्यादा खुशी संयुक्त परिवार में होती है। डॉ. शिवलाल के परिवार में बेटे राजीव गुप्ता, संजीव गुप्ता, सुरजीव गुप्ता, पुत्रवधू ऊषा, मीना, ममता गुप्ता तीनों बेटों की संतानों के साथ बेटों के बेटों की संताने साथ रहती हैं। डॉ. शिवलाल और उनकी पत्नी का ज्यादातर समय प्रपौत्रों में नन्हे बच्चों वेदांत, आरुष, श्रेया, अथर्व, अर्न, सानवी, शिवांश, मयूरा और रुद्रांश के साथ बीतता है।
-
रुक्मणि का परिवार किसी मिसाल से कम नहीं
मोहल्ला हुसैनी गली में रहने वाली 82 वर्ष की रुक्मणि का परिवार किसी मिसाल से कम नहीं है। रुक्मणि ने रिश्तों को इस तरह से गूंथा है कि प्यार और स्नेह बढ़ता ही जाता है। रुक्मणि के तीन बेटे दिनेश गुप्ता, अंबरीश गुप्ता, मुनीष गुप्ता और बहुएं मीना, मंजू, शैफाली गुप्ता अपनी संतानों के साथ संयुक्त परिवार में रहते हैं। परिवार की मुखिया रुक्मणि का आदेश मानो सभी सदस्यों के लिए भगवान के आदेश के बराबर है। तीनों बेटों की दो-दो संताने हैं। एकल परिवार के जमाने में यह परिवार लोगों को संदेश देता है कि अगर स्नेह और प्यार की डोर मजबूत है तो परिवार को एकजुट रहने से कोई नहीं रोक सकता।
-
एक चूल्हे पर बनता है उपाध्याय परिवार का भोजन
शहर से सटे कस्बा कुंवरगांव के गांव अर्सिस बर्खिन का उपाध्याय परिवार स्नेह की ऐसी डोर में बंधा है कि चार भाइयों का भोजन आज भी एक ही चूल्हे पर बनता है। परिवार की मुखिया करीब 82 वर्ष की मोरश्री उपाध्याय अपने बेटों सर्वेश उपाध्याय, जवाहर लाल उपाध्याय, सुभाष उपाध्याय और कैलाश उपाध्याय के साथ रहती हैं। सुख-दुख में पूरा परिवार एक है। सर्वेश के दो बेटे, तीन बेटियां, जवाहर लाल के एक बेटा चार बेटियां, सुभाष के दो बेटे एक बेटी और कैलाश के दो बेटे तीन बेटियां हैं। सर्वेश के दो और जवाहर के एक बेटे की शादी हो चुकी है। परिवार में जवाहर, सुभाष और कैलाश की पत्नियां भी हैं। सर्वेश की पत्नी का निधन हो चुका है। उपाध्याय परिवार हर सुख-दुख में साथ रहते हुए साबित कर रहा है कि एकल परिवार से ज्यादा खुशी संयुक्त परिवार में है।
-
खुशमिजाजी का संदेश देता है शहर का नरूला परिवार
शहर के मोहल्ला सैय्दबाड़ा निवासी जितेंद्र नरूला के परिवार खुशमिजाजी का संदेश देता है। जितेंद्र और उनके भाई सतनाम सिंह बड़े व्यापारी हैं। परिवार में जसकरन सिंह, जसप्रीत सिंह, उश्नीत कौर, सुखवेंद नरूला, तरनजीत कौर, दिलप्रीत नरूला, रवनीत कौर के बीच रिश्तों और स्नेह का ऐसा बंधन है जो एकल परिवार के इस जमाने में संदेश देता है कि संयुक्त परिवार में खुशियों का कोई ठिकाना नहीं होता। जब कोई त्योहार होता है तो परिवार के खुशियां और भी बढ़ जाती हैं। जितेंद्र नरूला का कहना है कि उनका परिवार उनकी ताकत है। एकल परिवार से कहीं ज्यादा खुशियां संयुक्त परिवार देता है। संवाद

मोरश्री उपाध्याय का संयुक्त परिवार। संवाद- फोटो : BADAUN

हुसैनी गली की रुक्मणी गुप्ता का संयुक्त परिवार। संवाद- फोटो : BADAUN

डॉ. शिवलाल गुप्ता का संयुक्त परिवार। संवाद- फोटो : BADAUN