{"_id":"6266fb11a6c5377786181934","slug":"cultural-badaun-news-bly4827439134","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘समंदर की कई नदियां, नदी का एक समंदर है’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘समंदर की कई नदियां, नदी का एक समंदर है’
विज्ञापन
काव्य पाठ करते कवि सर्वेश अस्थाना।संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। आचमन संस्था की ओर से रविवार रात शहर के एक होटल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यहां देश के कोने-कोने से बड़े कवि जुटे। यहां आधी रात के बाद तक काव्य रस की फुहार बही।
वरिष्ठ कवि व साहित्यकार उदय प्रताप सिंह व अन्य कवियों के सम्मान के बाद कवि सम्मेलन शुरू किया गया।
कवयित्री अंकिता सिंह ने कहा -
नदी खारे समंदर के लिए जज्बात से तर है, समंदर को पता है ये, नदी का वो मुकद्दर है
वफा और बेवफाई की मिसालें है यही दोनों, समंदर की कई नदियां, नदी का इक समंदर है।
लखनऊ से आए वरिष्ठ कवि सर्वेश अस्थाना ने सुनाया-
लाखों विष की फुफकारें
हम झेल गए हंसते हंसते,
हम चंदन की आस्तीन हैं
पला करें पलने वाले।
गंजडुंडवारा से आए शायर अज्म शाकिरी ने मां की टीस बयां की-
चिड़िया रोकर कहती है
क्यों बच्चों के पर आए।
दिल्ली से आईं कवयित्री प्रमिला भारती ने कहा-
नए दौर पर इक सटायर हूं मैं
मुझे गोद ले लो रिटायर हूं मैं।
अंत में कवि उदय प्रताप सिंह ने श्रोताओं की मांग के मुताबिक अपनी कुछ रचनाएं सुनाईं। उन्होंने कहा-
चार दिन की जिंदगी खुद को जिए तो क्या जिए
बात तो तब है जब मर जाएं औरों के लिए।
इनके साथ ही चितौड़ से गीतकार रमेश शर्मा, उझानी से टिल्लन वर्मा व इटावा से राम भदावर ने भी शानदार प्रस्तुति दीं। देर रात तक शहर के प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े श्रोताओं ने कविताओं का आनंद लिया। काव्य समारोह का प्रारंभिक संचालन डॉ.अक्षत अशेष ने व बाद में डॉ. सर्वेश अस्थाना ने किया। अंत मे कार्यक्रम के संयोजक विशाल रस्तोगी व सोनरूपा विशाल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
वरिष्ठ कवि व साहित्यकार उदय प्रताप सिंह व अन्य कवियों के सम्मान के बाद कवि सम्मेलन शुरू किया गया।
कवयित्री अंकिता सिंह ने कहा -
नदी खारे समंदर के लिए जज्बात से तर है, समंदर को पता है ये, नदी का वो मुकद्दर है
वफा और बेवफाई की मिसालें है यही दोनों, समंदर की कई नदियां, नदी का इक समंदर है।
लखनऊ से आए वरिष्ठ कवि सर्वेश अस्थाना ने सुनाया-
लाखों विष की फुफकारें
हम झेल गए हंसते हंसते,
हम चंदन की आस्तीन हैं
पला करें पलने वाले।
गंजडुंडवारा से आए शायर अज्म शाकिरी ने मां की टीस बयां की-
चिड़िया रोकर कहती है
क्यों बच्चों के पर आए।
दिल्ली से आईं कवयित्री प्रमिला भारती ने कहा-
नए दौर पर इक सटायर हूं मैं
मुझे गोद ले लो रिटायर हूं मैं।
अंत में कवि उदय प्रताप सिंह ने श्रोताओं की मांग के मुताबिक अपनी कुछ रचनाएं सुनाईं। उन्होंने कहा-
चार दिन की जिंदगी खुद को जिए तो क्या जिए
बात तो तब है जब मर जाएं औरों के लिए।
इनके साथ ही चितौड़ से गीतकार रमेश शर्मा, उझानी से टिल्लन वर्मा व इटावा से राम भदावर ने भी शानदार प्रस्तुति दीं। देर रात तक शहर के प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े श्रोताओं ने कविताओं का आनंद लिया। काव्य समारोह का प्रारंभिक संचालन डॉ.अक्षत अशेष ने व बाद में डॉ. सर्वेश अस्थाना ने किया। अंत मे कार्यक्रम के संयोजक विशाल रस्तोगी व सोनरूपा विशाल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन