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शक्ति स्वरूपा : हथौड़ा देवी मंदिर पर जुटते हैं पूरे नवरात्र हजारों श्रद्धालु
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हथौड़ा देवी माता का मंदिर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बिसौली। स्थानीय हथौड़ा देवी मंदिर पर पूरे नवरात्र श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।
गैर आबाद गांव के रूप में दर्ज ग्राम हथौड़ा स्थित इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। किवदंती है कि आल्हा ऊदल के भाई मलखान यहां देवी की आराधना करने आते थे। मंदिर के बीचोंबीच स्थित विशाल वटवृक्ष मंदिर के प्राचीन होने की गवाही देता है। मंदिर परिसर में माता काली, माता दक्षिणेश्वरी, सिद्धिदात्री मां, बजरंगबली, भैरो बाबा सहित कई मूर्तियां स्थापित हैं।
स्वर्गीय बाबा शेरसिंह ने मंदिर की लगभग 40 वर्षों से अधिक सेवा की। बाबा ने जंगल में स्थित माता के मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। मंदिर में स्थापित माता दक्षिणेश्वरी देवी की विशाल प्रतिमा बाबा ने ही पश्चिम बंगाल से लाकर स्थापना कराई थी। बाबा के इस पुनीत कार्य में नगर के कई भक्तों ने सहयोग किया।
मंदिर परिसर में आने वाले भक्त पूजा अर्चना के बाद वट वृक्ष की परिक्रमा कर मन्नत मांगते हैं। विशाल यज्ञ का आयोजन होता है। नवमी के दिन पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे में सैकड़ों लोग प्रसाद पाते हैं।
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इन दिनों संयोगिता सक्सेना मंदिर की सेवा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व बाबा शेरसिंह के देहांत के बाद भक्तों ने उनकी मूर्ति स्थापना भी मंदिर परिसर में ही करा दी है। बाबा के मुरीद माता के दर्शन से पहले उनकी प्रतिमा के सम्मुख नतमस्तक होना नहीं भूलते। संवाद
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गैर आबाद गांव के रूप में दर्ज ग्राम हथौड़ा स्थित इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। किवदंती है कि आल्हा ऊदल के भाई मलखान यहां देवी की आराधना करने आते थे। मंदिर के बीचोंबीच स्थित विशाल वटवृक्ष मंदिर के प्राचीन होने की गवाही देता है। मंदिर परिसर में माता काली, माता दक्षिणेश्वरी, सिद्धिदात्री मां, बजरंगबली, भैरो बाबा सहित कई मूर्तियां स्थापित हैं।
स्वर्गीय बाबा शेरसिंह ने मंदिर की लगभग 40 वर्षों से अधिक सेवा की। बाबा ने जंगल में स्थित माता के मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। मंदिर में स्थापित माता दक्षिणेश्वरी देवी की विशाल प्रतिमा बाबा ने ही पश्चिम बंगाल से लाकर स्थापना कराई थी। बाबा के इस पुनीत कार्य में नगर के कई भक्तों ने सहयोग किया।
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मंदिर परिसर में आने वाले भक्त पूजा अर्चना के बाद वट वृक्ष की परिक्रमा कर मन्नत मांगते हैं। विशाल यज्ञ का आयोजन होता है। नवमी के दिन पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे में सैकड़ों लोग प्रसाद पाते हैं।
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इन दिनों संयोगिता सक्सेना मंदिर की सेवा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व बाबा शेरसिंह के देहांत के बाद भक्तों ने उनकी मूर्ति स्थापना भी मंदिर परिसर में ही करा दी है। बाबा के मुरीद माता के दर्शन से पहले उनकी प्रतिमा के सम्मुख नतमस्तक होना नहीं भूलते। संवाद