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सहसवान में बेनामी संपत्तियां खरीदने का आरोपी कर्मचारी बदायूं से संबद्ध
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बदायूं। सहसवान में भूमाफिया से मिलकर तमाम बेनामी संपत्तियां क्रय करने वाले चर्चित कर्मचारी को जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।
इस कर्मचारी के खिलाफ सहसवान के तत्कालीन एसडीएम ने खुद डीएम से शिकायत की थी, जिस पर डीएम ने उसका स्थानांतरण बिसौली करते हुए उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अब राजनीतिक वरदहस्त और अधिकारियों से सेटिंग के चलते उसने अपना अटैचमेंट जिला मुख्यालय पर करा लिया है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है।
सहसवान के शहवाजपुर और जाहिदपुर आलमपुर में शत्रु संपत्ति के पास स्थित विवादित जमीन का मामला मुख्यमंत्री से शिकायत होने के चलते इन दिनों सुर्खियों में है। इनमें कई सरकारी कर्मचारियों की भी संलिप्तता है। इनमें से एक कर्मचारी को तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने हटाकर बिसौली ट्रांसफर कर दिया था। इस कर्मचारी की शिकायत खुद तत्कालीन एसडीएम सहसवान संजय कुमार सिंह ने की थी, जिसमें उस पर कई बेनामी संपत्तियों को क्रय करने, कार्यालय में असामाजिक तत्वों को बुलाकर शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया था। शहवाजपुर में रोड किनारे की विवादित भूमि को भी क्रय करने की शिकायत भी शामिल थी। इस पर, डीएम ने उसका स्थानांतरण बिसौली करते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
टीम ने कर्मचारी को दोषी मानते हुए कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति की। डीएम ने कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन डीएम का ट्रांसफर होने के बाद इस फाइल को डंप कर दिया गया। इसके बाद से ही यह कर्मचारी अपना स्थानांतरण बदायूं कराने के लिए जुट गया था। अब उसका अटैचमेंट जिला मुख्यालय के एक महत्वपूूर्ण कार्यालय में होने के कारण मामला फिर चर्चा में आ गया है।
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जांच रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार समेत चार अन्य पाए गए थे दोषी
तीन सदस्यीय कमेटी ने डीएम को जो जांच रिपोर्ट सौंपी थी उसमें इस कर्मचारी के अलावा तत्कालीन तहसीलदार धीरेंद्र कुमार समेत एसडीएम के तत्कालीन पेशकार गिरीश सक्सेना व तहसीलदार के तत्कालीन पेशकार प्रेम जौहरी भी दोषी पाए गए थे। इस तीन सदस्यीय जांच कमेटी में तत्कालीन एडीएम रामनिवास शर्मा, ज्येष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लोकेंद्र शर्मा समेत तत्कालीन एसडीएम लालबहादुर शामिल थे।
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एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है कर्मचारी पर
कुछ साल पहले इस विवादित कर्मचारी पर मारपीट समेत अन्य मामले की एफआईआर भी दर्ज की गई थी। एफआईआर में उसके साथ सहसवान के तत्कालीन तहसीलदार समेत लेखपाल और कानूनगो समेत छह लोगों को नामजद किया गया था। एडीएम प्रशासन ऋतु पूनिया का कहना है कि यह प्रकरण उनसे पहले का है। कर्मचारी का ट्रांसफर डीएम ने किया है।
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इस कर्मचारी के खिलाफ सहसवान के तत्कालीन एसडीएम ने खुद डीएम से शिकायत की थी, जिस पर डीएम ने उसका स्थानांतरण बिसौली करते हुए उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अब राजनीतिक वरदहस्त और अधिकारियों से सेटिंग के चलते उसने अपना अटैचमेंट जिला मुख्यालय पर करा लिया है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है।
सहसवान के शहवाजपुर और जाहिदपुर आलमपुर में शत्रु संपत्ति के पास स्थित विवादित जमीन का मामला मुख्यमंत्री से शिकायत होने के चलते इन दिनों सुर्खियों में है। इनमें कई सरकारी कर्मचारियों की भी संलिप्तता है। इनमें से एक कर्मचारी को तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने हटाकर बिसौली ट्रांसफर कर दिया था। इस कर्मचारी की शिकायत खुद तत्कालीन एसडीएम सहसवान संजय कुमार सिंह ने की थी, जिसमें उस पर कई बेनामी संपत्तियों को क्रय करने, कार्यालय में असामाजिक तत्वों को बुलाकर शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया था। शहवाजपुर में रोड किनारे की विवादित भूमि को भी क्रय करने की शिकायत भी शामिल थी। इस पर, डीएम ने उसका स्थानांतरण बिसौली करते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
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टीम ने कर्मचारी को दोषी मानते हुए कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति की। डीएम ने कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन डीएम का ट्रांसफर होने के बाद इस फाइल को डंप कर दिया गया। इसके बाद से ही यह कर्मचारी अपना स्थानांतरण बदायूं कराने के लिए जुट गया था। अब उसका अटैचमेंट जिला मुख्यालय के एक महत्वपूूर्ण कार्यालय में होने के कारण मामला फिर चर्चा में आ गया है।
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जांच रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार समेत चार अन्य पाए गए थे दोषी
तीन सदस्यीय कमेटी ने डीएम को जो जांच रिपोर्ट सौंपी थी उसमें इस कर्मचारी के अलावा तत्कालीन तहसीलदार धीरेंद्र कुमार समेत एसडीएम के तत्कालीन पेशकार गिरीश सक्सेना व तहसीलदार के तत्कालीन पेशकार प्रेम जौहरी भी दोषी पाए गए थे। इस तीन सदस्यीय जांच कमेटी में तत्कालीन एडीएम रामनिवास शर्मा, ज्येष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लोकेंद्र शर्मा समेत तत्कालीन एसडीएम लालबहादुर शामिल थे।
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एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है कर्मचारी पर
कुछ साल पहले इस विवादित कर्मचारी पर मारपीट समेत अन्य मामले की एफआईआर भी दर्ज की गई थी। एफआईआर में उसके साथ सहसवान के तत्कालीन तहसीलदार समेत लेखपाल और कानूनगो समेत छह लोगों को नामजद किया गया था। एडीएम प्रशासन ऋतु पूनिया का कहना है कि यह प्रकरण उनसे पहले का है। कर्मचारी का ट्रांसफर डीएम ने किया है।