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मंत्री बताकर डीएम को किया फोन- दो लोग भेजे हैं, इनकी जमीन कब्जा मुक्त कराओ
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डीएम कार्यालय से पकड़े गए नटवरलाल (महरून रंग की शर्ट में आसिफ खान)। संवाद
- फोटो : BADAUN
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मंत्री बनकर डीएम को किया फोन- दो लोग भेजे हैं, इनकी जमीन कब्जा मुक्त कराओ
- शक होने पर सर्विलांस पर लगवाया नंबर, कार्यालय में ही मिली लोकेशन
- बाहर खड़े होकर कर रहे थे कॉल, एसओजी ने दोनों को किया गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। डीएम कार्यालय से मंगलवार को दो नटवरलाल पकड़े गए। उन्होंने डीएम दीपा रंजन को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया। उनसे कहा कि दो लोग आपके कार्यालय भेजे हैं, उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। तुरंत इनकी कब्जा हटवाया जाए। यह कहकर थोड़ी देर बाद दोनों नटवरलाल कार्यालय में घुस गए। शक होने पर डीएम ने मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवाया तो लोकेशन डीएम ऑफिस की ही मिली। मौके पर पहुंची एसओजी ने दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डीएम कार्यालय से पकड़ा गया नटवरलाल आसिफ खान पुत्र बलादत खान बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव परौली का रहने वाला है, जबकि दूसरा सुमित कुमार पुत्र राजेंद्र पाल बिसौली के नागपुर गांव का है। पुलिस के मुताबिक दोनों ने नागपुर गांव के एक व्यक्ति से उसकी जमीन से कब्जा हटवाने के लिए दो लाख रुपये लिए थे। उन्होंने उक्त व्यक्ति को आश्वासन दिया था कि वे उसकी जमीन से कब्जा हटवा देंगे। जिस जमीन से उन्होंने कब्जा हटवाने का ठेका लिया था, वह विवादित बताई जा रही है।
इसके बाद दोनों मंगलवार दोपहर डीएम कार्यालय पहुंचे। उस वक्त डीएम दीपा रंजन अपने कक्ष में बैठी थीं। आसिफ खान ने उनके कार्यालय के बाहर एकांत में खड़े होकर डीएम को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया। उन्हें बताया कि आसिफ खान नाम के एक व्यक्ति को आपके कार्यालय भेजा है, और वह आपके कक्ष के बाहर ही खड़ा है। उसकी जमीन का एक मामला है। कुछ लोगों ने उस पर कब्जा कर लिया है। जमीन से तुरंत कब्जा हटवाया जाए। यह बात करके थोड़ी ही देर बाद दोनों नटवरलाल डीएम के कक्ष में प्रवेश कर गए। जब डीएम ने आसिफ से बात की तो उसकी आवाज सुनकर उन्हें शक हुआ। इस पर उन्होंने तुरंत उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया और सिक्योरिटी बुलाकर दोनों को कार्यालय के बाहर बैठा दिया गया। कुछ देर में एसओजी लोकेशन के आधार पर कार्यालय पहुंच गई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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आसिफ खान ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया था। उससे बातचीत के दौरान उसकी आवाज पहले फोन करने वाले की आवाज से मिलती जुलती लगी। इस पर मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवाया गया तो वह नंबर उसी का निकला। दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
- दीपा रंजन, डीएम
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मोबाइल स्क्रीन पर लिखकर आता था राज्यमंत्री तो सतर्क हो जाते थे अफसर
बदायूं। डीएम कार्यालय से पकड़ा गया नटवरलाल आसिफ खान दरोगा से लेकर एसडीएम तक फोन करके रौब जमा चुका था। जब अधिकारियों के मोबाइल स्क्रीन पर ट्रूकॉलर में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री लिखकर आता था तब वे सतर्क हो जाते थे और सम्मानपूर्वक बात करने लगते थे। चूंकि एक सप्ताह से फोन आने का सिलसिला जारी था। इस पर अधिकारियों ने जमीन के मामले की जांच शुरू करा दी थी पर कार्रवाई नहीं की थी। बाद में उन्हें कुछ-कुछ कॉल पर संदेह भी होने लगा था।
जमीन का मामला बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव नागपुर का था। यहां के हरिसिंह ने करीब 30-35 साल पहले चार बीघा जमीन कुछ लोगों को बेची थी। उसमें एक बीघा जमीन गांव के बीरबल ने खरीदी थी। तब से सब लोग उस जमीन पर काबिज थे और उन्होंने अपना मकान व दुकान भी बनवा ली थी। पर किसी ने भी जमीन का बैनामा नहीं कराया था। केवल स्टांप पेपर पर लिखापढ़त कराई थी।
साल 2005 में एक व्यक्ति की हत्या में हरिसिंह जेल चला गया। 2014 में वह जमानत पर जेल से छूटकर आया, तब से उसने कोई शिकायत नहीं की। एक सप्ताह पूर्व उसकी मुलाकात बिल्सी क्षेत्र के गांव परौली निवासी आसिफ खान से हुई। पुलिस के मुताबिक हरिसिंह ने अपना शातिर दिमाग चलाया। उसने आसिफ खान को पूरी कहानी बताई। इस पर आसिफ खान ने उस जमीन से कब्जा हटवाने का दो लाख रुपये में ठेका ले लिया। तभी से उसने पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करना शुरू कर दिया। बताते हैं कि सबसे पहले उसने नायब तसीलदार अरुण कुमार को फोन किया। बिसौली कोतवाली प्रभारी ऋषिपाल सिंह, तहसीलदार अशोक सैनी और एसडीएम ज्योति शर्मा को भी फोन किया। शुरुआती दौर में सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी इस मामले को लेकर सतर्क रहे। बाद में एक ही मामले को लेकर सभी अधिकारियों को कई-कई बार मंत्री बनकर फोन किया गया तो उनका माथा ठनका। हैरानी की बात यह रही उन्होंने फोन करने वाले को पकड़वाना जरूरी नहीं समझा। गनीमत यह रही कि डीएम मामले को भांप गईं और उन्होंने तुरंत एक्शन लेकर नटवरलाल को पुलिस के हवाले कर दिया।
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सुमित ने नटवरलाल की कराई थी बात, कमीशन हुआ था तय
नटवरलाल आसिफ खान के साथ पकड़ा गया सुमित बीच का हिस्सा बना। पुलिस के मुताबिक उसने ही नटवरलाल और हरिसिंह की बात कराई थी। जब सौदा तय हुआ तो उसका कमीशन भी तय हो गया था।
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आवाज पहचानने के लिए देखी शिक्षा मंत्री की वीडियो
नायब तहसीलदार अरुण कुमार ने बताया कि उनके मोबाइल पर ट्रूकॉलर पर स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री लिखकर कॉल आती थी। जब कई बार कॉल आई तब उन्होंने यूट्यूब पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के भाषण के पुराने वीडियो देखे। इससे वह समझ गए कि यह कोई फर्जी कॉल है।
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एसडीएम ने कराई जांच
नटवरलाल की बातों से प्रभावित एसडीएम बिसौली ज्योति शर्मा ने शुरू में मामले को गंभीरता से लिया। जमीन के मामले की जांच तक करा ली। पता चला कि बीरबल आदि कई साल से उस जगह पर काबिज हैं। ऐसे में उन्होंने कार्रवाई नहीं की जिस पर मामला डीएम तक पहुंचा।
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एसडीएम ने कहा- डीएम को बताया तो सामने बैठे थे आरोपी
बिसौली एसडीएम ज्योति शर्मा ने बताया कि वह नटवरलाल की हकीकत जान गईं थीं। इस पर उन्होंने दोपहर के समय डीएम को फोन करके इसकी जानकारी दी। उस दौरान नटवरलाल और उसका साथी वहीं बैठा था। बाद में दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
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नटवरलाल ने एसएसपी को भी किया था फोन
नटवरलाल आसिफ खान ने एसएसपी डॉ. ओपी सिंह को भी मंगलवार को मंत्री बनकर फोन किया था। एसएसपी ने देर रात वीडियो बाइट में इस बात की जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि हरिसिंह इन लोगों को दो लाख रुपये दे चुका था। एसओजी ने यह रकम भी बरामद कर ली है। इसमें एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
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दो लोग डीएम कार्यालय से पकड़े गए हैं। उन्होंने मंत्री बताकर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को फोन किया था, इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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- शक होने पर सर्विलांस पर लगवाया नंबर, कार्यालय में ही मिली लोकेशन
- बाहर खड़े होकर कर रहे थे कॉल, एसओजी ने दोनों को किया गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। डीएम कार्यालय से मंगलवार को दो नटवरलाल पकड़े गए। उन्होंने डीएम दीपा रंजन को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया। उनसे कहा कि दो लोग आपके कार्यालय भेजे हैं, उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। तुरंत इनकी कब्जा हटवाया जाए। यह कहकर थोड़ी देर बाद दोनों नटवरलाल कार्यालय में घुस गए। शक होने पर डीएम ने मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवाया तो लोकेशन डीएम ऑफिस की ही मिली। मौके पर पहुंची एसओजी ने दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डीएम कार्यालय से पकड़ा गया नटवरलाल आसिफ खान पुत्र बलादत खान बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव परौली का रहने वाला है, जबकि दूसरा सुमित कुमार पुत्र राजेंद्र पाल बिसौली के नागपुर गांव का है। पुलिस के मुताबिक दोनों ने नागपुर गांव के एक व्यक्ति से उसकी जमीन से कब्जा हटवाने के लिए दो लाख रुपये लिए थे। उन्होंने उक्त व्यक्ति को आश्वासन दिया था कि वे उसकी जमीन से कब्जा हटवा देंगे। जिस जमीन से उन्होंने कब्जा हटवाने का ठेका लिया था, वह विवादित बताई जा रही है।
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इसके बाद दोनों मंगलवार दोपहर डीएम कार्यालय पहुंचे। उस वक्त डीएम दीपा रंजन अपने कक्ष में बैठी थीं। आसिफ खान ने उनके कार्यालय के बाहर एकांत में खड़े होकर डीएम को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया। उन्हें बताया कि आसिफ खान नाम के एक व्यक्ति को आपके कार्यालय भेजा है, और वह आपके कक्ष के बाहर ही खड़ा है। उसकी जमीन का एक मामला है। कुछ लोगों ने उस पर कब्जा कर लिया है। जमीन से तुरंत कब्जा हटवाया जाए। यह बात करके थोड़ी ही देर बाद दोनों नटवरलाल डीएम के कक्ष में प्रवेश कर गए। जब डीएम ने आसिफ से बात की तो उसकी आवाज सुनकर उन्हें शक हुआ। इस पर उन्होंने तुरंत उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया और सिक्योरिटी बुलाकर दोनों को कार्यालय के बाहर बैठा दिया गया। कुछ देर में एसओजी लोकेशन के आधार पर कार्यालय पहुंच गई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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आसिफ खान ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बनकर फोन किया था। उससे बातचीत के दौरान उसकी आवाज पहले फोन करने वाले की आवाज से मिलती जुलती लगी। इस पर मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवाया गया तो वह नंबर उसी का निकला। दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
- दीपा रंजन, डीएम
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मोबाइल स्क्रीन पर लिखकर आता था राज्यमंत्री तो सतर्क हो जाते थे अफसर
बदायूं। डीएम कार्यालय से पकड़ा गया नटवरलाल आसिफ खान दरोगा से लेकर एसडीएम तक फोन करके रौब जमा चुका था। जब अधिकारियों के मोबाइल स्क्रीन पर ट्रूकॉलर में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री लिखकर आता था तब वे सतर्क हो जाते थे और सम्मानपूर्वक बात करने लगते थे। चूंकि एक सप्ताह से फोन आने का सिलसिला जारी था। इस पर अधिकारियों ने जमीन के मामले की जांच शुरू करा दी थी पर कार्रवाई नहीं की थी। बाद में उन्हें कुछ-कुछ कॉल पर संदेह भी होने लगा था।
जमीन का मामला बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव नागपुर का था। यहां के हरिसिंह ने करीब 30-35 साल पहले चार बीघा जमीन कुछ लोगों को बेची थी। उसमें एक बीघा जमीन गांव के बीरबल ने खरीदी थी। तब से सब लोग उस जमीन पर काबिज थे और उन्होंने अपना मकान व दुकान भी बनवा ली थी। पर किसी ने भी जमीन का बैनामा नहीं कराया था। केवल स्टांप पेपर पर लिखापढ़त कराई थी।
साल 2005 में एक व्यक्ति की हत्या में हरिसिंह जेल चला गया। 2014 में वह जमानत पर जेल से छूटकर आया, तब से उसने कोई शिकायत नहीं की। एक सप्ताह पूर्व उसकी मुलाकात बिल्सी क्षेत्र के गांव परौली निवासी आसिफ खान से हुई। पुलिस के मुताबिक हरिसिंह ने अपना शातिर दिमाग चलाया। उसने आसिफ खान को पूरी कहानी बताई। इस पर आसिफ खान ने उस जमीन से कब्जा हटवाने का दो लाख रुपये में ठेका ले लिया। तभी से उसने पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करना शुरू कर दिया। बताते हैं कि सबसे पहले उसने नायब तसीलदार अरुण कुमार को फोन किया। बिसौली कोतवाली प्रभारी ऋषिपाल सिंह, तहसीलदार अशोक सैनी और एसडीएम ज्योति शर्मा को भी फोन किया। शुरुआती दौर में सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी इस मामले को लेकर सतर्क रहे। बाद में एक ही मामले को लेकर सभी अधिकारियों को कई-कई बार मंत्री बनकर फोन किया गया तो उनका माथा ठनका। हैरानी की बात यह रही उन्होंने फोन करने वाले को पकड़वाना जरूरी नहीं समझा। गनीमत यह रही कि डीएम मामले को भांप गईं और उन्होंने तुरंत एक्शन लेकर नटवरलाल को पुलिस के हवाले कर दिया।
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सुमित ने नटवरलाल की कराई थी बात, कमीशन हुआ था तय
नटवरलाल आसिफ खान के साथ पकड़ा गया सुमित बीच का हिस्सा बना। पुलिस के मुताबिक उसने ही नटवरलाल और हरिसिंह की बात कराई थी। जब सौदा तय हुआ तो उसका कमीशन भी तय हो गया था।
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आवाज पहचानने के लिए देखी शिक्षा मंत्री की वीडियो
नायब तहसीलदार अरुण कुमार ने बताया कि उनके मोबाइल पर ट्रूकॉलर पर स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री लिखकर कॉल आती थी। जब कई बार कॉल आई तब उन्होंने यूट्यूब पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के भाषण के पुराने वीडियो देखे। इससे वह समझ गए कि यह कोई फर्जी कॉल है।
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एसडीएम ने कराई जांच
नटवरलाल की बातों से प्रभावित एसडीएम बिसौली ज्योति शर्मा ने शुरू में मामले को गंभीरता से लिया। जमीन के मामले की जांच तक करा ली। पता चला कि बीरबल आदि कई साल से उस जगह पर काबिज हैं। ऐसे में उन्होंने कार्रवाई नहीं की जिस पर मामला डीएम तक पहुंचा।
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एसडीएम ने कहा- डीएम को बताया तो सामने बैठे थे आरोपी
बिसौली एसडीएम ज्योति शर्मा ने बताया कि वह नटवरलाल की हकीकत जान गईं थीं। इस पर उन्होंने दोपहर के समय डीएम को फोन करके इसकी जानकारी दी। उस दौरान नटवरलाल और उसका साथी वहीं बैठा था। बाद में दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
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नटवरलाल ने एसएसपी को भी किया था फोन
नटवरलाल आसिफ खान ने एसएसपी डॉ. ओपी सिंह को भी मंगलवार को मंत्री बनकर फोन किया था। एसएसपी ने देर रात वीडियो बाइट में इस बात की जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि हरिसिंह इन लोगों को दो लाख रुपये दे चुका था। एसओजी ने यह रकम भी बरामद कर ली है। इसमें एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
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दो लोग डीएम कार्यालय से पकड़े गए हैं। उन्होंने मंत्री बताकर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को फोन किया था, इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी