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गला दबाकर की गई थी बैंक मैनेजर की हत्या
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सैय्यद यूसुफ अली फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। शहर कोतवाली पुलिस जिस बैंक मैनेजर की मौत को आत्महत्या बता रही थी, उसकी दो बार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या होने की पुष्टि हुई है। एसएसपी ने पूरे मामले की सतर्कता से जांच के निर्देश दिए हैं।
सोमवार सुबह बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर सैय्यद यूसुफ अली का शव कमरे में अंगोछे के फंदे से लटका मिला था। वह जालंधरी सराय मोहल्ले में चांद मियां के मकान में किराये पर रह रहे थे। उस समय पुलिस का कहना था कि सोमवार सुबह बैंक मैनेजर की नौकरानी खाना बनाने पहुंची। उसने जब मैनेजर को मकान खुलवाने के लिए आवाज लगाई तो अंदर से आवाज नहीं आई। इसके बाद वह मकान मालिक को बुलाकर लाई और बाद में सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और सीढ़ी लगाकर मकान में घुसा गया। वहां एक कमरे में मैनेजर का शव फंदे से लटक रहा था। कमरे की एक चाबी नौकरानी के पास थी। उसी से पुलिस ने कमरा खोला और मैनेजर के शव को फंदे से उतारा। उस समय से पुलिस इस मामले को आत्महत्या मानती रही।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बैंक मैनेजर के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव एंबुलेंस से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना कर दिया गया। मैनेजर के भाई और भतीजे हवाई जहाज से पश्चिमी बंगाल जाने के लिए अलग से दिल्ली रवाना हो गए।
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इधर, पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट कोतवाली पहुंची तो पुलिस के पसीने छूट गए। उसमें गला दबाकर हत्या होने की बात सामने आई। जानकारी पर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने तुरंत शव को वापस मंगाने और उसका दोबारा पैनल में पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए। तब तक एंबुलेंस शव लेकर बरेली पहुंच चुकी थी। आनन-फानन में एंबुलेंस को दोबारा बुलाया गया। मैनेजर के भाई और भतीजे समेत पंचायतनामा में शामिल सभी लोगों को दोबारा बुलाकर डीएम के आदेश पर तीन डॉक्टरों के पैनल से फिर से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या की बात सामने आई।
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गला दबाकर की गई हत्या तो हत्यारा कौन ?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी हत्या किसने की। सबसे खास बात यह कि हत्यारे बंद मकान में कैसे घुसे और अंदर से दरवाजे बंद करके कैसे फरार हो गए। इस बात का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो सकता है कि आखिर मैनेजर का हत्यारा कौन है और उसने हत्या क्यों की गई ?
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फरवरी में आई थी मैनेजर की पत्नी
वैसे तो पश्चिम बंगाल का बर्धमान जिला यहां से काफी दूर है। मैनेजर के परिवार वाले हर माह नहीं आते थे। उनकी पत्नी साल छह माह बाद यहां आती थीं और कुछ दिन रुककर चली जाती थीं। पिछले माह फरवरी में ही उनकी पत्नी यहां आईं थीं। वह कुछ दिन रुकीं और घर चली गईं। हालांकि उनके भाई और भतीजे कभी-कभी उनके मिलने बदायूं आ जाते थे।
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चर्चा ये भी...बैंक मैनेजर के खिलाफ चल रही थी जांच
बैंक मैनेजर की मौत के बाद चर्चा यह भी है कि उनके खिलाफ एक जांच चल रही थी। उन्होंने अपनी तैनाती के दौरान तमाम लोगों को लोन दिया था। उनमें कुछ ऐसे लोगों का नाम सामने आए हैं, जिन्हें पांच से दस लाख रुपये तक का लोन दिया गया। एक-एक परिवार में चार-चार लोगों को भी लोन देने की बात सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि इसी कारण उनका तबादला पहले शहर के दूसरे बैंक में और फिर बरेली रीजनल ऑफिस किया गया था। इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही सामने आएगा। इस संबंध में बैंक प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई पर सभी ने चुप्पी साधे रखी।
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मकान मालिक बोले-मकान में घुसना मुश्किल
बैंक मैनेजर जिस मकान में किराये पर रह रहे थे। उसके मालिक चांद मियां का दावा है कि उस मकान में किसी बाहरी आदमी का घुसना मुश्किल है। उस मकान का मुख्य गेट अंदर से बंद था। सीढ़ियों के दोनों गेट भी अंदर से बंद थे।
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मौके पर जो हालात देखने को मिले थे। उससे विपरीत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है। मैनेजर का शव कमरे में फंदे से लटका मिला था। सारे दरवाजे अंदर से बंद थे। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या बताई गई। इसी वजह से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जो सच्चाई होगी, उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
- डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी
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सोमवार सुबह बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर सैय्यद यूसुफ अली का शव कमरे में अंगोछे के फंदे से लटका मिला था। वह जालंधरी सराय मोहल्ले में चांद मियां के मकान में किराये पर रह रहे थे। उस समय पुलिस का कहना था कि सोमवार सुबह बैंक मैनेजर की नौकरानी खाना बनाने पहुंची। उसने जब मैनेजर को मकान खुलवाने के लिए आवाज लगाई तो अंदर से आवाज नहीं आई। इसके बाद वह मकान मालिक को बुलाकर लाई और बाद में सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और सीढ़ी लगाकर मकान में घुसा गया। वहां एक कमरे में मैनेजर का शव फंदे से लटक रहा था। कमरे की एक चाबी नौकरानी के पास थी। उसी से पुलिस ने कमरा खोला और मैनेजर के शव को फंदे से उतारा। उस समय से पुलिस इस मामले को आत्महत्या मानती रही।
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मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बैंक मैनेजर के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव एंबुलेंस से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना कर दिया गया। मैनेजर के भाई और भतीजे हवाई जहाज से पश्चिमी बंगाल जाने के लिए अलग से दिल्ली रवाना हो गए।
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इधर, पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट कोतवाली पहुंची तो पुलिस के पसीने छूट गए। उसमें गला दबाकर हत्या होने की बात सामने आई। जानकारी पर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने तुरंत शव को वापस मंगाने और उसका दोबारा पैनल में पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए। तब तक एंबुलेंस शव लेकर बरेली पहुंच चुकी थी। आनन-फानन में एंबुलेंस को दोबारा बुलाया गया। मैनेजर के भाई और भतीजे समेत पंचायतनामा में शामिल सभी लोगों को दोबारा बुलाकर डीएम के आदेश पर तीन डॉक्टरों के पैनल से फिर से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या की बात सामने आई।
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गला दबाकर की गई हत्या तो हत्यारा कौन ?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी हत्या किसने की। सबसे खास बात यह कि हत्यारे बंद मकान में कैसे घुसे और अंदर से दरवाजे बंद करके कैसे फरार हो गए। इस बात का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो सकता है कि आखिर मैनेजर का हत्यारा कौन है और उसने हत्या क्यों की गई ?
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फरवरी में आई थी मैनेजर की पत्नी
वैसे तो पश्चिम बंगाल का बर्धमान जिला यहां से काफी दूर है। मैनेजर के परिवार वाले हर माह नहीं आते थे। उनकी पत्नी साल छह माह बाद यहां आती थीं और कुछ दिन रुककर चली जाती थीं। पिछले माह फरवरी में ही उनकी पत्नी यहां आईं थीं। वह कुछ दिन रुकीं और घर चली गईं। हालांकि उनके भाई और भतीजे कभी-कभी उनके मिलने बदायूं आ जाते थे।
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चर्चा ये भी...बैंक मैनेजर के खिलाफ चल रही थी जांच
बैंक मैनेजर की मौत के बाद चर्चा यह भी है कि उनके खिलाफ एक जांच चल रही थी। उन्होंने अपनी तैनाती के दौरान तमाम लोगों को लोन दिया था। उनमें कुछ ऐसे लोगों का नाम सामने आए हैं, जिन्हें पांच से दस लाख रुपये तक का लोन दिया गया। एक-एक परिवार में चार-चार लोगों को भी लोन देने की बात सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि इसी कारण उनका तबादला पहले शहर के दूसरे बैंक में और फिर बरेली रीजनल ऑफिस किया गया था। इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही सामने आएगा। इस संबंध में बैंक प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई पर सभी ने चुप्पी साधे रखी।
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मकान मालिक बोले-मकान में घुसना मुश्किल
बैंक मैनेजर जिस मकान में किराये पर रह रहे थे। उसके मालिक चांद मियां का दावा है कि उस मकान में किसी बाहरी आदमी का घुसना मुश्किल है। उस मकान का मुख्य गेट अंदर से बंद था। सीढ़ियों के दोनों गेट भी अंदर से बंद थे।
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मौके पर जो हालात देखने को मिले थे। उससे विपरीत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है। मैनेजर का शव कमरे में फंदे से लटका मिला था। सारे दरवाजे अंदर से बंद थे। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या बताई गई। इसी वजह से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जो सच्चाई होगी, उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
- डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी