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कोरोना ने टूर एंड ट्रैवल कारोबार को मार दी 25 करोड़ की चपत

Sat, 06 Jun 2020 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 02:00 AM IST
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Corona kills tour and travel business worth Rs 25 crore
बदायूं। हर बार 20 मई को स्कूल, कॉलेज बंद होने के बाद लोगों का रुख हिल स्टेशनों समेत अन्य पर्यटन स्थलों की ओर होता था। लोग निजी वाहनों व टैक्सियों आदि से परिवार समेत छुट्टियों पर चले जाते थे। इस दौरान टूर एवं ट्रेवल एजेंसियों का कारोबार पीक पर होता था। पर इस बार लॉक डाउन के चलते यह उद्योग पूरी तरह चौपट हो गया। जानकारों की मानें तो अनलॉक वन के बीच कुछ कामकाज तो पटरी पर लौटता दिख रहा है पर पूरी तरह कारोबार के संभलने में अभी कई और महीनों का समय लग सकता है। टूर एंड ट्रेवल इंडस्ट्री से जुड़े लोग आशंका जता रहे हैं कि आने वाले कई महीने तक कामकाज पटरी पर आने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में इंडस्ट्री को भारी नुकसान से गुजरना होगा जिसकी भरपाई में कई साल लग सकते हैं।
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शहर समेत जिले में लगभग डेढ़ दर्जन टूर एंड ट्रेवल एजेंसियां हैं। यह एजेंसियां चारधाम यात्रा, भारत भ्रमण से लेकर विदेशों तक टूर कराती हैं। इन एजेंसियों के लिए मार्च से मई तक का सीजन सबसे ज्यादा कमाई का होता है। छुट्टी के दिनों में लोग परिवार के साथ देश समेत विदेश यात्रा के लिए बुकिंग कराते हैं। इस बार कारोबार पूरी तरह से चौपट है। मार्च में जो बुकिंग थीं वे भी कैंसिल करा दी गई। बदायूं में ही लॉकडाउन से इस कारोबार को अब तक 20-25 करोड़ के घाटे का अनुमान है। इसके साथ यह भी कहा जा रहा है कि टूर एंड ट्रेवल इंडस्ट्री कम से कम अगले दो साल तक पटरी पर नहीं आएगा। कुछ एजेंसियों ने भारत भ्रमण समेत चारधाम यात्रा के लिए लक्जरी बसें लोन पर ले रखी हैं। एक बस 25 से 30 लाख में तैयार होती है। इनकी ईएमआई देना तक मुश्किल हो जाएगा।
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सबसे ज्यादा मार ड्राइवरों पर
शहर में तकरीबन 1200-1500 ड्राइवर ऐसे हैं जो किराए पर गाड़ी चलाते हैं। वे टूर एंड ट्रेवल वालों के यहां या फिर लोकल वाहन मालिकों के यहां नौकरी करते हैं। लॉकडाउन में ये लोग पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं। कुछ ड्राइवरों ने बैंकों से लोन लेकर लक्जरी टैक्सी खरीद ली है। पीक सीजन में इनका कारोबार भी काफी अच्छा चलता था। लॉकडाउन में यह पूरी तरह बेरोजगार हैं। लॉकडाउन के बाद कई चालकों को तो लक्जरी टैक्सी बैंक ईएमआई भरने के लिए बेचनी तक पड़ सकती हैं।
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एजेंट भी हो गए बेरोजगार
टूर एंड ट्रेवल एजेंसियों से जुड़े एजेंट भी पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। अप्रैल से जुलाई तक का सीजन इन एजेंट के लिए एक साल की कमाई करा देता था। लॉकडाउन में एजेंटों की हालत भी पतली हो गई है। इन एजेंसियों के सामने जो मौजूदा स्थिति है उसको देखकर साफ है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी यह कारोबार जल्द पटरी पर आने वाला नहीं।
हिल स्टेशनों समेत विदेश यात्रा पर जाते थे लोग
गर्मी की छुट्टी में लोग हिल स्टेशनों की तरफ ज्यादा रुख करते हैं। इसलिए उत्तराखंड समेत राजस्थान, हिमाचल प्रदेश के शहरों की बुकिंग ज्यादा होती थी। एजेंसी संचालकों के अनुसार लगभग 20-25 हजार लोग अपने परिवारों के साथ इन शहरों का रुख करते थे। इसके अलावा विदेश में भूटान, थाइलैंड जाने वालों की संख्या ज्यादा होती थी। सिंगापुर और मलेशिया गिने चुने लोग ही जाते थे लेकिन विदेश जाने वालों का आंकड़ा भी सीजन में पांच सौ पार कर जाता था। इस बार सभी ने अपनी बुकिंग रद्द करा ली हैं।

अगले दो साल तक पटरी पर नहीं आएगा कारोबार
शहर समेत जिले में करीब एक दर्जन टूर एंड ट्रेवल एजेंसी हैं। हजारों लोगों को इनसे रोजगार मिल रहा था। सीजन में पूरे साल का कारोबार हो जाता है। अब यह कारोबार कम से कम अगले दो साल तक पटरी पर आने वाला नहीं। लॉकडाउन के बाद कई एजेंसियों बंद तक हो जाएंगी। बैंकों से लोन पर खरीदी गईं लक्जरी बसों, टैक्सी की ईएमआई तो देनी ही होगी। सरकार ने इस पर कोई छूट नहीं दी है। एक अनुमान के मुताबिक इस कारोबार को अब तक करीब 25 करोड़ का घाटा हो सकता है। - प्रदीप शर्मा, टूर एंड ट्रैवल एजेंसी संचालक
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