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हड़ताल खत्म नहीं होने का ठीकरा एसडीएम पर फूटा
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बदायूं। नगर पालिका के सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म न करा पाने और गंदगी के बीच दिवाली होने का ठीकरा एसडीएम सदर के सिर फोड़ दिया गया। नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता की नाराजगी पर डीएम ने एसडीएम से पालिका के ईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी छीनकर सिटी मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। इधर, पालिकाध्यक्ष ने हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं। वेतन व बोनस देने के बाद भी हड़ताल खत्म न करने वाले सफाई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
नगर पालिका परिसर में उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के बैनर तले सफाई कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की जा रही है। इसकी वजह से शहर में हर जगह गंदगी की भरमार है। ऐसे में शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने नगर विकास राज्यमंत्री से शहर में सफाई कराने की मांग की। राज्यमंत्री ने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए डीएम से बात की। इसके बाद में डीएम के निर्देश पर पालिका के ईओ का पदभार संभाल रहे एसडीएम सदर ने सफाई कर्मचारियों से वार्ता की।
एसडीएम ने अक्तूबर माह का वेतन और एक साल का बोनस भी दिलाया। साथ ही अन्य मांगों पर भी विचार करने का आश्वासन दिया लेकिन वह सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म नहीं करा सके। इसकी वजह से शहरवासियों को गंदगी के बीच में दीपावली मनाने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे में राज्यमंत्री की नाराजगी एसडीएम सदर पर भारी पड़ गई। शुक्रवार को डीएम ने एसडीएम सदर से ईओ नगर पालिका का प्रभार हटाकर सिटी मजिस्ट्रेट को दे दिया।
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पहले भी रह चुका है सिटी मजिस्ट्रेट पर चार्ज
नगर पालिका में तैनात रहे ईओ संजय तिवारी के सस्पेंड होने पर सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार को शहर नगर पालिका ईओ का चार्ज दिया गया था। उस वक्त सफाई व्यवस्था काफी हद तक सुधरी थी, लेकिन बाद में संजय तिवारी के बहाल होने पर उन्हें फिर से शहर नगर पालिका ईओ बनाया गया। कुछ समय बाद उन्हें दोबारा सस्पेंड कर दिया। ऐसे में खाली पड़े पद का प्रभार एसडीएम सदर को दिया गया था। इस बीच सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। अब फिर से सिटी मजिस्ट्रेट को ईओ का प्रभार दिया गया है। इस बदलाव के पीछे जिले के दो जनप्रतिनिधियों में अहम के टकराव की चर्चा भी सामने आ रही है। जाहिर है कि बड़े अधिकारी की निगरानी के चलते पालिका स्तर पर कई अहम मामलों में खेल नहीं हो सकेगा। संवाद
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नगर पालिका परिसर में उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के बैनर तले सफाई कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की जा रही है। इसकी वजह से शहर में हर जगह गंदगी की भरमार है। ऐसे में शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने नगर विकास राज्यमंत्री से शहर में सफाई कराने की मांग की। राज्यमंत्री ने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए डीएम से बात की। इसके बाद में डीएम के निर्देश पर पालिका के ईओ का पदभार संभाल रहे एसडीएम सदर ने सफाई कर्मचारियों से वार्ता की।
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एसडीएम ने अक्तूबर माह का वेतन और एक साल का बोनस भी दिलाया। साथ ही अन्य मांगों पर भी विचार करने का आश्वासन दिया लेकिन वह सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म नहीं करा सके। इसकी वजह से शहरवासियों को गंदगी के बीच में दीपावली मनाने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे में राज्यमंत्री की नाराजगी एसडीएम सदर पर भारी पड़ गई। शुक्रवार को डीएम ने एसडीएम सदर से ईओ नगर पालिका का प्रभार हटाकर सिटी मजिस्ट्रेट को दे दिया।
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पहले भी रह चुका है सिटी मजिस्ट्रेट पर चार्ज
नगर पालिका में तैनात रहे ईओ संजय तिवारी के सस्पेंड होने पर सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार को शहर नगर पालिका ईओ का चार्ज दिया गया था। उस वक्त सफाई व्यवस्था काफी हद तक सुधरी थी, लेकिन बाद में संजय तिवारी के बहाल होने पर उन्हें फिर से शहर नगर पालिका ईओ बनाया गया। कुछ समय बाद उन्हें दोबारा सस्पेंड कर दिया। ऐसे में खाली पड़े पद का प्रभार एसडीएम सदर को दिया गया था। इस बीच सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। अब फिर से सिटी मजिस्ट्रेट को ईओ का प्रभार दिया गया है। इस बदलाव के पीछे जिले के दो जनप्रतिनिधियों में अहम के टकराव की चर्चा भी सामने आ रही है। जाहिर है कि बड़े अधिकारी की निगरानी के चलते पालिका स्तर पर कई अहम मामलों में खेल नहीं हो सकेगा। संवाद