फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Civic Amenities

सोत और अरिल नदी को नरौरा नहर से मिलेगा नया जीवन

Wed, 29 Sep 2021 01:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 01:31 AM IST
विज्ञापन
Civic Amenities
नाले में तब्दील हुई शहर से होकर गुजरने वाली सोत नदी। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। दम तोड़ रहीं सोत और अरिल नदियों को निकट भविष्य में फिर से जीवन मिलने की उम्मीद है। इसके लिए बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग ने नरौरा से निकलने वाली करीब 70 किमी लंबी नहर के लिए काम शुरू कर दिया है। सर्वे आदि का काम पूरा कर लिया गया है। इस नहर से जहां सोत और अरिल नदी को जीवन मिलेगा वहीं आसफपुर, बिसौली, इस्लामनगर और अंबियापुर ब्लॉक से डार्क जोन का दंश भी दूर होगा। बाढ़ खंड इस नहर के लिए एस्टीमेट बनाने में जुटा है। जिले में यह दूसरी नहर होगी। बरेली रामगंगा से बदायूं की दातागंज तहसील के हजरतपुर तक 46 किलोमीटर लंबी नहर पर पहले से काम चल रहा है।
विज्ञापन

प्रदेश में बदायूं ऐसा जिला है जहां एक भी नहर नहीं है। ऐसे में यहां के किसान भूमिगत जल और बारिश के पानी के सहारे ही सिंचाई पर निर्भर हैं। भूमिगत जल के बेहद दोहन के कारण जिले के चार ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच चुके हैं। छोटी नदियां अस्तित्व खो रहीं हैं। भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। सोत और अरिल नदियां बिसौली से होकर निकलती हैं। दोनों नदियों में बारिश के सीजन में ही कुछ स्थानों पर पानी दिखता है। शहर में सोत नदी तो नाले में तब्दील हो गई है।
विज्ञापन

नरौरा से निकलने वाली पहली सबसे बड़ी नजर से इन नदियों को जीवन मिलेगा। इसके साथ ही जिले के बड़े असिंचित क्षेत्र को भी फायदा होगा। नरौरा बैराज से निकलने वाली करीब 70 किमी लंबी इस नहर परियोजना के लिए बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग ने सर्वे का काम लगभग पूरा भी कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नरौरा से निकलने वाली इस नहर के निर्माण के बाद लगभग सूख चुकीं सोत और अरिल नदियों को तो जीवन मिलेगा ही इसके साथ ही जिले में तेजी से गिर रहे भूगर्भ जल की स्थिति में भी सुधार होगा।
नगर के नाम पर सिर्फ एक पंप कैनाल
अब तक जिले में नहर के नाम पर सिर्फ एक पंप कैनाल है। यह छोटी नहर बरेली रोड स्थित रसूलपुर से होकर निकलती है। इसकी क्षमता मात्र 25 क्यूसेक पानी की है। इस लहर की लंबाई काफी कम है ऐसे में इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता। यह नहर भी सूखी रहती है। टेल तक पानी बारिश के मौसम में ही पहुंचता है। बिनावर क्षेत्र के कुछ गांवों को इसका फायदा मिलता है। इस पंप कैनाल की व्यवस्थाएं सिंचाई विभाग देखता है। यह भी दुर्दशा का शिकार हो रही है।
पूरी नहीं हो सकी 630 करोड़ की बदायूं सिंचाई परियोजना
बदायूं सिंचाई परियोजना पर 2012 में काम शुरू हुआ था। लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हो सका है। 630 करोड़ की इस परियोजना को अखिलेश सरकार के दौरान मंजूरी मिली थी। इस परियोजना में बरेली रामगंगा से बदायूं की दातागंज तहसील के हजरतपुर तक 46 किमी लंबी नहर बनाने का काम चल रहा है। नहर का काम चार साल में पूरा होना था लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माणाधीन नहर की हकीकत पर गौर करें तो कई स्थानों पर तो अब तक खोदाई का काम भी पूरा नहीं हो सका है। जहां खोदाई हो चुकी है, वहां उसके कुलावे नहीं बन पाए हैं। कटरी के 25 गांवों से होकर यह नहर गुजरनी थी। करीब 46 किमी की नहर का काम 2016 तक पूरा होना था अब तक करीब 30 किमी ही नहर की खोदाई हो सकी है।
यह बोले लोग
करीब दो दशक पहले तक सोत नदी में पानी की कलकल सुनी जा सकती थी। सोत के फाटों पर कब्जे हुए। नगर पालिका ने बड़े नालों का रुख सोत की ओर मोड़ दिया। नदी के सोत बंद हो गए इस कारण अब नदी में सिर्फ कीचड़ है। सोत ऐतिहासिक नदी है। सोत को जीवन मिलता है तो खुशहाली आएगी। -झांझनराम, रिटायर्ड सिंचाई विभाग कर्मी
जिले में कोई नहर नहीं है। जल संरक्षण को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं। नदियां सूख रहीं हैं और भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। चार ब्लॉक डार्क जोन में हैं। सोत और अरिल नदियों को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है। नरौरा से अगर नहर निकलती है तो सिंचाई के लिए भूगर्भ जल पर निर्भरता कम होगी।
- ओमेंद्र कुमार, रिटायर्ड राजस्व कर्मी
नदियों को इस तरह से सूखना और जल प्रदूषण भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है। सोत नदी गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। अरिल नदी सूख चुकी है। नदियों का सूचना पर्यावरण की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। अगर नदियों को पुनर्जीवन मिलता है तो भूगर्भ जलस्तर में भी सुधार होगा। पर्यावरण में भी सुधार होगा।
-ब्रजेश मिश्रा, सार्जेंट(रिटायर्ड) वायु सेना
भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन से समस्या पैदा हो रही है। जल संरक्षण और संचयन सभी की जिम्मेदारी है। पर्यावरण संतुलन के लिए नदियों को पुनर्जीवन मिलना बेहद जरूरी है। रामगंगा से निकलने वाली नहर का काम भी अधूरा है। गंगा, रामगंगा जैसी बड़ी नदियां भी अब सिकुड़ती जा रही हैं।

-आयुष भारद्वाज, पर्यावरण के लिए काम करने वाले विज्ञान शिक्षक
नरौरा से निकलने वाली नहर परियोजना के लिए सर्वे का काम चल रहा है। करीब 70 किमी नहर के निर्माण की परियोजना है। इससे बिसौली, आसफपुर, इस्लामनगर, अंबियापुर, सहसवान ब्लॉक के गांवों को फायदा होगा। अरिल और सोत नदी को भी पुनर्जीवन मिलेगा। सिंचित क्षेत्र बढ़ने से भूगर्भ जल का दोहन कम होगा। परियोजना का एस्टीमेट तैयार करने का काम चल रहा है।
-उमेश चंद्र, एक्सईएन बाढ़ खंड
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed