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1476 राजस्व गांवों में शौचालयों का किया जाएगा स्थलीय सत्यापन
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बदायूं। जिला कागजों में ही खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ है या वास्तविकता कुछ और है, इसकी जमीनी हकीकत क्या है, धरातल पर शौचालय की स्थिति क्या है, उनकी गुणवत्ता कैसी है, इसका पता लगाने के लिए डीएम कुमार प्रशांत ने हर ब्लॉक और गांव के लिए नोडल अधिकारी नामित किए हैं, जो अब शौचालयों का भौतिक सत्यापन कर निर्धारित समय मेें डीएम को अपनी रिपोर्ट देंगे। यदि नोडल अधिकारियों ने वास्तविक रिपोर्ट डीएम को दी, तो निश्चित तौर पर ओडीएफ से जुुड़े कई अफसरों की परेशानी बढ़ सकती है।
जिले के 1476 राजस्व गांवों में करीब तीन लाख से अधिक शौचालय बनाने का शासन की ओर से लक्ष्य दिया गया था। तब केंद्र में भाजपा और राज्य में सपा की सरकार थी, ऐसे में केंद्र सरकार की ये योजना परवान नहीं चढ़ सकी थी। इसके बाद में प्रदेेेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार बन गई, जिसके बाद में शौचालय बनाने की दशा में तेजी से काम होना शुरू हो गया। दो अक्तूबर को जिले को ओडीएफ भी घोषित कर दिया गया, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। ऐसे में डीएम कुमार प्रशांत को इसकी जानकारी मिली। जिसके बाद में डीएम ने सभी 1476 राजस्व गांवों का सर्वे करने के लिए नोडल अधिकारी नामित किये हैं जो ग्रामीण क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण कर शौचालयों की स्थिति परखेंगे। डीएम ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे शौचालयों का बारीकी से निरीक्षण करें और देखेें कि गांवों में कितने शौचालय बने हैं, कितने अधूरे हैं, साथ ही कितने लोगों द्वारा धनराशि मिलने के बाद शौचालयों का निर्माण नहीं कराया है। इसकी रिपोर्ट नोडल अधिकारियों को 11 नवंबर तक डीएम को सौंपनी है।
जिले में बने शौचालयों की हकीकत जानने के लिए नोडल अधिकारी नामित किये हैं। उन्हें निर्देश दिये गए हैं कि वे गांवों में भ्रमण कर शौचालयों का सत्यापन करने के बाद निर्धारित तिथि तक रिपोर्ट दें।
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-कुमार प्रशांत, डीएम
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जिले के 1476 राजस्व गांवों में करीब तीन लाख से अधिक शौचालय बनाने का शासन की ओर से लक्ष्य दिया गया था। तब केंद्र में भाजपा और राज्य में सपा की सरकार थी, ऐसे में केंद्र सरकार की ये योजना परवान नहीं चढ़ सकी थी। इसके बाद में प्रदेेेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार बन गई, जिसके बाद में शौचालय बनाने की दशा में तेजी से काम होना शुरू हो गया। दो अक्तूबर को जिले को ओडीएफ भी घोषित कर दिया गया, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। ऐसे में डीएम कुमार प्रशांत को इसकी जानकारी मिली। जिसके बाद में डीएम ने सभी 1476 राजस्व गांवों का सर्वे करने के लिए नोडल अधिकारी नामित किये हैं जो ग्रामीण क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण कर शौचालयों की स्थिति परखेंगे। डीएम ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे शौचालयों का बारीकी से निरीक्षण करें और देखेें कि गांवों में कितने शौचालय बने हैं, कितने अधूरे हैं, साथ ही कितने लोगों द्वारा धनराशि मिलने के बाद शौचालयों का निर्माण नहीं कराया है। इसकी रिपोर्ट नोडल अधिकारियों को 11 नवंबर तक डीएम को सौंपनी है।
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जिले में बने शौचालयों की हकीकत जानने के लिए नोडल अधिकारी नामित किये हैं। उन्हें निर्देश दिये गए हैं कि वे गांवों में भ्रमण कर शौचालयों का सत्यापन करने के बाद निर्धारित तिथि तक रिपोर्ट दें।
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-कुमार प्रशांत, डीएम