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Budaun News: अव्यवस्था आयुष्मान भव... 62 फीसदी गरीबों को अब तक गोल्डन कार्ड नहीं

Sat, 16 Sep 2023 12:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 16 Sep 2023 12:58 AM IST
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Chaos Ayushman Bhava... 62 percent of the poor have not yet got the golden card.
जिले मे कई पात्रों को नहीं मिल पा रहा शासन की योजना का लाभ
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सिस्टम की लापरवाही कहें या कुछ और जो अब भी तमाम पात्र प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित चल रहे हैं। इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिले में महज 38 प्रतिशत लाभार्थियों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। ऐसे में उन्हें शासन की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना का जोर शोर से शुभारंभ किया था। गरीबों को साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज का प्रचार-प्रसार भी खूब किया गया।
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आयुष्मान मित्रों की तैनाती भी की गई, लेकिन चार साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी जिले के गरीबों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। शासन ने जिले काे 10, 96174 लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य दिया है, लेकिन विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पांच साल भी बाद लक्ष्य के सापेक्ष 38 प्रतिशत ही आयुष्मान कार्ड बन पाए हैं। विभाग के अनुसार बाकी के कार्ड बनाने का काम लगातार चल रहा है।
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संभल जिले के भी गांव है शामिल
प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की गई थी तो संभल जिले की तहसील गुन्नौर के कई गांव बदायूं में शामिल थे, जो बाद में संभल जिले में जुड़ गए। ऐसे में करीब 25 हजार लोग बदायूं से जुड़े हैं। ऐसे में उन लोगों के कार्ड बनाने में विभाग को थोड़ी दिक्कत आ रही है, साथ ही कई लोगों के नामों में अंतर मिलने पर आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं।
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जिले में फर्जी आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए
आयुष्मान कार्ड बनाने की गति भले ही धीमी हो लेकिन जिले में फर्जी कार्ड भी बनाए गए। उस समय प्रमोद कुमार संत का नाम फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वालों में सामने आया। उसने एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कर डाले, वह एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के तहत जिला महिला अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात था। वर्ष 2020 में इस्तीफा देने के बाद उसने यह रैकेट शुरू किया। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस की ई-मेल आईडी और एक अन्य मोबाइल नंबर का भी वह इस्तेमाल करता रहा। इसकी कई दिनों तक जांच भी चली, फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जांच में क्या रहा, इसके बारे में विभागीय अधिकारियों के पास भी कोई जानकारी नहीं है।

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आयुष्मान कार्ड में फर्जीवाड़े के मामले बदायूं समेत प्रदेश के कई जिलों में हुए, जिसके बाद में कुछ जांचें हुई। उसमें क्या रहा, पता नहीं है, लेकिन पिछले दो साल से आधार कार्ड और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद में ही आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो गई है।
- अखिलेश सिंह, डिप्टी सीएमओ
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