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Budaun News: बढ़ते मौसम से दिल की धड़कन की समस्या बनी नई चुनौती
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जिला अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर। संवाद
बदायूं। बदलते मौसम और लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल से जुड़ी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों अनियमित दिल की धड़कन यानी एरिथमिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषण, माइक्रो प्लास्टिक के बढ़ते प्रभाव और असंतुलित जीवनशैली इसका प्रमुख कारण बन रहे हैं।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आने वाले कई मरीज सीने में घबराहट, दिल की धड़कन तेज या धीमी होना, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। जांच के बाद इनमें एरिथमिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। पहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण, माइक्रो प्लास्टिक और जहरीली गैसें सीधे फेफड़ों के जरिए रक्त प्रवाह में पहुंचकर हृदय पर असर डालती हैं। इससे दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाली प्रणाली प्रभावित होती है और एरिथमिया की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी जोखिम को बढ़ा रही है।
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जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. नितिन सिंह ने बताया कि समय पर जांच और उपचार से एरिथमिया को नियंत्रित किया जा सकता है। मरीजों को ईसीजी, इको और अन्य आवश्यक जांच कराकर उचित दवाएं दी जा रहीं हैं।
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जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आने वाले कई मरीज सीने में घबराहट, दिल की धड़कन तेज या धीमी होना, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। जांच के बाद इनमें एरिथमिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। पहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण, माइक्रो प्लास्टिक और जहरीली गैसें सीधे फेफड़ों के जरिए रक्त प्रवाह में पहुंचकर हृदय पर असर डालती हैं। इससे दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाली प्रणाली प्रभावित होती है और एरिथमिया की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी जोखिम को बढ़ा रही है।
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जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. नितिन सिंह ने बताया कि समय पर जांच और उपचार से एरिथमिया को नियंत्रित किया जा सकता है। मरीजों को ईसीजी, इको और अन्य आवश्यक जांच कराकर उचित दवाएं दी जा रहीं हैं।